भोपाल। आज भोपाल कलेक्टर कार्यालय में न्याय की आस मे एक विकलांग लड़की कलेक्टर से मिलने की आस लिए दिन अपने बीमार और बूढ़े दादा के साथ भटकती रही ,परन्तु कलेक्टर के दिन भर नही आने के बाद निराश होकर चली गई उसे आस थी कि कलेक्टर से उसे ना सिर्फ न्याय मिलेगा वरन सुरक्षा भी मिलेगी , परन्तु उसको निराशा ही मिली । गोरतलब हो कि राजधानी के सर्वधर्म दामखेडा कोलार निवासी दिनेश कपिल कॊ 1998 में सर्वधर्म बी सेक्टर दामखेडा कोलार में राजीव गाँधी आश्रय योजना के अन्तर्गत पट्टा क्रमांक 44 प्राप्त हुआ था ,जिसपर मकान बनाकर वह अपने परिवार के साथ निवासरत था। मेहनत मजदूरी करके अपने परिवार को पालने वाले दिनेश के परिवार में पत्नी रानी के अलावा विकलांग पुत्री शालू कपिल (24) सहित २ लड़के भी थे । सारा परिवार सुखी जीवन जी रहा था ।

माँ की मौत के बाद सिर से छिन गई छत
वर्ष 2006 में दिनेश की पत्नी रानी के आकस्मिक निधन के बाद दिनेश कपिल टूट गया तथा शराब के नशे में डूब गया । रानी की मौत के बाद उसके माता पिता बच्चो कॊ खंडवा ले गये ।बेरोज़गारी से परेशान दिनेश कपिल ने अपना मकान किराये से संतोष शेजवाल उर्फ केजरीवाल आत्मज कोमल प्रसाद कॊ दे दिया। दिनेश की मजबूरी का फायदा उठाकर संतोष ने उसके मकान पर कब्जा कर लिया। ननिहाल से वापस लोटने पर विकलांग शालू कपिल कॊ जब यह पता चला के उसके मकान कॊ संतोष ने हड़प लिया तो उसने सीएम हेल्पलाइन में 19/09/2017 कॊ शिकायत संख्या 4629270 दर्ज कराकर न्याय की माँग की । तत्पश्चात 24/10/2017 कॊ तहसीलदार हुजूर विनोद सौनकिया कॊ लिखित शिकायत की । परन्तु तब से अब तक केवल भटकने के और पेशियों पर पेशिया मिलने के उसे कुछ हासिल नही हुआ। बेईमान संतोष वा उसकी पत्नी के नाम कई पट्टे हैं तथा वह लोग धन सम्पन्न होकर भूमाफिया हैं गरीबों की मज़बूरी का फायदा उठाना उनकी आदत है दम्पत्ति ने फर्जी दान पत्र और बिक्री नामा भी बनवा रख़ा है
चलने फिरने में पूर्ण रूप से अक्षम शालू कपिल ने अब भी हिम्मत नही हारी है ,वह न्याय की आस में आज भी है ,देखना यह है कि मानसिक रूप से विकलांग समाज और द्रष्टिहीन प्रशासन उसको न्याय कब दिलाता है ,क्योंकि उस मकान के अलावा उसके पास सिर छुपाने कॊ कोई आसरा नही ।
प्रशासन का दोगला रूप उजागर –
इस पूरे घटनाकर्म में भोपाल जिला प्रशासन का दोगला रूप उजागर हुआ है ,प्रशासन जानबूझकर विकलांग लड़की को दर बदर की ठोकरे खाने को छोड़े हुए हैं .
न्यूज़ : सैयद खालिद कैस
