सरकार ने पेश की गलत जानकारी -भोपाल गैस त्रासदी पीड़ितों के इलाज के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर्स व स्टाफ की नियुक्ति मामला
न्यायमूर्ति आरएस झा व जस्टिस मोहम्मद फहीम अनवर की युगलपीठ ने उक्त रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लेते हुए अगली सुनवाई 3 माह बाद निर्धारित कर दी। इस बीच सरकार को सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के पालन में अपनी अगली रिपोर्ट पेश करने कह दिया गया।
मामला भोपाल गैस पीड़िता महिला संगठन की जनहित याचिका से संबंधित है। जनहित याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ व राजेश चंद पक्ष रख रहे हैं। उन्होंने कोर्ट को अवगत कराया कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के कड़े निर्देशों के बावजूद केन्द्र व राज्य शासन का रवैया लापरवाहीपूर्ण रहा है।
इस वजह से भोपाल गैस त्रासदी पीड़ितों का समुचित इलाज नहीं हो पा रहा है। आलम यह रहा है कि भोपाल की अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों सहित अन्य स्टाफ की नियुक्ति के लिए नियम तक बनाने में इतना लंबा समय लगा दिया गया।
भोपाल में 6 अस्तपाल भोपाल गैस त्रासदी पीड़ितों के लिए निर्धारित हैं, जिनमें सभी आवश्यक इंतजाम होने चाहिए। लेकिन भगवान भरोसे काम चलता आया है। चूंकि नियम व शर्तें नदारद थीं, अत: पहले से नियुक्त चिकित्सकों तक ने नौकरियां छोड़ दी थीं।
