पत्रकार शेख नसीम की कलम से
भोपाल@ ऐशबाग इलाके के कई ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ मदरसे संचालित होते है जो मदरसा बोर्ड से रजिस्टर्ड तो हैं लेकिन इन मदरसों में पड़ने वाले बच्चे नही हैं।
ऐशबाग इलाके के वज्दी उल हुसैन मदरसा मस्जिद चार मीनार बाग़ फरहत अफज़ा स्थित मन्नान दीनी मदरसा और नुज़ूल कालोनी में चल रहा चिल्ड्रन गार्डन स्कूल ये तीन मदरसे ऐसे हैं जिनमे अच्छी शिक्षा के साथ समझदार टीचर्स और मदरसे में पड़ने वाले बच्चों की संख्या अच्छी तादात में हैं इन तीनो मदरसों में शिक्षा की अच्छी गुणवत्ता के साथ बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास मदरसे की टीचरों द्वारा किया जाता हैं ये तीनो मदरसे शिक्षा के बेहतरीन द्वार खोले हुए हैं इन मदरसों में बच्चों को ड्रेस,कॉपी,किताब,बस्ते और मध्यान्ह भोजन निशुल्क दिया जाता हैं मदरसे द्वारा बच्चों के अभिभावकों के साथ बच्चे की पढ़ाई और उनके मानसिक और शारीरिक विकास के मद्देनजर उनसे बातचीत की जाती हैं बच्चे का स्वभाव और उसकी आदतों पर खास नज़र रखी जाती हैं और फिर उसके हिसाब से ही बच्चों को पढ़ाई के लिए ट्रेंड किया जाता हैं और उनके अच्छे भविष्य के लिए टीचर्स बच्चों पर मेहनत करके उनको इस काबिल बनाती हैं और हर फन में माहिर कर देती हैं जिससे उनको बड़े स्कूलों में दाखिला आसानी से मिल जाता हैं
इन तीनो मदरसों को छोड़कर बाग़ फरहत अफज़ा में कुकुरमुत्तों की तरह मदरसे संचालित हो रहे हैं जो मदरसा बोर्ड से रजिस्ट्रेट तो हैं लेकिन पढ़ाई के नाम पर जीरो हैं इन मदरसों में बच्चों के नाम पर सिर्फ 5-6 हैं जो कि सिर्फ ट्यूशन पड़ने आते है। ना इन मदरसों में हवादार कमरे हैं न बेंच और कुर्सी हैं और न ही टीचर्स हैं जिनके नाम मदरसों में टीचर्स के रूप में दर्ज हैं वो दूसरे स्कूलों में पढ़ाने जा रही हैं और दूसरी जगह नोकरी कर रही हैं मध्यान्ह भोजन भी ये मदरसे संचालित करने वाले खुद खा जाते हैं और फिर साल में मदरसों को मिलने वाला अनुदान की राशि प्राप्त कर ये अपने ज़रूरी खर्च में ले लेते हैं माना की अभी दो,तीन साल से मदरसों को अनुदान नही मिला लेकिन इससे पहले जो अनुदान मिला उसका क्या। और जब शिक्षा विभाग से मदरसों की जांच के लिए अधिकारी आते है तो ये मदरसा संचालित करने वाले उनको जांच न करने के लिए प्रलोभन देते हैं और हर चीज सही सही और पूरी लिखवाने के लिए उनकी आवभगत करते हैं सरकार को ऐसे मदरसों को जल्द से जल्द बंद कर देना चाहिए और इन बेकार मदरसों को जो अनुदान दिया जा रहा हैं उसको भी बंद कर देना चाहिए और ये अनुदान की राशि ऐसे गरीब और होनहार बच्चों पर खर्च करनी चाहिए जिससे ये बच्चे आगे चलकर देश का नाम रोशन करे और देश की उन्नति में अपना योगदान दे। इन फ़र्ज़ी मदरसों को संचालित करने वालो ने अभी तक मदरसे और शिक्षा के नाम पर जो सरकार से अनुदान लिया हैं सरकार उस अनुदान को इन हरामखोरो से वापिस ले और इन पर दफा 420 का मुकदमा दर्ज करके मदरसे की प्राचार्य और टीचर्स को जेल भेजा जाए। ताकि शिक्षा के नाम पर कोई देश को चूना न लगा सके और ये पैसा उन बच्चों पर खर्च किया जाए जो वाकई इसके मुस्तहिक़ हैं।और वो बच्चे जो पड़ना चाहते हैं सरकार उन बच्चों को प्रोत्साहन देकर उनके आगे बढ़ने के विकल्प खोले।
इसलिए सरकार को चाहिए ऐसे फ़र्ज़ी मदरसों पर लगाम लगाए। में इस बाबत शिक्षा मंत्री प्रभुराम चौधरी से उनके निवास पर जाकर चर्चा करूंगा और एक आवेदन देकर ऐसे फ़र्ज़ी मदरसों पर रोक लगाने की मांग करूंगा।
