छतरपुर से खेमराज चौरसिया की रिपोर्ट
छतरपुर – छतरपुर ज़िले मेँ भारत सरकार की महत्वकांक्षी योजना स्वच्छ भारत अभियान में लगे एनजीओ खुले आम लोगों को लूट रहे हैँ , और प्रशासन मौन धारण किये हुऐ है या यह कहें कि सब मिलीभगत के फलस्वरूप हो रहा है और पिस रहा गरीब आदमी !

ऐसा ही मामला मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के महाराजपुर नगर पालिका का सामने आया है। जहां इतवारी बाजार में लगभग हजार से बारह सौ दुकानदारों को पॉलिथीन के उपयोग को प्रतिबंधित करने के नाम पर एन जीओ की महिला कर्मचारियों ने चौथ वसूली की। जिसमें कुछ दुकानदारों से ₹500 तो कुछ दुकानदारों से ₹200 कुछ से 50 तो 20 वसूले गए परन्तु इस वसूली अभियान में देखने में यह आया कि उक्त वसूली के फलस्वरूप कुछ दुकानदारों को रसीद दी और कुछ को नहीं दी गई । जो रसीद प्रदान की गई है वह भी मछली रॉयल्टी की है।
देखने में यह भी आया है कि वसूली कर्ता द्वारा ₹200 लिए और रूपए 50 की रसीद दी गई । साफ देखा जा सकता है दुकानदार कैमरे मैं बोलने तो नही पर कैमरे बंद के बाद बहुत कुछ बयां किया पॉलिथीन के नाम पर हो रही लूट पर इस पूरे मामले में नगरपालिका का कोई भी सक्षम अधिकारी साथ में नजर नहीं आया।
जब राजस्व वसूली की बात आती है तो मध्य प्रदेश सरकार के नियम को ताक पर रख दिया गया न तो कोई अधिकारी कर्मचारी रहा डेली बेस कर्मचारियों व एनजीओ के कर्मचारियों ने मनमानी कर लाखों रुपए की वसूली और दुकानों की पॉलीथिन को जप्त किया लेकिन किसी का भी जप्ती या पंचनामा नही बनाया।
आपको ज्ञात हो कि 1942 का बना हुआ सागर संभाग का ओपन मार्केट भवानी मार्केट जहां इतवारी बाजार लगती है। जिसमें लगभग 90 से 100 गांव के लोग बाजार में आते हैं कुछ अपना सामान बेचने आते हैं कुछ खरीदने दुकानदारों ने बताया कि पैसे ले गए और रसीद भी नहीं दी यह सब कुछ चलता रहा नगरपालिका के कुछ डेली बेसिस कर्मचारी भी साथ दिखे ऐसी लूट पर क्या सरकार और कलेक्टर कुछ कार्यवाही इन एन जीओ पर नियम के साथ करती हैं कि नहीं यह समय ही बताएगा।
एनजीओ के द्वारा सफाई अभियान के नाम पर पहले भी लाखों रुपए पार्क मैं वृक्षारोपण और जागरूकता के नाम पर नगरपालिका से वसूल किए गए हैं जो कि आज ना तो पार्क है ना एक भी पेड़ जहां पार्क बनाया गया था वहां बिना बाउंड्री के ही पेड़ लगाए गए थे पर कार्यवाही आज तक कुछ भी नहीं हुई।
पॉलिथीन के नाम पर जहां बड़े दुकानदार थोक विक्रेताओं के यहां कार्रवाई करने से अधिकारी डरते हैं वहीं छोटे दुकानदार सब्जी विक्रेताओं का जीना दुश्वार कर दिया। हम यह नहीं कहते कि पॉलिथीन की बिक्री पर पाबंदी ना लगाई जाए पर उसके पूर्व दुकानदारों को जागरूक भी कर दिया जाता तो भी अच्छा होता। बाज़ार में गंदी का अंबार था और ज़िम्मेदार अपनी जिम्मेदारियों से मुंह छिपाते नज़र आए ।
