पंकज शुक्ला की क़लम से
भोपाल से भाजपा सांसद प्रज्ञा ठाकुर एक बार फिर अपने बयान को लेकर विवाद से घिर गई हैं। अल्प अनुभव के बाद भी जिस तेजी से वे राजनीति में आगे बढ़ी है अपने बयानों द्वारा उतनी तेजी से अपनी छवि भी गढ़ रही हैं। ऐसी छवि जिसके कारण पार्टी को बार-बार किनारा करना पड़ रहा है। भाजपा ने अपने सर्वसुलभ, विनम्र, प्रतिबद्ध सांसद आलोक संजर का टिकट काट कर कतिपय पैमानों के आधार पर प्रज्ञा को लोकसभा का उम्मीदवार बनाया था और जनता ने भी मोदी के प्रतिनिधि के रूप में प्रज्ञा को अपना बहुमत दिया। उन पर जिम्मेदारी है कि वे अपने चयन को सार्थक करें। जनता के हित में कुछ काम करें या न करें मगर कम से कम ऐसे बयान तो न दें जिससे समाज में अंधविश्वास फैले और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को चुप्पी धारण करना पड़े।
प्रज्ञा ठाकुर को जब से सांसद प्रत्याशी चुना गया था तब से वे आक्रामक दिखने के फेर में अपने ही शब्दों में उलझती जा रही हैं। सोमवार को प्रदेश भाजपा कार्यालय में पूर्व वित्तमंत्री अरुण जेटली और मप्र के पूर्व मुख्यमंत्री बाबू लाल गौर की श्रद्धांजलि देते हुए प्रज्ञा ने कहा कि भाजपा के जिन वरिष्ठ नेताओं का पिछले दिनों निधन हुआ, उसके पीछे विपक्ष का हाथ है। भाजपा को नुकसान पहुंचाने के लिए विपक्ष “मारण शक्ति’ (तांत्रिक क्रिया) का प्रयोग कर रहा है। बड़ा कठिन समय चल रहा है। जब मैं लोकसभा चुनाव लड़ रही थी, उस समय एक महाराजजी मेरे पास आए थे। उन्होंने कहा कि आप अपनी साधना को कम मत करना। साधना का समय बढ़ाते रहना। बहुत बुरा समय है, विपक्ष एक ऐसा कार्य कर रहा है, ऐसी मारण शक्ति का प्रयोग कर रहा है, जिससे भाजपा को नुकसान हो। निश्चित रूप से भाजपा के कर्मठ, योग्य और ऐसे लोगों पर असर करेगा, जो भाजपा को संभालते हैं।
प्रज्ञा ने यह बात कही तब सभा में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राकेश सिंह, सांसद प्रभात झा, कैलाश विजयवर्गीय, नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव, पूर्व राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी जैसे वरिष्ठ नेता मौजूद थे।
क्या 21 वीं सदी में हमें मानना चाहिए कि मारण क्रिया या शाप जैसा कुछ होता है? क्योंकि इन्हीं प्रज्ञा ठाकुर ने चुनाव के दौरान कहा था कि मुंबई एटीएस के पूर्व प्रमुख हेमंत करकरे ने उन्हें प्रताड़ित किया था और प्रज्ञा द्वारा शाप देने के कारण ही करकरे को आतंकवादियों ने उन्हें मार दिया।
चुनाव के दौरान ही प्रज्ञा ने कहा था कि नाथूराम गोडसे देश भक्त थे, हैं और रहेंगे। सांसद चुने जाने के बाद सीहोर जिले में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए प्रज्ञा ने कहा था कि हम आपके नाले और शौचालय को साफ करने के लिए नहीं चुने गए हैं। जिन कामों के लिए हम चुने गए हैं, उन्हें ईमानदारी से किया जाएगा।
विवादों के कारण पार्टी ने बार-बार प्रज्ञा के बयानों से खुद को अलग किया है। सोमवार को भी विपक्ष के मारण शक्ति वाले कथन पर भाजपा प्रदेशअध्यक्ष राकेश सिंह ने कहा कि प्रज्ञा ठाकुर का यह बयान राजनीतिक सन्दर्भ में था। जबकि अन्य नेता प्रतिक्रिया से बचते रहे। आखिर, पार्टी कब तक अपने सांसद के बयानों से किनारा करेगी? या चुप रह कर उनका ताप ठंडा पड़ने का इंतजार करेगी? नेताओं ने किनारा कर लिया मगर कई समर्थक प्रज्ञा ठाकुर के बचाव व समर्थन में कुतर्क गढ़ने लगे। मतबल, प्रज्ञा ने अपने समर्थकों में अंधविश्वास का सूत्र बो ही दिया। ये लोग विज्ञान को खारिज कर रहे हैं और भगवा पहने वाली अपनी नेता की बात को सही साबित करने में जुटे हैं। क्या यह श्रेष्ठ है? लोग यदि उनमें अपना आदर्श देखते हैं तो राजनीति रूप से प्रज्ञा चाहे जो हमले करें, मगर कम से कम अपने समर्थकों में अंधविश्वास और अज्ञान फैलाने का काम तो न करें। ऐसे बयानों से सांसद पद का ही नहीं समूची ‘बिरादरी’ का अवमूल्यन होता है।
