2 अप्रैल की हिंसा के बाद तनावग्रस्त वेस्ट यूपी में शनिवार को डॉक्टर आंबेडकर जयंती का आयोजन शांतिपूर्वक संपन्न हुआ। अतिसंवेदनशील जिलों में कड़ी सुरक्षा के बीच सभी कार्यक्रम हुए। मेरठ में हिंसा के केंद्र रहे शोभापुर गांव में दलित युवक की हत्या के शोक के कारण बड़े आयोजन को रद्द कर दिया गया।
डॉक्टर आंबेडकर और हिंसा के शिकार दलित युवक के चित्र पर सिर्फ माल्यार्पण किया गया और साथ बैठकर आपसी विचार-विमर्श किया गया। वेस्ट यूपी में 257 जगह आयोजन हुए, इनमें 124 संवेदनशील थे। सबसे अधिक 60 आयोजन सहारनपुर जिले में हुए। इस दौरान दलितों के उत्पीड़न बंद करने, उन्नाव और कठुआ रेप और हत्याकांड पर केंद्र और प्रदेश सरकार को घेरा गया। अफवाहों को ध्यान में रखकर मेरठ में इंटरनेट सेवा को बंद रखा गया।
2 अप्रैल को हुई हिंसा के केंद्र रहे मेरठ के शोभापुर गांव में शनिवार को शांति रही। इस गांव में पुलिस चौकी फूंक दी गई थी और वाहनों को तोड़ा गया था। कई अफसर और भीड़ में शामिल लोग जख्मी हो गए थे। अगले दिन 3 अप्रैल को एक दलित युवक गोपी पारिया की हत्या कर दी गई थी। दलितों के नामों की हिट लिस्ट ने गांव में तनाव पैदा कर रखा था। गांव से दलित पलायन कर गए थे। धर्म परिवर्तन की चेतावनी दी गई थी। शनिवार को दलितों ने शोभापुर में आंबेडकर जयंती सादगी से मनाई। गांव में निकलने वाली शोभायात्रा और गोष्ठी नहीं की गई।
