भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक कूटनीतिक ट्वीट किया है। एक ऐसा ट्वीट जिसके 2 अर्थ निकलते हैं। एक प्रसंग उन्होंने खुद लिंक किया है जबकि दूसरा प्रसंग गुजरात चुनाव हो सकता है। उन्होंने श्री रामचरितमानस का एक दोहा शेयर किया है। उन्होंने लिखा है ‘हो, जेहिके जेहि पर सत्य सनेहू। सो तेहि मिले न कछु संदेहू।।’ रामायण में इसका प्रसंग माता सीता की मनोकामना से है। शिवराज सिंह ने इसे ‘रामसेतु’ के संदर्भ में लिखा है परंतु इसका राजनैतिक अर्थ गुजरात चुनाव से जाकर जुड़ता है।
पूरा दोहा और श्री रामचरितमानस के अनुसार उसका अर्थ
तौ भगवानु सकल उर बासी। करिहि मोहि रघुबर कै दासी।।
जेहि कें जेहि पर सत्य सनेहू। सो तेहि मिलइ न कछु संदेहू।।
प्रसंग बालकांड का है। राजा जनकजी प्रतिज्ञा करते हैं कि वे अपनी पुत्री सीताजी का विवाह उससे करेंगे, जो शिव के भारी धनुष को उठाकर तोड़ दे। सीताजी का मन श्रीराम के प्रति आकर्षित हो चुका था। वे चाहती थीं कि उनके पिता की प्रतिज्ञा बेकार न जाए। साथ ही उनका विवाह तेजस्वी व हर तरह से श्रेष्ठ राजकुमार श्रीराम से ही हो परंतु उनके मन में यह संदेह था कि शायद ये कौमल सुकुमार शिव के भारी धनुष को उठा न सकें। ऐसे में उनका मन व्याकुल हुआ जा रहा था। तब सीताजी धीरज रखकर अपने हृदय में यह विश्वास ले आईं, ‘अगर तन, मन और वचन से मेरा प्रण सच्चा है और श्रीरघुनाथजी के चरणकमलों में मेरा मन वास्तव में रम गया है, तो सबके हृदय में निवास करने वाले श्रीरामजी उन्हें जीवनसंगिनी जरूर बनाएंगे।
सीएम शिवराज सिंह ने कहां प्रयोग किया
सीएम शिवराज सिंह ने इस दोहे का प्रयोग ‘श्रीराम सेतु’ के ताजा संदर्भ में किया है। आपको ज्ञात ही होगा कि यूनेस्को ने हाल ही में इसकी पुष्टि की है। इस तरह की वैज्ञानिक पुष्टि पहले भी हो चुकी है परंतु एक वर्ग इसे बड़ी सफलता मान कर प्रचारित कर रहा है।
गुजरात चुनाव से इसका क्या अर्थ हुआ
गुजरात विधानसभा चुनाव का प्रचार हाल ही में खत्म हुआ है। गुरूवार को वोटिंग है। पहले फेस का मतदान हो चुका है। राजनीति में बच्चे से लेकर बूढ़े तक हर कोई यही अनुमान लगा रहा है कि गुजरात चुनाव का परिणाम क्या होगा। सीएम शिवराज सिंह के लिए गुजरात चुनाव काफी महत्व रखते हैं। गुजरात के परिणाम मध्यप्रदेश को तो प्रभावित करेंगे ही साथ ही सीएम शिवराज सिंह की भाजपा में स्वतंत्रता को भी प्रभावित करेंगे। पिछले कुछ दिनों में सीएम शिवराज सिंह पर काफी अंकुश लगाने के प्रयास किए गए हैं। प्रस्तुत हुए दोहे का एक संदेश यह भी है कि ‘जिसका जिस पर सच्चा स्नेह होता है, वह उसे मिलता ही है, इसमें कुछ भी संदेह नहीं है।’’ राजनीति के संदर्भ में इसके 2 अर्थ हैं। शिवराज सिंह संकेत कर रहे हैं कि वो जिस लक्ष्य को पूरे दिल से चाहते हैं, वह उन्हे मिल ही जाएगा। चुनाव के संदर्भ में इसका तात्पर्य यह निकाला जा सकता है कि ‘गुजरात चुनाव में जीत उसी की होगी, जिसने पूरे दिल से इसके लिए मेहनत की होगी।’ अब यह बताने की जरूरत नहीं कि किसने पूरे दिल से मेहनत की है।
