तिरुवनंतपुरम। केरल के तिरुवनंतपुरम स्थित सेंट थॉमस सेंट्रल स्कूल में 12वीं कक्षा के छात्र ने छात्रा को लगे लगाया, तो स्कूल प्रबंधन ने उन्हें निलंबित कर दिया। अब केरल के उच्च न्यायालय ने दोनों छात्रों के निलंबन की सजा को सही ठहराया है।
दरअसल, स्कूल में आर्ट फेस्टिवल खत्म होने के बाद छात्र ने छात्रा को गले लगा लिया। जिसके बाद उन्हें स्कूल से निलंबित कर दिया गया था। हालांकि छात्र का कहना है कि उसने छात्रा को अच्छा गाना गाने की बधाई देने के लिए गले लगाया था। स्कूल द्वारा छात्रों को निलंबित करने के मामले में केरल राज्य आयोन सेंट थॉमस सेंट्रल स्कूल के खिलाफ उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। जिसकी सुनवाई के दौरान
न्यायमूर्ति शाजी पी कैली की बेंच ने बाल अधिकारों के संरक्षण कानून का हवाला देते हुए याचिका को खारिज कर दिया।
केरल उच्च न्यायालय की दलील
12 दिसंबर को सुनाए गए अपने फैसले में न्यायालय ने कहा कि ऐसे मामले में फैसले लेना का अधिकार सिर्फ बाल अधिकार पैनल को ही है। उन्होंने छात्र और छात्रा को स्कूल से निलंबित करने के प्रिंसिपल के फैसले को सही ठहराया। न्यायालय का कहना है कि स्कूल का मुखिया होने के नाते प्रिंसिपल को अनुशासनहीनता के खिलाफ फैसले लेने का अधिकार है। न्यायालय ने कहा कि बाल अधिकार आयोग को इस मामले में दखल देने की जरूरत नहीं है।
जानिए क्या है पूरा मामला
केरल के तिरुवनंतपुरम स्थित सेंट थॉमस सेंट्रल स्कूल में गायन प्रतियोगिता खत्म होने के बाद 12वीं कक्षा के छात्र ने छात्रा को गले लगा लिया था। स्कूल की सीढ़ियों से उतरते वक्त छात्र ने छात्रा को गले लगाकर बेहतर प्रदर्शन के लिए बधाई दी। हालांकि उसी वक्त वहां से गुजर रही टीचर ने दोनों को साथ देख लिया और इसकी शिकायत वाइस प्रिंसिपल से कर दी। बाद में दोनों को वाइस प्रिंसिपल के सामने पेश किया गया और दोनों के गले लगने को अनुशासनहीनता मानते हुए उन्हें एक सप्ताह के लिए स्कूल से निलंबित कर दिया गया। छात्र ने बताया कि उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका दिए बगैर ही आदेश दे दिया गया था। दोनों से लिखित में माफीनामा भी लिया गया. यह मामला इसी साल अगस्त का है।
