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सैयद खांलिद कैस समूह सम्पादक सार्थक मीडिया एण्ड पब्लिकेशंस
आज भारत माता का सच्चा सपूत भारत रत्न देश का गौरव अटल बिहारी बाजपेयी हमेशा हमेशा के लिये इस लोक से देवलोक को प्रस्थान कर गये। भारत माता के इस सपूत की कमी सम्पूर्ण विश्व हमेशा मेहसूस करेगा। एक ऐसा व्यक्तित्व जो राजनीति से कोसो दूर कवि हृदय और अपनी मातृभूमि का सच्चा चितंक । जिसने कभी अपने उसूलो से समझौता नही किया। जिसने झूकना नही सीखा । जिसने देश की अस्मिता के लिये अपना राजपाठ त्याग दिया।एक ऐसा महापुरूष जिसका सम्मान विश्वधरा पर हर देश ने किया। एक ऐसा कुशल वक्ता जिसके वचनो का लोहा विपक्ष भी मानती थी। एक ऐसा राजनेता जिसका सम्मान हर विपक्षी नेता करता था। एक ऐसा नेता जिसने अपनी सच्चाई के कारण देश का नाम हमेशा रोशन किया। विपक्षी नेता इंदिरा गॉंधी को दुर्गा का अवतार कहने वाले अटल बिहारी का काब्लियत ही थी जो इंदिरा गांधी ने अपने दो संसदो को इस्तीफा दिलवाकर उप चुनाव कराये तथा निरंक विपक्ष की पूर्ति करते हूए संसद में अटल जी और लालकृष्ण आडवानी का प्रवेश कराया। वास्तव में अटल बिहारी बाजपेयी युग पुरूष थें।उनका सम्पूर्ण जीवन सवार्थ का समर्पित रहा । ऐसे कालजेयी महापुरूष को सार्थक मीडिया एण्ड पब्लिकेशसं परिवार के खबरें आज तक /क्रांति टाइम्स एंव एनडीटीवी 18 लाइव न्यूज की और से हार्दिक श्रद्धांजलि ।
अटल बिहारी वाजपेयी भारत के दसवें प्रधानमंत्री थे। वे पहले १६ मई से १ जून १९९६ तक, तथा फिर १९ मार्च १९९८ से २२ मई २००४ तक भारत के प्रधानमंत्री रहे।
वाजपेयी हिन्दी कवि, पत्रकार व एक प्रखर वक्ता थे। वे भारतीय जनसंघ के संस्थापकों में एक थे, और १९६८ से १९७३ तक उसके अध्यक्ष भी रहे। उन्होंने लम्बे समय तक राष्ट्रधर्म, पाञ्चजन्य और वीर अर्जुन आदि राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत अनेक पत्र-पत्रिकाओं का सम्पादन भी किया। अपना जीवन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में आजीवन अविवाहित रहने का संकल्प लेकर प्रारम्भ करने वाले वाजपेयी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार के पहले प्रधानमन्त्री थे, जिन्होंने गैर काँग्रेसी प्रधानमन्त्री पद के ५ साल बिना किसी समस्या के पूरे किए। उन्होंने २४ दलों के गठबंधन से सरकार बनाई थी जिसमें ८१ मन्त्री थे।
सम्प्रति वे राजनीति से संन्यास ले चुके थे और नई दिल्ली में ६-ए कृष्णामेनन मार्ग स्थित सरकारी आवास में रहते थे । १६ अगस्त २०१८ को एक लम्बी बीमारी के बाद अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, दिल्ली में श्री वाजपेयी का निधन हो गया। वे जीवन भर भारतीय राजनीति में सक्रिय रहे।
