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देवास

मस्तिष्क संचालन के लिए पत्रकारिता ,सूचना तंत्र की आवश्यकता है

राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर विशेष लेख

16 नवंबर को राष्ट्रीय प्रेस दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। भारतवर्ष में युगो युगो से लेखन कला और मध्यस्थ लेखन कला का विस्तार और विकास हुआ है। लेखन कला में साहित्य काव्य ग्रंथ धर्म ग्रंथ शामिल है मध्यस्थ लेखन कला में सुर वीरों की गाथा राजाओं का महिमामंडित ओजस्वी लेखन और इतिहास शामिल है। वास्तव में यह उस समय की पत्रकारिता का स्वर्णिम दौर था। संदेशवाहक भी दूध के माध्यम से पत्र लेखन से ही अच्छे या सख्त संदेश पहुंचाते थे। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की जगह हर बोलो ने ली थी। वह स्थान स्थान पर जाकर राजाओं के गुणगान प्रजा तक पहुंचाते थे। समय बदला परिदृश्य बदला। पत्रकारिता के मायने बदले अब यह कार्य समाज को आईना दिखाने के रूप में होने लगा है। देश दुनिया के साथ समाज में क्या घटित हो रहा है उस वृतांत से अवगत कराने का काम प्रेस से जुड़े पत्रकार साथी करते हैं। और यह बात सही है जिस तरह शरीर संचालन के लिए ऑक्सीजन और भोजन की आवश्यकता है उसी प्रकार मस्तिष्क संचालन के लिए पत्रकारिता यह सूचना तंत्र की आवश्यकता है। जिन लोगों तक समाज देश दुनिया की खबर नहीं पहुंच पाती वह मानसिक विक्षिप्त हो जाते हैं। जीने हम पूर्ण वासी नहीं कह सकते हैं । प्रजातंत्र में कुछ महत्वपूर्ण कार्य ऐसे हैं जिन्हें हरबोले कहें या वर्तमान के पत्रकार उन लोगों की वजह से ही फर्श से अर्श पर लाने का कार्य किया गया है। दूषित पत्रकारिता यह हो गई है कि छोटी से छोटी बात को बढ़ा चढ़ा कर लिखने से कुछ ही देर में समाज का देश का नगर का माहौल खराब होने में देर नहीं लगती। नकारात्मक लिखना है यह सकारात्मक आजकल के पेशेवर पत्रकार पहले से ही तय कर लेते हैं। जबकि वास्तविक पत्रकारिता धरातल पर पहुंचकर वस्तु स्थिति अवगत करते हुए अपनी कलम को चलाने की कला है। यह बात सही है वस्तु स्थिति अवगत कराने वाले पत्रकार हमेशा डेंजर जोन में रहते हैं खतरा उनके सिर पर मंडराता है। शासन प्रशासन भले ही कितनी भी नीति बना ले पत्रकारों की समुचित सुरक्षा नहीं कर पाएगा। शासन-प्रशासन समझता है । पत्रकार उचित काम कर गया तो गण है। और अपनी पर आ गया तो भस्मासुर भी बन सकता है। आज राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर सभी सरस्वती पुत्रों को आत्म सम्मान के साथ स्वयं रक्षित रहने की मनोकामना। वह किसी को भरोसे में ना रखें और किसी के भरोसे ना रहे कलम है उचित देखेगी उचित चलेगी भ्रष्टाचार की स्याही से चली कलम अधिक दूर तक नहीं चलेगी। इसलिए अलग जगह या मशाल जला है पर समाज में अंधेरों को हटाकर बेहतर उजाला लाएं। यही शुभकामना💐

सुनील योगी प्रेस क्लब आफ वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन प्रदेश सचिव

उर्स सलामी बुरहानी मेहमूदी में जुटेंगे देशभर के हजारों ज़ायरीन

मध्यप्रदेश में नही थम रही पत्रकारों पर हमले की घटना।धार में पत्रकार सहित उसके परिवार पर किया सट्टा कारोबारियों ने हमला भोपाल।