भोपाल । अपनी अस्मिता बचाने और अय्याश, शराब के पब चलाने वालो के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाली महिला पत्रकार को फिर मिली जानसे मारने की धमकी !
गौरतलब हो कि भोपाल में 144धारा लगी होने के बावजूद पुलिस के संरक्षण का ही नतीजा था जो एमपी नगर क्षेत्र का एक क्लब आधी रात को नौजवानों को शराब और नशीले सेवन परोस रहा था । जिसका स्ट्रिंग ऑपरेशन करने निकली जांबाज महिला पत्रकार पर क्लब के मेनेजर और उसके साथियों द्वारा पहले धमकाया गया , रिश्वत देने का प्रयास किया गया । जब महिला पत्रकार नही मानी तो सभी ने एक राय होकर उसके साथ मारपीट की , उसे प्रताड़ित , उसी इज्जत और गरिमा को ठेस पहुंचाई । मगर महिला पत्रकार “मर्दानी “ने साहस नही छोड़ा । अपराधियो को सबक सिखाने का बीड़ा उठाया । अकेली जान महिला पत्रकार को एमपी नगर पुलिस का भी सहयोग नही मिला । परंतु उसने हार नही मानी और 02/11/2019 को घटित अपराध की अन्ततः 14-15दिन बाद एफआईआर दर्ज हुई और एक आरोपी गिरफ्तार होकर जैल की सलाखों तक पहुँच गया, शेष को राजनैतिक संरक्षण कहें या पुलिस से साठगांठ जो अब तक उनकी गिरफ्तारी नही हो सकी ।
जांबाज महिला पत्रकार लगातार पूरी हिम्मत के साथ आरोपियों के खिलाफ मोर्चा संभाली है । पुलिस को लगातार खबर देने और न्याय के लिए सोशल मीडिया पर आवाज बुलंद रखने पर उसको एक आरोपी के साथी ने धमकाया , जान से मारने की धमकी दी । यहां तक कि उसकी मदद करने या समर्थन करने वालों को तक मारने मरवाने की धमकी दी । महिला पत्रकार ने साहस का साथ नही छोड़ा और धमकी देने वाले के खिलाफ एमपी नगर थाने में फोन पर शिकायत की जब न्याय और सुरक्षा मिलती दिखाई नही दी तो “मर्दानी ” ने खुद थाने ने धावा बोला । महिला जात , अबला नारी का सारा मिथक तोड़ा और अन्ततः आज सुबह महिला पत्रकार ने 2-56बजे एमपी नगर थाने में आरोपी के खिलाफ धारा -507 भादवि का अपराध दर्ज करवा कर ही दम लिया । एमपी नगर थाने ने अपराध क्रमांक 612/2019 धारा 507भादवि समय 4-14बजे दर्ज किया ।
अब सवाल यह उठता है कि जनता की रक्षक पुलिस के समक्ष रात्रि 2-56बजे गठित अपराध के लिए 2-3घंटे एक महिला पत्रकार को थाने में बिठाकर एफआईआर दर्ज करने वाली पुलिस का व्यवहार सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के खिलाफ नही है क्या ?
क्या ? सच उजागर करके न्याय और अस्मिता के लिए संघर्ष करना महिला पत्रकार का अपराध है ।
क्या ? एमपी नगर पुलिस यह जानते हुए भी कि महिला पत्रकार की जान को खतरा है उदासीनता का प्रदर्शन करके क्या साबित करना चाहती है । निर्भया से लेकर रेड्डी तक और भी नजाने कितनी मासूम बहने जालिमों की शिकार हुई उनकी रक्षा में असफल पुलिस महिला पत्रकार की सुरक्षा के प्रति इतनी उदासीन क्यो ?
महिला पत्रकार द्वारा दर्ज कराए गए अपराध के अपराधी खुले आम घूम रहे है और पुलिस उनको गिरफ्तार क्यो नही कर रही ?
क्या ? एक महिला , एक पत्रकार का इतनी सुबह थाने में विवश होकर एफआईआर के लिए जाना , घंटों थाने में उसे बिठाना क्या यह पुलिस का उचित व्यवहार था ?
यह सब सवाल यह साबित करते हैं कि पुलिस ही ज़िम्मेदार है महिला अपराध के बढ़ते ग्राफ के लिए ।
@भोपाल से सैयद ख़ालिद कैस
