विजया पाठक
1984 का सिख दंगे का भूत कांग्रेस का पीछा नहीं छोड़ रहा है। गांधी परिवार पर लगा यह बदनुमा दाग किसी न किसी समय सामने आ जाता है। इसके साथ ही मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ पर सिख दंगों पर कार्रवाई होने वाली है। 1984 का सिख दंगा कांग्रेस के गले की हड्डी बन चुका है। सोनिया गांधी से लेकर राहुल गांधी तक 1984 दंगे के लिए सिख समुदाय से माफी मांग चुके हैं। इसके बावजूद दंगे का भूत कांग्रेस का पीछा नहीं छोड़ रहा है। अभी मामला शांत ही हुआ था कि पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने 1984 के सिख दंगों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अगर तत्कालीन गृहमंत्री पीवी नरसिम्हा राव ने इंद्र कुमार गुजराल की बात पर ध्यान दिया होता तो 1984 में हुई सिख विरोधी हिंसा की घटना टाली जा सकती थी। मनमोहन सिंह ने यह बात पूर्व प्रधानमंत्री गुजराल की जयंती पर आयोजित एक समारोह में कही। उन्होंने कहा कि दिल्ली में जब 84 के सिख दंगे हो रहे थे, गुजराल उस समय के गृहमंत्री नरसिम्हा राव के पास गए थे। गुजराल ने राव से कहा कि स्थिति इतनी गंभीर है कि सरकार के लिए जल्द से जल्द सेना को बुलाना आवश्यक है। अगर राव गुजराल की सलाह मानकर जरूरी कार्रवाई करते तो शायद 1984 के नरसंहार से बचा जा सकता था। मनमोहन सिंह के इस बयान के कई मायने निकाले जा रहे हैं। लोगों का तो यहां तक कहना है कि यह बयान मनमोहन सिंह ने सोनिया गांधी के कहने पर दिया है। यानि गांधी परिवार खासकर राजीव गांधी पर इन दंगों पर ले दाग कुछ हद तक धुल जायें। यह हो भी सकता है। चूंकि मोदी सरकार ने सिख दंगों की जांच फाइल को दोबारा खोलने की मंजूरी दी है। इस मामले में कांग्रेस के एक नेता को पहले ही आजीवन की सजा दी जा चुकी है। अब अगली तलवार मध्यप्रदेश के सीएम कमलनाथ पर लटक रही है। इन पर आरोप लग रहे हैं कि कमलनाथ की मौजूदगी में ही दिल्ली के गुरूद्वारे के पास दो सिखों को जिंदा जलाया गया था। दरअसल कमलनाथ संजय गांधी के समय के नेता हैं और संजय गांधी आक्रामक छबि वाले नेता रहे हैं।
गौरतलब है कि 1984 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या करने के बाद देश में सिख विरोधी दंगे हुए थे, जिसमें 3,325 लोग मारे गए थे। अकेले दिल्ली में 2,733 लोगों की जान गई थी। गृह मंत्रालय द्वारा नियुक्त न्यायमूर्ति जीपी माथुर (पुनरीक्षण) समिति की सिफारिश के बाद 12 फरवरी 2015 को एसआईटी का गठन किया गया था। तीन सदस्यीय एसआईटी अब तक सिख विरोधी दंगों के संबंध में दर्ज 650 मामलों में से 80 को फिर से खोल भी चुकी है। ऐसे में मनमोहन सिंह का गुजराल की जयंती के मौके पर सिख दंगों पर दिया गया बयान क्या इस दाग को नरसिम्हा राव के मत्थे पर मढ़ने की रणनीति का हिस्सा तो नहीं है?
