भोपाल– 16 मार्च 2018 को भारत सरकार ने श्रम कानून बदलने की श्रंखला मे एक आदेश भारत के राजपत्र मे प्रकाशित किया उसके अनुसार अब किसी भी संस्थान में स्थाई कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं होगी सरकार ओर निजी संस्थानों में नियोक्ता ओ द्वारा कर्मचारियों को अवधि के अनुसार दिन माह एवं वर्ष के आधार पर नियोजित किया जा सकेगा ऐसी परिस्थिति में कर्मचारियों को सेवा निवृत्ति जेसी कोई सुविधा नहीं मिलेगी ना ही कर्मचारियो को पेंशन या फंड या ग्रेच्युटी का लाभ मिलेगा
प्राप्त जानकारी के अनुसार केंद्रीय नियम 1946 के अनुसार पहले लंबी अवधि तक कार्य करने वाले मजदूर , कर्मचारियो को तीन माह का नोटिस देकर या तीन माह का वेतन देकर नौकरी से निकालने का प्रावधान था।
औधोगिक विवाद अधिनियम 1947 के पेरा 14 के अनुसार पूर्व से ये व्यवस्था लागू थी जिसे मोदी सरकार द्वारा समाप्त कर दिया गया है अब कोई भी नियोक्ता किसी भी कर्मचारि को कभी भी बाहर कर सकता है इस से मजदूरों ओर कर्मचारियों को सुरक्षित भविष्य की गारंटी नहीं मिलेगी ओर उनका शोषण होगा ऑल इंडिया ह्यूमन राइट्स एंड सोशल जस्टिस कौंसिल की राष्ट्रीय महासचिव सरोज जोशी ने शासन के इस कदम की तीखी आलोचना की।
