छतरपुर//महाराजपुर– कल दिनांक 14 मार्च 2019 को महाराजपुर थाना अंतर्गत वार्ड नंबर 15 कुसमा रामलीला मुहाल में धर्मेंद्र शिवहरे नामक युवक ने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली जिसे तुरंत महाराजपुर स्वास्थ्य केन्द्र लाया गया डॉक्टर ने देखने के उपरांत उसे मृत घोषित कर दिया परिजनों ने थाने जाकर नाम दर्ज F. I.R के लिए कहा तो पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद एफ आई आर दर्ज करने की बात कही बही 15 मार्च 2019 सुबह करीब 9:00 बजे सैकड़ों लोगों ने महाराजपुर थाने का घेराव कर दिया और परिजनों ने पुलिस प्रताड़ना एवं लगभग 10 महीने पहले हुई एफ आई आर 376 धारा के तहत फर्जी फसाने में राजीनामा के नाम पर तीन लाख पचास हजार रुपये देने के बाद सात लाख रुपये की मांग से प्रताड़ित होकर धर्मेंद्र शिवहरे ने आत्महत्या की है और परिजनों ने यह भी बताया कल जब थाने आये तो कुछ पुलिस वालों ने यह तक कह दिया कि आपने ही अपने पुत्र को मार दिया।
घंटों थाना घेराव , समझाइश के बाद लोग नही माने
पोस्टमार्टम होने के बाद शव को लेकर थाने पहुंच गये लेकिन पुलिस ने आवेदन लेकर अंतिम संस्कार के लिए शव को लेकर चले गए परंतु श्मशान घाट पहुंचने के बाद जब परिजनों को मृतक की जेब में सुसाइड नोट जैसा कुछ कागज नजर आया तो उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना दी लेकिन महाराजपुर पुलिस की कार्यप्रणाली के चलते पुलिस घंटों नहीं पहुंची जिससे लोगों ने शव को रोड पर रखकर कुसमा श्मशान घाट में जाम लगा दिया जो जाम घंटों चला।
पुलिस के इस रवैया से लोगों का विश्वास कितना टूटा यह तो घटना में घटित होने और बार बार थाने का घेराव और जाम ही बताता है लेकिन जब वरिष्ठ अधिकारियों को भी इसकी जानकारी दी गई उसके उपरांत भी महाराजपुर थाने से महज 1 किलोमीटर दूर सुसाइड नोट जप्त करने में भी पुलिस को स्टाफ की कमी खली और 55 मिनट नहीं पहुंचे।
इस पूरी घटना ने जहां महाराजपुर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाया वही इस बात को भी नहीं भूलना चाहिए कि फिल्मी स्टाइल में चल रहे थाने पर अब जनता का विश्वास सिर्फ फिल्मी भरोसे जैसा ही है आत्महत्या जैसे केसों में जब हॉस्पिटल में पोस्टमार्टम के पहले कपड़ों की सर्च नहीं की गई और ना ही पुलिस अभी तक परिजन के घर गई वह कार्यवाही किस रूप में करेगी यह तो भगवान ही जाने लेकिन जनता करे तो क्या हत्या और आत्महत्या के खेल में बार-बार अस्पताल और महाराजपुर पुलिस पर सवाल उठते रहे हैं पोस्टमार्टम के पहले सर्चिंग नहीं की जाती पुलिस द्वारा आवेदन लेने के बाद परिजन के घर नहीं जाना चाहिए था लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं 14 मार्च शाम की घटना से 15 मार्च 4:00 बजे तक सब कुछ रोड पर दिख रहा था पर अधिकारी करे भी तो क्या….
✍MP//छतरपुर//महाराजपुर:-खेमराज चौरसिया(आरटीआई कार्यकर्ता)
