अमेरिका –रेसलिंग की दुनिया में डब्ल्यू डब्ल्यू ई को सबसे खतरनाक फाइट माना जाता है लेकिन ऐसा है नहीं, क्योंकि अमेरिका में ऐसी हार्डकोर रेसलिंग भी होती हैं जिसे देखकर किसी के भी रोंगटे खड़े हो सकते हैं। इस तरह की फाइट में रेसलर्स बिना किसी झिझक के एक-दूसरे पर खूंखार तरीके से घातक हथियारों से हमला करते हैं। इस तरह की फाइट्स में रेसलर का घायल होना भी नॉर्मल है।
हार्डकोर रेसलिंग में केवल मेल फाइटर्स ही नहीं लड़ाई करते बल्कि फीमेल फाइटर्स भी हिस्सा लेती हैं। इन फाइट्स के दौरान रेसलर्स अटैक करने के लिए बड़े-बड़े डंडे, कंटीले तारों से बने बैट और टूटे ग्लासेस का इस्तेमाल भी करते हैं। ऐसी फाइट्स को ‘वीकेंड ऑफ डेथ’ कहा जाता है।
इन फाइट्स को लड़ने वाले फाइटर पूरे अमेरिका में ट्रैवल करते हैं, और इस तरह की फाइट्स में हिस्सा लेते हैं। इस तरह की लड़ाई में वे एक-दूसरे पर कंटीले तारों से बने बैट और फैन के बनाए हथियारों से भी हमला करने से नहीं चूकते।
ऐसी फाइट्स में दोनों रेसलर्स की बॉडी से खून निकलना बिल्कुल आम है। वहीं फाइट के बाद रेसलर्स का बड़े-बड़े घावों और टूटी हड्डियों के साथ रिंग में रह जाना भी बिल्कुल नॉर्मल है।
इस खेल के सबसे बड़े सितारों में से एक ‘द बुलडोजर’ यानी मैट ट्रेमोंट का कहना है कि हम इसके लिए कोई खास तैयारी नहीं करते। ये मेरे लिए ऑफिस के किसी दिन की तरह होता है।
मैट पिछले कई सालों से इस तरह की फाइट्स लड़ रहे हैं। वे अपने अपोनेंट रेसलर को हराने के लिए ‘डेथ वैली ड्राइवर’ मूव का इस्तेमाल सबसे ज्यादा करते हैं।
इस मूव का इस्तेमाल करने के लिए वे 20 फुट ऊंची स्टील के स्टैंड से अपोनेंट रेसलर को लेकर जम्प करते हैं और कांच की तीन शीट के ऊपर उसे लेकर गिरते हैं। इस तरह की फाइट्स में रेसलर्स जितनी जल्दी घायल हो जाते हैं, उतनी ही जल्दी वे खुद को अगली फाइट के लिए तैयार भी कर लेते हैं।
मैट खुद भी हफ्ते में एक से तीन बार तक इस तरह की फाइट लड़ते हैं। उनके मुताबिक इस तरह की फाइट लड़ने के लिए रेसलर को खतरनाक दर्द सहना आना जरूरी है।
फोटोग्राफर मार्क मैक्एंड्रू ने पिछले दो सालों के अंदर इस तरह की फाइट्स के फोटोज लिए हैं, जो काफी विचलित करने वाले हैं। मार्क का कहना है कि क्रिकेट फैन्स इस तरह की खूनी फाइट्स देखने के लिए बेहद उत्सुक रहते हैं।
(ऋषभ जोशी)
