अविभाजित म.प्र. की राजनीति में ब्राम्हणों का वर्चस्व हुआ करता था पर आज की राजनीति उनकी संख्या और रसूख में निश्चित ही कमी आई है। छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल मंत्रिमंडल में एकमात्र ब्राम्हण मंत्री रविन्द्र चौबे को शामिल किया गया है। वरिष्ठ ब्राम्हण विधायक सत्यनारायण शर्मा, अमितेष शुक्ला अरूण वोरा कुछ नाराज हैं तो 15 साल की भाजपा में दिग्गज मंत्री रहे अमर अग्रवाल और राजेश मूणत को पराजित करने वाले शैलेश पांडे तथा विकास उपाध्याय भी खुश नहीं है। उन्हें मंत्री बनने की उम्मीद थी।
खैर इतिहास पर गौर करे तो कभी राजनीति में ब्राम्हणों का वर्चस्व था। नया मध्यप्रदेश एक नवंबर 1956 में बना तथा उसके बाद 1990 तक 5 ब्राम्हण मुख्यमंत्रियों ने लगभग 20 साल तक सत्ता की बागडोर सम्हाली थी। हालांकि एक नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बाद कोई भी ब्राम्हण मुख्यमंत्री तो नहीं बना पर जोगी मंत्रिमंडल में जरूर ब्राम्हणों का अच्छा प्रतिनिधित्व मिला। उनके मंत्रिमंडल में रविन्द्र चौबे, सत्यनारायण शर्मा, अमितेष शुक्ला तथा विधान मिश्रा शामिल रहे तो राजेन्द्र प्रसाद शुक्ल विधानसभा के अध्यक्ष भी रहे।
1956 में सीपी एण्ड बरार से पृथक होकर नया मध्यप्रदेश बना तो पं. रविशंकर शुक्ल पहले मुख्यमंत्री बने वे छत्तीसगढ़ से ही थे। वहीं अविभाजित म.प्र. में आखरी ब्राम्हण मुख्यमंत्री 1990 में पं. श्यामाचरण शुक्ल रहे। इस बीच द्वारिका प्रसाद मिश्र, मोतीलाल वोरा कांग्रेस की तरफ से मुख्यमंत्री रहे तो 1977 में गैर कांग्रेसी सरकार में ब्राम्हण समाज के कैलाश जोशी ने भी मुख्यमंत्री पद सम्हाला था। अविभाजित म.प्र. के समय 1957 से 1967 तक कांग्रेस के आधे से अधिक विधायक उच्चजाति के होते थे लगभग 25 फीसदी ब्राम्हण होते थे। श्यामाचरण शुक्ल 1969 में जब मुख्यमंत्री बने तो 40 मंत्रियों में 23 ब्राम्हण थे। मोतीलाल वोरा ने भी मुख्यमंत्री बनने पर सुरेश पचौरी आदि ब्राम्हण नेताओं को बढ़ाया था। अर्जुन सिंह ने भी ब्राम्हणों को तरजीह दी। 1980 में जब अर्जुन सिंह मुख्यमंत्री बने तो 320 विधायकों में 50 ब्राम्हण थे। वैसे अविभाजित म.प्र. से छत्तीसगढ़ गठन तक मंत्रिमंडल में ब्राम्हणों का अच्छा प्रतिनिधित्व रहा। मथुरा प्रसाद दुबे, रामेश्वर शर्मा, रामगोपाल तिवारी, राजेन्द्र प्रसाद शुक्ला, किशोरीलाल शुक्ला, मनहरण लाल पांडे, श्रीधर मिश्र, कन्हैया लाल शर्मा, रविन्द्र चौबे, पवन दीवान, सत्यनारायण शर्मा, अमितेष शुक्ला, प्रेम प्रकाश पांडे, विधान मिश्रा आदि मंत्री बनते रहे। भाजपा की छग में 15 सालों की सरकार में प्रेमप्रकाश पांडे मंत्री रहे विधानसभा अध्यक्ष रहे तो बद्रीधर दीवान को विस उपाध्यक्ष भी बनाया गया।
छत्तीसगढ़ की वर्तमान विधानसभा में जोगी कांग्रेस के प्रमोद शर्मा (बलौदाबाजार) भाजपा से शिवरतन शर्मा (भाटापारा), कांग्रेस से शैलेश पांडे ( बिलासपुर) कांग्रेस से अनिता शर्मा (धरसींवा), कांगे्रस से अरूण वोरा (दुर्ग) कांग्रेस से सत्यनारायण शर्मा (रायपुर ग्रामीण), कांग्रेस से विकास उपाध्याय (रायपुर पश्चिम) कांग्रेस के अमितेष शुक्ल (राजिम), कांग्रेस के रविन्द्र चौबे (साजा) विजयी हुई है। वैसे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अपनी संवैधानिक मजबूरी है। उन्हें कुल 13 मंत्री (मुख्यमंत्री सहित) बनाने की बाध्यता है। 12 मंत्री शपथ ले भी चुके हैं। इधर विधानसभा अध्यक्ष-उपाध्यक्ष का चुनाव 4 जनवरी को होना है। अध्यक्ष के लिए तो डॉ. चरणदास महंत का नाम लगभग तय है वहीं उपाध्यक्ष के लिए रामपुकार सिंह, अरूण वोरा आदि के नाम चर्चा में है। वैसे कांग्रेस के वरिष्ठतम विधायक रामपुकार सिंह, सत्यनारायण शर्मा, खेलसाय सिंह, धनेन्द्र साहू के मंत्रिमंडल में शामिल होने की चर्चा थी पर आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर जातिगत समीकरण के चलते मंत्रिमंडल का गठन हुआ। कांग्रेस का हाई कमान का भी मंत्रिमंडल गठन में दखल रहा। वैसे अपने मंत्रिमंडल में किसे शामिल करें यह मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार होता है।
