कठुआ बलात्कार मामले में गुरुवार को अभियुक्तों पर पठानकोट कोर्ट में आरोप तय किए गए। जिला एवं सत्र न्यायालय ने आठ साल की बच्ची से बलात्कार और हत्या के मामले में लंबी बहस पूरी होने के बाद आठ आरोपियों में से सात के खिलाफ आरोप तय किए। गुरुवार से अब मामले पर लीगल ट्रायल शुरू हो गया है। आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद जम्मू-कश्मीर से पठानकोट में मामले की सुनवाई 31 मई को शुरू हुई थी।
कठुआ कांड के सात कथित मास्टरमाइंड– संजी राम, उसका बेटा विशाल जनगोत्रा, रसाना गांव से विशाल का मित्र, सब-इंस्पेक्टर, हेड कांस्टेबल और दो विशेष पुलिस अधिकारी (एसपीओ) को 31 मई 2018 को पठानकोट में शिफ्ट कर दिया गया था। आठवां आरोपी एक किशोर है और कथुआ में उसके खिलाफ मुकदमा भी में अलग से चलाया जा रहा है।
गौरतलब है कि पीड़ित बच्ची के पिता की याचिका पर ही मुकदमे को पठानकोट में स्थानांतरित कर दिया गया था। सर्वोच्च न्यायालय ने जिला और सत्र न्यायाधीश, पठानकोट को आदेश दिए हैं कि किसी भी स्थगन के बिना रोज़ाना कैमरों की निगरानी में मुकदमा चलाया जाए। आपको बता दें कि आरोपियों के पक्ष में आयोजित हुई एक रैली में हिस्सा लेने के कारण सत्तारूढ़ पीडीपी-बीजेपी गठबंधन के दो वरिष्ठ मंत्रियों को भी इस्तीफा देना पड़ा था।
गौरतलब है की जम्मू कश्मीर के कठुआ जिले में 10 जनवरी को आठ लोगों द्वारा एक 8 साल की बच्ची को मंदिर में बंधक बनाकर उसका रेप किया गया। बाद में उसका गला घोटकर बच्ची की हत्या कर दी गयी थी और पत्थर से सर कुचलकर दिया गया। 12 जनवरी को सामने आया था, जब लड़की के पिता ने हीरानगर थाने में केस दर्ज कराया। इसके मुताबिक, 10 जनवरी को लगभग 12:30 बजे उनकी बेटी जंगल में घोड़े के लिए चारा लेने गई थी, जिसके बाद वह नहीं लौटी।
उनकी शिकायत के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज की। एफआईआर दर्ज होने के कुछ दिन बाद जब कठुआ के रासना गांव के पास खोजबीन हुई तो 17 जनवरी को बच्ची का शव पास के इलाके से मिला था। 9 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर पुलिस ने बच्ची से बलात्कार और हत्या के मामले में आठ आरोपियों के खिलाफ 18 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की।
