सैयद खालिद कैस समूह सम्पादक भोपाल 8770806210

भोपाल – पिछले चार साल में देश में पत्रकारिता पर हो रहे हमलों ए सरकार द्वारा लगातार दबाव और नियंत्रण ने यह स्पष्ट हो गया है कि भाजपा सरकार के आने के बाद लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ कहे जाने वाले पत्रकारिता पर हो रहे हमले प्रेस की आजादी को समाप्त करने का षडयंत्र ही है। देश में पत्रकारों की हत्याऔं हमलो तथा उनकी आवाज दबाने का प्रयासों की निरन्तर बढोत्ररी चिन्ता का विषय है। पिछले चार साल में देश के नामीीगिरामी पत्रकारों की हत्या तथा उनके विरूद्ध फर्जी मुकदमें बाजी से कोई अनजान नही है।
सरकार के टुकडों पर पलने वाले मीडिया घरानो की चाटुकारिता का परिणाम है कि निष्पक्ष पत्रकारिता का अभियान चलाने वालो के प्रति सरकार का कुचक्र लगातार दमनकारी होता जा रहा है। प्रिंट मीडिया का लगातार गला घोटने वाली सरकार ने इलेक्ट्र्ानिक मीडिया को भी निशाने पर लिया । पहले एनडीटीवी को सताने वाली सरकार ने जब तक उसका गला नही घोंटा तब तक दम नही लिया।सरकार के निशाने पर हमेशा ईमानदार निष्पक्ष पत्रकारिता वाले पत्रकार रहे हैं। यदि वर्तमान परिदर्श्य में सरकार की दमनकारी नीतियों के मददेनजर यह कहा जाये कि यह युग निष्प़क्ष पत्रकारिता के लिये आपातकाल से कम नही है तो अतिश्योक्ति नही होगी।
जो बिका नही वह टिका नही
कल पुण्य प्रसून वाजपेई का ABP News से इस्तीफा। प्राइम टाइम कार्यक्रम बंद करवाया गया। सरकार के दबाव के चलते कई दिन से प्रसून का प्रोग्राम ‘मास्टरस्ट्रोक’ स्क्रीन पर बाधित किया जा रहा था। सैटेलाइट से गड़बड़ी पैदा की जा रही थी। आज प्रसून दफ्तर आए तो उनसे कहा गया कि वे अपना काम कर के चले जाएं। संभव है कि आज ही उनके शो का आखिरी दिन हो।
बहरहाल वे दफ्तर से निकल गए और खबर आम हो गई कि उन्हें कल से आने को माना कर दिया गया है। इससे पहले कल चैनल के प्रबंध संपादक मिलिंद खांडेकर ने इस्तीफा दिया था।
प्रसून के अलावा अभिसार शर्मा को भी लंबी छुट्टी पर भेज दिया गया है। सरकार को रास न आने वाली खबरों के चलते ABP News में संपादकीय कत्लेआम मच चुका है। माना जा रहा है सरकार का अगला कोपभाजन कई और बड़े पत्रकार बन सकते हैं।
केन्द्र की सरकार की दमनकारी नीतियों के बावजूद निष्पक्ष पत्रकारिता हमेशा जिन्दा थी, जिन्दा है तथा जिन्दा रहेगीं पत्रकारिता के इस आपातकाल के बावजूद सरकार यह भली भांति जान ले कि तुम जितना दबाऔगे हम उतना लिखेगें अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति भारत ने केन्द्र सरकार की पत्रकारिता के लिये चलाई जा रही दमनकारी नीतियों का विरोध करते हूए इस आघोषित आपातकाल की निन्दा करते हूए इस नीति को सरकार के ताबूत में कील लगाना निरूपित किया.
