इंदौर.हाई कोर्ट में जजों की कमी के चलते ऐसे मामलों की भी सुनवाई नहीं हो पा रही, जिसमें अपील करने वाला सालों से जेल में बंद है। कई बार निचली अदालत से मिली सजा के खिलाफ की गई अपील जब तक हाई कोर्ट में सुनवाई के लिए आती है, तब तक अपील करने वाला पूरी सजा काट कर जेल से रिहा हो जाता है। इंदौर हाई कोर्ट में ही वर्ष 2018 में 50 से अधिक ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें आरोपी ने निचली अदालत से मिली सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की थी।
हाई कोर्ट में फैसले के बजाय तारीखें लगती रहीं और आरोपी पूरी सजा काट कर रिहा हो गया। हाई कोर्ट में जिन अपीलों का निराकरण 2018 में हुआ है, उनमें सबसे पुराना मामला 2004 में निचली अदालत द्वारा सुनाई सजा का है। इसमें भी अपील करने वाला आरोपी 10 साल का कारावास पूरा कर 2008 में ही रिहा हो चुका था। 20 से अधिक क्रिमिनल अपील 10 साल से ज्यादा पुरानी थीं। जाहिर है, आरोपियों के पूरी सजा काटने के बाद रिहा हो जाने से इन अपीलों पर सुनवाई का कोई मतलब नहीं रह गया, इसलिए हाई कोर्ट ने अंतिम फैसला सुनाकर इन्हें डिस्पोज ऑफ कर दिया।
जबलपुर में सबसे ज्यादा, इंदौर में 66 हजार मुकदमे लंबित
मध्य प्रदेश में हाई कोर्ट की तीन बेंच जबलपुर, ग्वालियर और इंदौर में हैं। इन तीनों बेंच में लगभग तीन लाख 20 हजार मुकदमे लंबित हैं। सबसे ज्यादा मुकदमे जबलपुर मुख्य पीठ में लंबित हैं। हाई कोर्ट इंदौर में भी जजों की कमी के चलते लंबित मुकदमों की संख्या 66 हजार 500 तक पहुंच गई है।
भोपाल में हाई कोर्ट बैंच आजाने से हो सकता हैै भार कम
राजस्व अधिवक्ता कल्याण परिषद ने कहा कि राजधानी भोपाल में बरसों पुरानी मॉंग अनुसार यदि हाईकोर्ट बैंच स्थापितकीजातीहै तो संभवत जबलपुर मुख्य बैंच पर पड रहा केसों का भार बहुत हद तक कम हो सकता है ।
