उदयपुर| राज्यपाल कल्याण सिंह ने मौजूदा दौर में राजनीति से लेकर सामान्य व्यवहार, भाषा एवं संभाषण में रही गिरावट पर चिंता जताते हुए कहा, आज विश्वविद्यालयों को भावी पीढ़ी को आत्मविश्वास, स्वच्छ, संयम और विनम्र संभाषण कला विकसित करने का पाठ पढ़ाने की जरूरत है।
उन्होंने सुझाव दिया, इसके लिए विश्वविद्यालय अनिवार्य रूप से अतिरिक्त पाठ्यक्रम चलाए। वे शनिवार को सुखाड़िया विश्वविद्यालय के 25वें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कौशल केन्द्र के रूप में विश्वविद्यालयाें को विकसित करने का सुझाव दिया।
समारोह में 57 विद्यार्थियों को गोल्ड मैडल प्रदान किए गए। इनमें 13 छात्र और 45 छात्राएं शामिल थे। सुविवि में भी गोल्ड मैडल पाने में छात्राएं छात्रों से आगे रही हैं। साथ ही 145 विद्यार्थियों को पीएचडी की उपाधि दी गई। इसमें 75 छात्र 70 छात्राएं थी। 6 विद्यार्थियों को चांसलर मैडल दिया गया। इसमें 1 छात्र 5 छात्रा को यह मैडल दिया गया। छह विद्यार्थी पीएचडी की उपाधि लेने नहीं पहुंचे। उच्च शिक्षा मंत्री किरण माहेश्वरी ने उच्च शिक्षा में हो रहे नवाचारों को बताया। इस अवसर पर भगवत गीता के वेब लिंक का लोकार्पण हुआ। कुलपति प्रोफेसर जेपी शर्मा, रजिस्ट्रार एचएस भाटी, प्रोफेसर अनिल कोठारी, डॉ कुंजन आचार्य आदि मौजूद थे।
समारोह में राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के अध्यक्ष बलदेवभाई शर्मा ने कहा कि कुछ स्वनाम विद्वान इतिहासकारों ने भगतसिंह को भी रिवॉल्युशनरी टेररिस्ट लिखा और पढ़ाया। महाराणा प्रताप को भी अकबर के मुकाबले महान पढ़ाया जाता है। उन्होंने कहा कि औपनिवेशिकता ने अनेक लोगों की मानसिकता को जकड़े रखा है। अंग्रेजियत उनकी रग-रग, मस्तिष्क में समाई है। ऐसे बुद्धिजीवियों को भारत को माइग्रेटेड कंट्री बताते भी हिचक नहीं होती। हमें विश्वविद्यालयों में पाठ्यक्रम के साथ-साथ देशभक्ति, समाज सेवा मानवीय मूल्यों को भी पढ़ाना चाहिए।
