भोपाल ।@khalidqais786
जिस नोटबंदी को नरेन्द्र मोदी सरकार अपनी उपलब्धि बताकर अपनी ही पीठ थपथपा रही है वह देशवासियों के लिए किसी अभिशाप से कम नही था । काले धन की वापसी और रोकथाम का दावा करने वाली मोदी सरकार का सही मायने में नोटबंदी का निर्णय अज्ञानतावश लिए गए अकुशल एवं तानाशाह प्रशासक का लिया ख़तरनाक निर्णय के अलावा कुछ साबित नही हुआ । यहाँ तक की नोटबंदी में हुई मौतों तक की जानकारी को सार्वजनिक करने से डर रही है मोदी सरकार ।
गौरतलब हो कि सूचना का अधिकार अधिनियम में चाही गई जानकारी के सम्बन्ध में प्रधानमंत्री कार्यालय जिसे पीएमओ भी कहते हैँ ने केंद्रीय सूचना आयोग को बताया है कि उसके पास नोटबंदी के बाद हुई मौतों के बारे में कोई सूचना नहीं है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 8 नवम्बर 2016 को नोटबंदी की घोषणा की थी. पीएमओ के मुख्य जनसूचना अधिकारी (सीपीआईओ) ने केंद्रीय सूचना आयोग के समक्ष यह दावा किया है.
केंद्रीय सूचना आयोग एक आरटीआई आवेदक की याचिका पर मामले की सुनवाई कर रहा था, जिसे आवेदन देने के बाद आवश्यक 30 दिनों के अंदर सूचना मुहैया नहीं कराई गई थी. तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में 18 दिसम्बर 2018 को कहा था कि उपलब्ध सूचना के मुताबिक नोटबंदी के दौरान भारतीय स्टेट बैंक के तीन अधिकारी और इसके एक ग्राहक की मौत हो गई थी. बताया जाता है कि नोटबंदी से जुड़ी मौत को सरकार ने पहली बार स्वीकार किया था.
देशभर से नोटबंदी से जुड़े मामलों में लोगों की मौत की खबर आई थी. नीरज शर्मा ने पीएमओ में आरटीआई आवेदन देकर जानना चाहा कि नोटबंदी के बाद कितने लोगों की मौत हुई थी और उन्होंने मृतकों की सूची मांगी थी. पीएमओ से निर्धारित 30 दिनों के अंदर जवाब नहीं मिलने पर शर्मा ने सीआईसी का दरवाजा खटखटाकर अधिकारी पर जुर्माना लगाए जाने की मांग की. सुनवाई के दौरान पीएमओ के सीपीआईओ ने आवेदन का जवाब देने में विलंब के लिए बिना शर्त माफी मांगी. उन्होंने कहा कि शर्मा ने जो सूचना मांगी है वह आरटीआई कानून की धारा 2 (एफ) के तहत ‘सूचना’ की परिभाषा में नहीं आती है।
सूचना आयुक्त सुधीर भार्गव ने कहा, ‘दोनों पक्षों की सुनवाई करने और रेकॉर्ड देखने के बाद आयोग ने पाया कि शिकायतकर्ता ने आरटीआई आवेदन 28 अक्टूबर 2017 को दिया था और उसी दिन वह जवाब देने वाले अधिकारी को मिल गया था. सीपीआईओ ने सात फरवरी 2018 को उन्हें जवाब दिया. इस तरह जवाब दिए जाने में करीब दो महीने का विलंब हो गया.’ हालांकि उन्होंने कोई जुर्माना नहीं लगाया।
