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हिन्दी पत्रकारिता दिवस के उपलक्ष्य में संपन्न हुई प्रेस क्लब ऑफ़ वर्किंग जर्नलिस्ट्स के तत्वावधान में राष्ट्रीय परिचर्चा

हैंड कम्पोजिंग से लेकर अब इंटरनेट तक पत्रकारिता का सफर क्रमिक विकास का साक्षी रहा: केशव शुक्ला

 

हिन्दी पत्रकारिता दिवस के उपलक्ष्य में संपन्न हुई प्रेस क्लब ऑफ़ वर्किंग जर्नलिस्ट्स के तत्वावधान में राष्ट्रीय परिचर्चा

 

मुंबई। रविवार 4 जून 2023 को हिन्दी पत्रकारिता दिवस के उपलक्ष्य में पत्रकार सुरक्षा एवं कल्याण के लिए प्रतिबद्ध अखिल भारतीय संगठन "प्रेस क्लब ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स" के तत्वावधान में एक ऑनलाइन राष्ट्रीय परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण परिचर्चा की अध्यक्षता संगठन के संस्थापक अध्यक्ष श्री सैयद खालिद कैस जी ने की। बिलासपुर छत्तीसगढ़ के जाने-माने वरिष्ठ पत्रकार केशव शुक्ला के मुख्य आतिथ्य तथा मुंबई के वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र माने के विशिष्ट आतिथ्य में संपन्न इस राष्ट्रीय परिचर्चा का संयोजन संचालन (गूगल मीट पटल के माध्यम से) संगठन की राष्ट्रीय संगठन महासचिव शशि दीप मुंबई द्वारा किया गया। 

 

 "डिजिटल भारत निर्माण में हिन्दी पत्रकारिता का महत्व" विषय पर आधारित इस राष्ट्रीय परिचर्चा में देश भर के लगभग 12 राज्यों से आमंत्रित पत्रकारों ने शिरकत की जिन्होंने लोकतन्त्र का चौथा स्तंभ कहे जाने वाली पत्रकारिता की वर्तमान स्थिति पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कैसे पत्रकारिता वर्तमान में कठिन दौर व अत्यधिक प्रतिस्पर्धा से गुजर रहा है। इस मंच के माध्यम से पत्रकारों की कई पीड़ा, परेशानियां सामने आई जिन पर क्रियान्वयन से पत्रकारों को निष्ठापूर्वक कार्य करने में आसानी होगी। विभिन्न क्षेत्रों से पधारे इन सम्मानीय वक्ताओं ने अपनी गरिमामय उपस्थिति से इस कार्यक्रम को शानदार बना दिया।सभी वक्ताओं ने अपने विचारों के माध्यम से इस बात पर बल दिया कि डिजिटल मीडिया में गुणों के साथ-साथ दोष भी है जो पत्रकारिता के महत्व को कहीं कम तो कहीं ज्यादा हानि पहुंचा रहे हैं। पत्रकारिता के गिरते स्तर पर भी इस अवसर पर चिंता व्यक्त की गई। वक्ताओं ने प्रिंट मीडिया और डिजिटल मीडिया के बीच के अंतर पर प्रकाश डालते हुए उसके महत्व को बताया।

इस अवसर पर संगठन के संस्थापक अध्यक्ष श्री सैयद खालिद कैस ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि "वर्तमान परिदृश्य में राजनीति के अंदर पत्रकारिता का लगातार दोहन हो रहा है उस सबके बावजूद हमारे क्रांतिकारी पत्रकार जो प्रिंट मीडिया के ज़माने में संघर्ष करते थे आज इन्टरनेट एंड्रॉयड मोबाइल का इस्तेमाल कर देश के कोने-कोने तक ख़बरें पहुंचा रहे हैं। डिजीटल मीडिया का हमारे जीवन में बढ़ता प्रभाव सकारात्मकता का प्रतीक है। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि डिजिटल मीडिया हमारे जीवन का एक हिस्सा है।" वर्तमान समय में डिजिटल मीडिया के माध्यम से हिंदी पत्रकारिता के बढ़ते प्रभाव का ही परिणाम है कि भारत में हिंदी का महत्व बढ़ा है।

 

मुख्य अतिथि दैनिक भास्कर व दैनिक हरिभूमि के पूर्व उपसम्पादक केशव शुक्ला जी ने अपने उद्बोधन में पत्रकारिता में हेंड कंपोजिंग व अन्य प्राचीन तरीक़ों का जिक्र करते हुए इन्टरनेट युग की सहूलियत व पहले की बाधाओं से अवगत कराया। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि दैनिक मुंबई संध्या के सम्पादक श्री राजेंद्र माने जी ने कहा प्रिंट मीडिया में जो ताकत है वो और किसी में नहीं, मुझे नहीं लगता इन्टरनेट के ज़माने में पत्रकारिता बह रही है। 

 

इस राष्ट्रीय परिचर्चा में वरिष्ठ साहित्यकार/पत्रकार डॉ. प्रीति प्रसाद( बिलासपुर), पत्रकार तथा लेखिका वीणा आडवाणी,( नागपुर )आशीष बंग सम्पादक, महाकाल एक्सप्रेस( नीमच म.प्र.), श्री शुभोधुती कुमार मंडल, एडिटर वर्ल्ड मीडिया न्यूज़, फ्यूचर टी.वी. (रूद्रपुर, उत्तराखंड), वरिष्ठ पत्रकार सुनील योगी सम्पादक बागली टाइम्स (देवास म. प्र.), रियाज खान स्वामी सम्पादक सैनानी पोस्ट समाचार पत्र( चित्तौड़गढ़ राजस्थान,) बिल्लू यादव सम्पादक कालांवाली संदेश मासिक, (सिरसा हरियाणा) सहित अन्य ने अपने प्रभावशाली विचारों से अवगत कराया। इस विशेष परिचर्चा की नेक पहल के लिये अभ्यागतों व समस्त उपस्थित विभूतियों ने प्रेस क्लब ऑफ़ वर्किंग जर्नलिस्ट्स की राष्ट्रीय संगठन महासचिव तथा कार्यक्रम की संयोजिका शशि दीप की भूरि-भूरि प्रशंसा की व हृदयी आशीर्वाद से अनुगृहित किया।

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