मध्यप्रदेश के गैर अधिमान्य पत्रकारों के साथ शिवराज सरकार का षड्यंत्र उजागर- कुठाराघात की निंदा
भोपाल। कोरोना संक्रमण बढ़ने के बाद एक्शन में आई मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार द्वारा जहाँ ताल ठोककर लॉक डाउन नही लगाने पर बल दिया गया ,वहीँ पहले रविवार कर्फ्यू,फिर शनिवार रविवार ओर फिर धीरे धीरे पूरे प्रदेश में अघोषित लॉक डाउन लगाकर जनता की कमर तोड़ दी। परन्तु इस सबके बावजूद जो ख़ामोशी से सरकार ने षड्यंत्र रचा उससे पिछले 01 वर्ष से अधिक समय से जान जोखिम में डालकर अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने वाले उन पत्रकारों के साथ कुठाराघात हुआ है।
गौरतलब हो कि शिवराज सरकार और उसके निर्देश पर तमाम कलेक्टर्स ने जो आदेश पारित किए हैं उसमें हॉकर और केवल अधिमान्य पत्रकारों को ही लॉक डाउन में निकलने की अनुमति का उल्लेख है। उक्त आदेश के माध्यम से शिवराज सरकार ने गैर अधिमान्य पत्रकारों के पर कतरने का षड्यंत्र रचा है।
मालुम हो कि प्रदेश भर में हज़ारों की संख्या में गैर अधिमान्य पत्रकार (सोशल मीडिया के अलावा प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया,पोर्टल,यू ट्यूब चैनल्स) अपने दायित्व निर्वहन में लगे हैं,ऐसे में सरकार द्वारा उनको लॉक डाउन अवधि में कवरेज से रोकना और प्रतिबंधित करना षड्यंत्र का ही हिस्सा है।
प्रेस क्लब ऑफ़ वर्किंग जर्नलिस्ट्स के अध्यक्ष सैयद ख़ालिद क़ैस ने शिवराज सरकार के गैर अधिमान्य पत्रकारों के साथ किये गए इस कुठाराघात हमले की निंदा करते हुए तत्काल प्रभाव से आदेश में संशोधन करने की मांग की है।अन्यथा संगठन को सरकार के इस हमले के खिलाफ सड़को पर आना पड़ेगा।
