जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने कलेक्टर हरदा अनय द्विवेदी का आवेदन स्वीकार करते हुए बिना शर्त माफी दे दी। मामला सिविल कोर्ट में आपत्तिजनक जवाब पेश किए जाने के रवैए से संबंधित था।
इस जवाब को कोर्ट की गरिमा के विपरीत पाते हुए सीजेएम और डीजे के माध्यम से हाईकोर्ट में शिकायत भेज दी। हाईकोर्ट ने रिफरेंस को गंभीरता से लेते हुए क्रिमनल कंटेम्प्ट केस बतौर सुनवाई शुरू कर दी। साथ ही कलेक्टर हरदा द्विवेदी को नोटिस जारी किए थे।
कलेक्टर ने सिविल कोर्ट के समक्ष पेश किए गए अपने जवाब में लिखा था कि सिविल कोर्ट का आदेश अपनी जगह है, लेकिन इस तरह न्यायालय जिला दंडाधिकारी के समक्ष मचकुरी का चले आना और वसूली के लिए कलेक्ट्रेट की सामग्रियां जप्त करने की बात कहना, अपमानजनक है।
चूंकि कलेक्टर के जवाब में नाराजगी का पुट था, अत: अदालत ने इसे अपनी गरिमा के खिलाफ माना। दरअसल, सिविल कोर्ट ने कलेक्ट्रेट के खिलाफ एक मामले में डिक्री आदेश पारित किया था, जिसके पालन में मचकुरी कलेक्ट्रेट कोर्ट में पहुंचा और दो-टूक कह दिया कि यदि आदेश का पालन नहीं किया गया तो कलेक्ट्रेट की सामग्रियां जप्त कर ली जाएंगी।
इससे नाराज होकर कलेक्टर ने सिविल कोर्ट में नाराजगी भरा जवाब पेश करने की गलती कर दी। सोमवार को कलेक्टर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रविनंदन सिंह व मनोज शर्मा ने पक्ष रखा। उन्होंने लिखित माफीनामा पर बल देते हुए माफ किए जाने की मांग की, जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया। हालांकि यह निर्देश अवश्य दिया गया कि कलेक्टर ने सिविल कोर्ट में जो जवाब पेश किया था, उसे वापस लेकर गलती का सुधार कर लें।
