नई दिल्ली -भारतीय रेलवे पर इन दिनों दो बड़ी परियोजनाएं चल रहीं हैं। इस परियोजनाओं से रेलवे का चेहरा तो बदलेगा ही, साथ ही विकास को भी एक चेहरा मिलेगा। इनमें से एक है हाई स्पीड रेल कॉरिडोर (बुलेट ट्रेन) और दूसरी परियोजना है डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी)। पहली परियोजना के तमाम हानि-लाभ गिनाए जा रहे हैं, लेकिन दूसरी परियोजना यानी डीएफसी के केवल लाभ ही लाभ हैं।
एक जमाना था, जब जेएनपीटी पोर्ट से 30 प्रतिशत माल रेलवे द्वारा ढोया जाता था। वक्त के साथ भारतीय रेलवे में माल से होने वाली कमाई में गिरावट आई। आज जेएनपीटी की क्षमता दोगुनी होने के बावजूद रेलवे द्वारा केवल 14 फीसदी माल ही उठाया जा रहा है। बाकी 86 फीसदी माल रोड ट्रांसपोर्ट के जरिए पहुंचाया जाता है, लेकिन कुछ सालों में तस्वीर पूरी तरह से बदलने वाली है। भारतीय रेलवे का डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर देश में माल वहन का चेहरा बदल देगा। इस कॉरिडोर पर जब 100 किमी प्रतिघंटा की गति से 1.5 किमी डबल डेकर मालगाड़ी सन्नाटे से दौड़ेगी, तब लगेगा विकास हो रहा है।