मंत्री और रायपुर शहर
भारतीय जनता पार्टी के 15 सालों के शासन में रायपुर शहर से दो कद्दावर मंत्री बृजमोहन अग्रवाल तथा राजेश मूणत हमेशा मंत्री रहे हैं पर भूपेश बघेल मंत्रिमंडल में राजधानी रायपुर से विजयी सत्यनारायण शर्मा, कुलदीप जुनेजा तथा विकास उपाध्याय को मंत्रिमंडल में स्थान नहीं मिल सका है। सत्यनारायण शर्मा जातिगत समीकरण के चलते शामिल नहीं हो सके तो कुलदीप जुनेजा तथा विकास उपाध्याय भी समीकरण में उलझ गये यह ठीक है कि भूपेश बघेल मंत्रिमंडल में शामिल तीन मंत्री मो. अकबर, शिव डहरिया तथा रूद्रकुमार गुरु भले ही क्रमश: कवर्धा, आरंग तथा अहिवारा से विजयी हुए हैं पर तीनों का स्थायी निवास रायपुर शहर ही है यह बात कम से कम रायपुरवासियों के लिए संतोष की बात हो सकती है। मो. अकबर अल्पसंख्यक चेहरा है वे दुर्गा कालेज छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष भी रह चुके हैं तो डॉ. शिव डहरिया ने स्थानीय रायपुर आयुर्वेदिक कालेज से शिक्षा प्राप्त की है। जहां तक रूद्र कुमार गुरु की बात है तो वे सतनामी समाज के गुरु गद्दीनशीन तथा पूर्व मंत्री विजयकुमार गुरु के पुत्र हैं तथा गुरु घासीदास के वंशज है। इनकी पढ़ाई भी रायपुर में ही हुई है।
पति पूर्व पुलिस अफसर पत्नी मंत्री
भूपेश मंत्रिमंडल में शामिल एक मात्र महिला मंत्री अनिला रविन्द्र भेडिय़ा दूसरी बार बालौद जिले के डौंडी लोहारा से विधायक निर्वाचित हुई है। आदिवासी समाज का नेतृत्व करने वाली अनिला भेडिय़ा ने समाज शास्त्र से एम.ए. की डिग्री ली है। भेडिय़ा परिवार की राजनीतिक विरासत सम्हालने वाली अनिला के चाचा ससुर झुमुकलाल भेडिय़ा अविभाजित म.प्र. के समय कांग्रेस की राजनीति में बड़ा चेहरा थे। कई विभागों में मंत्री होने के साथ ही वे राज्यसभा सदस्य भी रहे। वहीं अनिला के जेठ डोमेन्द्र भेडिय़ा भी विधायक रहे तथा सहकारिता का एक चेहरा रहे हैं। अनिला भेडिया के पति रविन्द्र भेडिय़ा ने डीएसपी के रूप में पुलिस की नौकरी शुरु की और आईजी के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। अनिला तथा रविन्द्र भेडिय़ा दम्पत्ति के विषय में एक बात तो तय है कि दोनों मिलनसार हैं साथ ही आसानी से सुलभ भी हो जाते हैं। रायपुर कोतवाली में कभी नगरपुलिस अधीक्षक के पद पर पदस्थ रहे रविन्द्र भेडिय़ा को भाजपा के 15 सालों के शासनकाल में राजनीतिक कारणोंवश वह जिम्मेदारी नहीं दी गई जिसके वे वास्तविक हकदार थे वे भी अपनी राजनीति पारी शुरू कर सकते हैं।
मंत्रियों को काम का बंटवारा
छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल ने अपने मंत्रियों को काम का बंटवारा कर दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के पास रहने वाले वित्त, ऊर्जा, जनसंपर्क आदि को भूपेश ने अपने पास रखा है। हालांकि वित्त टी.एस. बाबा चाह रहे थे पर उन्हें पंचायत, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा जैसा बड़ा विभाग दे दिया है तो मुख्यमंत्री पद के तीसरे दावेदार रहे ताम्रध्वज साहू को गृह, जेल, पीडब्ल्युडी, पर्यटन की बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। मो. अकबर को वन, आवास एवं पर्यावरण, खाद्य तथा परिवहन का जिम्मा सौंपा गया है। इंजीनियर उमेश पटेल पर उच्चशिक्षा, तकनीकी शिक्षा, खेल तो जयसिंह अग्रवाल को राजस्व विभाग सौंपा गया है। सबसे वरिष्ठ विधायक तथा मंत्री रविन्द्र चौबे को संसदीय कार्य, कृषि, विधिविधायी, जल संसाधन, पशुपालन जैसे बड़े विभाग का मंत्री बनाया गया है। श्रीमती अनिला भेडिय़ा को महिला एवं बाल विकास, समाज कल्याण, शिव डहरिया को नगरीय प्रशासन, श्रम, गुरु रूद्र कुमार को पी.एच.ई. एवं ग्रामोद्योग, वरिष्ठ विधायक तथा मंत्री प्रेमसाय सिंह को स्कूल शिक्षा, सहकारिता, अजा,जजा तथा पिछड़ा वर्ग कल्याण का जिम्मा दिया गया है। वैसे छत्तीसगढ़ मंत्रिमंडल में शामिल कवासी लखमा को उद्योग तथा आबकारी मंत्री बनाया गया है यह जरूर थोड़ा चर्चा में है। लिखना-पढऩा नहीं जानने वाले कवासी लखमा बाहरी उद्योगपतियों को प्रदेश में उद्योग लगाने कैसे समझा पाएंगे यह देखना है हां आबकारी विभाग से जरूर उनका पुराना नाता रहा है। वैसे अब चर्चा है कि मंत्रिमंडल को विभाग आबंटन के बाद प्रमुख सचिव/सचिव स्तर पर फेरबदल की भी संभावना है। सूत्र कहते हैं कि पहले विधानसभा सत्र के बाद ही एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल हो सकता है।
पहली बार महिला पुलिस कप्तान
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आजादी के बाद से आज तक किसी भी महिला पुलिस अफसर को पुलिस कप्तान नहीं बनाया गया है। पर छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद आईपीएस नीतू कमल को रायपुर जिले की कप्तानी सौंपी गई है। पहली महिला पुलिस कप्तान होने का रिकार्ड नीतू के नाम से दर्ज होना तय है। वैसे केरल 2008 बैच की नीतू कमल पहले बेमेतरा, मुंगेली तथा जांजगीर जिले में पुलिस कप्तानी कर चुकी हैं। अपनी मुंगेली पदस्थापना के दौरान जादू-टोना के नाम पर नंगे पैर अंगारों में चलकर उन्होंने जागरूकता अभियान भी चलाया था। मूलत: केरला के ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाली नीतू कमल ने इंजीनियरिंग की बढ़ाई की है हालांकि वे आईएएस बनना चाहती थी पर दूसरी बार ही वे आईपीएस में चयनित हो गई और पुलिस विभाग में अपनी सेवायें देनी शुरू कर दीं। काफी गंभीर तथा संजीदा अफसरों में इनकी गिनती होती है। पर अनुशासन के मामलों में ये काफी सख्त हैं। रायपुर जिले में कानून व्यवस्था स्थापित करने, वीआईपी दखल के बीच राजधानी की यातायात व्यवस्था सुधारना इनके लिए बड़ी चुनौती है।
और अब बस…
0 झीरम घाटी नक्सली हमले की एसआईटी जांच, नान घोटाले सहित जनसंपर्क विभाग की जांच से कुछ अफसरों पर आंच आना तय है। कुछ राजनेता अभी से तपिश महसूस कर रहे हैं।
0 किसानों का कर्ज माफ कर उनके खाते में पैसा जमा होने के बाद भूपेश सरकार की इच्छा शक्ती का ही पता चल रहा है।
0 छत्तीसगढ़ में शराब बंदी कब…. बिहार में 2015 में शराब बंदी… 2016-17 में भयानक बाढ़ से कई मरे…. गुजरात में 1965 से शराब बंदी लागू… 1968 में भयंकर बाढ़ से तबाही…. केरल में 2017 में शराब बंदी और 2018 में प्राकृतिक आपदा से भारी नुकसान… बेवड़ो का अभिशाप खतरनाक होता है बाबा….। इसीलिए छग सरकार संभवत: विचार कर रही है।
0 मालिक मकबूजा से चर्चा में एक वन विभाग के बड़े अफसर से नये वन मंत्री मो. अकबर की जम पाएगी ऐसा लगता तो नहीं है।
0 कांग्रेस सरकार बनते ही एसीएसआरपी मंडल को गृह परिवहन, जेल का भी प्रभार मिलना चर्चा में जरूर रहा।
वरिष्ठ पत्रकार शंकर पांडेय जी की कलम (आइना ए छत्तीसगढ़)
