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नवरात्रि में ईद के चांद का दीदार, भाईचारा का दिव्य संचार (चैत्र नवरात्रि व ईद-उल-फ़ितर पर विशेष लेख)

नवरात्रि में ईद के चांद का दीदार, भाईचारा का दिव्य संचार

(चैत्र नवरात्रि व ईद-उल-फ़ितर पर विशेष लेख)

 

भारत के वर्तमान परिदृश्य में आज भी ऐसे क़लमकार देश में मौजूद है, जो अपनी बेबाक क़लम से देश की सभ्यता संस्कृति,एकता,भाईचारा, सामाजिक समरसता के ताने बाने को मज़बूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहे हैं। कलम के इन सिपाहियों में एक नाम श्रीमती शशि दीप मुंबई का भी है। नवरात्रि और ईद के पावन अवसर पर उन्होंने इस लेख के माध्यम से अपनी भावना को अभिव्यक्त किया है। यह लेख स्वागत योग्य है। अपने पाठकों के लिए सादर प्रस्तुत है। राष्ट्रीय एकता की भावना से ओत प्रोत ऐसे लेखकों को और उनके लेख को प्रोत्साहित किया जाना आवश्यक प्रतीत होता है:_

मुंबई। कल यानी 9 अप्रैल को हिंदुओं के सबसे प्रमुख त्यौहारों में से एक चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ हुआ जो आदि शक्ति दुर्गा माँ के नौ स्वरूपों की आराधना का उत्सव है और सर्वविदित है कि यह साल में दो बार धूमधाम से मनाया जाता है। सनातन धार्मिक मान्यता और आस्था यह है कि नवरात्रि पर देवी दुर्गा पृथ्वी लोक पर आती हैं और अपने सभी भक्तों की हर एक मनोकामना को पूर्ण करती हैं।चैत्र नवरात्रि के आठवें दिन अष्टमी और नौवें दिन रामनवमी मनाई जाती है। हिंदू धर्मशास्त्रों के अनुसार इस दिन ही सृष्टि के पालनकर्ता भगवान विष्णु ने धरती लोक पर मर्यादा पुरुषोत्तम माने जाने वाले श्री राम के रूप में जन्म लिया था। राम लला के जन्म की पावन बेला को ही राम नवमी के त्योहार के रूप में मनाया जाता है। इस प्रकार पूरे नौ दिन के इस उत्सव में भक्ति, समर्पण व त्याग के साथ सार्वभौमिक देवी मां के तीन रूपों दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती को पूजा जाता है, जो मानव जाति में क्रमशः तीन गुणों के प्रतीक हैं-तमोगुण, रजोगुण और सतोगुण के प्रतीक हैं। जीवन में शांति, सफलता, सुख-सुविधाएं और प्रसन्नता के लिए इन तीन गुणों को संतुलन में रखने के ध्येय से यह त्यौहार मनाया जाता है, इसीलिए कई भक्त पूरे नौ दिन व्रत भी रखते हैं। और आत्म शुद्धि और अध्यात्मिक विकास के लिए साधनालीन होते हैं। फिर जब नार्मल दिनचर्या में आते हैं तो स्वयं में बहुत से बदलाव व सृजनात्मकता का प्रस्फुरण जीवन में आने लगता है। उत्सव के दरम्यान भारतीय संस्कृति और परंपरा अनुसार सभी एक दूसरे से मिलते हैं बधाईयां देते हैं और सामाजिक सौहार्दपूर्ण वातावरण दिखाई देता है।

उसी प्रकार संयोग की बात है कि इस वर्ष देश के दूसरे सबसे प्रमुख धर्म इस्लाम के अनुयायियों यानी मुस्लिम समुदाय का प्रमुख व पवित्र त्यौहार ईद-उल-फ़ितर (ईद) भी नवरात्रि के तीसरे दिन पड़ रहा है। जो कि भारत सहित पूरे विश्व में अत्यंत हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है और क्यों न मनाया जाए। मुस्लिम समाज जनों द्वारा 30 दिनों के त्याग, तपस्या व इबादत से लबरेज़ पाक रमज़ान महीने के बाद आता है जिसमें पूरे महीने सभी मुस्लिम निर्जल उपवास यानि रोज़ा रखते हैं। रमज़ान की शुरुआत इस वर्ष हमारे भारत देश में 11 मार्च को चांद के दीदार के साथ हुई थी जिसमें संपूर्ण विश्व के इस्लाम अनुयायियों ने इस्लाम धर्म के 4 थे बुनियादी सिद्धांत के अनुसार पारंपरिक ज़कात अदा किया जो केवल पात्र गरीबों, बेवाओं व यतीमों को दी जाती है। रमज़ान के इन तीस दिनों तक देश में इफ़तार पार्टी का आयोजन भी किया गया, जो देश की गंगा-जमुनी तहज़ीब और सामाजिक समरसता के साथ अन्य भारतीय समाज को एक दूसरे के करीब लाने का एक अच्छा माध्यम भी है। इस वर्ष 10 अप्रैल 2024 को चांद के दीदार के बाद आज 11 अप्रैल 2024 गुरुवार को ईद-उल-फ़ितर का पर्व मनाया जा रहा है। इस त्यौहार में भी मुस्लिम समुदाय के लोग खुदा के हुज़ूर में विश्व समुदाय की सलामती, अम्नो अमान, भाई चारा और खुशहाली की दुआएं करते हैं। दिलचस्प बात यह है कि रमज़ान के मौके पर अलग-अलग धर्म एवं समुदायों के लोग रोज़ादारों के लिए इफ्तार पार्टी का आयोजन करते हैं। बिहार, रांची, लखनऊ, मेरठ, दिल्ली, मुरादाबाद, वाराणसी और सिकंदराबाद समेत देश के कई शहर इफ्तार पार्टियों के लिए बेहद प्रसिद्ध हैं। इस प्रकार ये दोनों प्रमुख त्यौहारों का इस वर्ष एक साथ आना यह संकेत देता है कि सर्वधर्म समभाव धारण करते हुए हमारी राष्ट्रीय एकता को मज़बूत करने का यह सुनहरा अवसर है। भारत में ये दोनों ही त्यौहार शरीर की शुद्धि, मन की शुद्धि और बुद्धी की शुद्धि के साथ सत्व शुद्धि के लिए बिल्कुल सही वक्त पर दस्तक दिए हैं जब देश की जागरूक आवाम मिलकर विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश में भारत पर के अंतर्गत लोकसभा आम निर्वाचन 2024 में देश का मुखिया चुनने जा रहे हैं। इसलिए तमाम दुर्भावनाओं को त्याग इन विशेष त्योहारों में निहित भावनाओं को आत्मसात कर हमें एक होना है। विश्व शांति के लिए दुआ करना है।यह अवसर हमें दोबारा नहीं मिलेगा।

तेरा धर्म, मेरा धर्म का भाव त्याग कर, निजी स्वार्थ से ऊपर उठकर राष्ट्रहित सर्वोपरि समझना होगा। और सबको मिलकर आगामी लोकसभा आम चुनाव 2024 जो कि लोकतंत्र का सबसे बड़ा उत्सव है, में हिस्सा लेकर सोच समझकर, पूर्ण जागरूकता के साथ हमें अपना वोट देना है। अपने दिलो-दिमाग की बैटरी को राष्ट्रहित में रिचार्ज कर हमें एक अच्छे राष्ट्र के निर्माण में अपना योगदान देना है। ताकि हमारा देश भारत विश्व गुरु बन सके।

 

शशि दीप ©✍

विचारक/ द्विभाषी लेखिका मुंबई

shashidip2001@gmail.com

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