एक्सक्लूसिव रिपोर्ट
देश के अन्य राज्यों के साथ मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड में भी प्रवासी मजदूरों की घर वापसी हो रही है। घर वापस आने वाले मजदूरों को होम क्वॉरेंटाइन के साथ-साथ गांव में बनाए गए कोरेंटिन सेंटर में भी रखा जा रहा है। जब न्यूज़ टीम ने बुंदेलखंड के छतरपुर जिले के गांव में सेंटरों की पड़ताल की तो अलग ही तस्वीर सामने आई तथा यहाँ अलग ही नजारा देखने को मिला ।

जब टीम ग्राउंड जीरो पर छतरपुर जिले के महाराजपुर के नेगुवा गांव के स्कूल में पहुंची , जहां पर क़वारन्टीन सेंटर बनाया गया था, वहां पर ताला लगा मिला। इतना ही नहीं, वहां पर दूर-दूर तक कोई व्यक्ति नहीं देखा । जब इस संपूर्ण घटनाक्रम पर तहसीलदार आनंद जैन से इस मामले में बात की गई उन्होंने कहा कि क़वारन्टीन सेंटर स्कूल में बनाया गया है । वहां पर भी प्रवासी मजदूर रखे गए हैं, इतना ही नहीं उनको संपूर्ण व्यवस्था उपलब्ध कराई जा रही है। इस मौके पर तहसीलदार साहब का एक बेतुका बयान भी सामने आया। जिसमें उन्होंने कहा कि इन सेंटरों पर उनको रखा जाता है जिनके पास रहने के लिए घर है नहीं है !
अब यह बात समझ से परे है कि जिसके पास घर नहीं है वह आपके इस गांव में रहने के लिए क्यों आएगा ? उस व्यक्ति का जहां घर होगा वह वहीं पर जाएगा ? और वहीं पर क्वारन्टाइन होगा। अब यह बात उन्होंने किस मद्देनजर बोली यह एक समझ से परे है। इसके बाद जब न्यूज़ टीम महाराजपुर शहर में बनी क्वारन्टाइन सेंटर को देखने पहुंची , तो वहां पर भी यही देखने को मिला । वहां पहुंचने के बाद भी वहां की व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त नहीं दिखी । इतना ही नहीं , आज भी वहां पर सभी सुविधाएं नही है । तथा अभी भी सुविधाएं चुस्त-दुरुस्त की जा रही है ।संपूर्ण घटनाक्रम के बाद यही समझ में आया की निचले स्तरों पर सुविधाएं सही नहीं है । जबकि छतरपुर जिले में ट्रेन, बसों ट्रकों व पैदल चलकर सैकड़ों श्रमिक जिले के अंदर आ रहे हैं । वह अपने गांव में पहुंच रहे हैं । कहीं प्रशासन की यह लापरवाही छतरपुर जिले को ग्रीन जोन से ऑरेंज रेड जोन में ना बदल दे। क्योंकि छतरपुर जिला पन्ना, दमोह , सागर , टीकमगढ़ , ललितपुर , झांसी , महोबा , बांदा जिलों की सीमाओं को छूता है उन सभी जिलों में कोरोना मरीज मिल चुके हैं।
