मध्य प्रदेश //छतरपुर । जिले की महाराजपुर नगर पालिका करोना काल में नियम विरुद्ध काम के लिए परहेज की जरूरत भी नहीं समझती बात जनप्रतिनिधियों की विकास की हो तो फिर बात ही क्या कांग्रेस भी मेरी बीजेपी भी मेरी जातिवाद का डंका भी मेरा अब नियम कानून हम ही साहब हमारा ही सब कुछ बात करते हैं अतिक्रमण की तो जहां प्राइवेट जमीनों पर खुलेआम अतिक्रमण हो रहा है तो वहीं दूसरे विभागों की जमीनों पर भी अतिक्रमण के मामले नगरपालिका महाराजपुर के सामने आए हैं जिसमें:-
1- विभागीय अतिक्रमण क्षेत्रीय विधायक ने जहां भूमि पूजन किया पार्क का उसी खसरा नंबर पर मांगलिक भवन, नजूल, कृषि विस्तार अधिकारी भवन, राजस्व निरीक्षक कार्यालय एवं निवास, पटवारी कार्यालय के अलावा रकवा 0. 2230 आबादी (गॉवठान)की जमीन पर पार्क बनाने के लिए शिलान्यास कर दिया तो ही नगर पालिका प्रभारी सीएमओ पवन शर्मा एवं इंजीनियर दीपांशु पटेरिया द्वारा सहमति भी दे दी गई है।
परंतु प्रभारी सीएमओ साहब यह भूल गए कि जमीन नगरी प्रशासन कि नहीं है तो फिर कैसे इस पर नगरी प्रशासन निर्माण करा सकता है यह सवाल उठा और शिकायत कलेक्टर छतरपुर को दिनांक 17/ 06/2020 के कार्यालय में शिकायती आवेदन के साथ खसरा नक्शा प्रीति के साथ खेमराज चौरसिया(आर.टी.आई. कार्यकर्ता) द्वारा की गई पर काम आज भी जोरो से जारी है।
हालांकि इसी संबंध में प्रतिलिपि अनुविभागीय अधिकारी नौगांव सूचनार्थ 27/06 /2020 को भी दी गई पर प्रशासनिक अधिकारी महोदय तक शायद पहुंची ही नहीं या हो सकता है कार्यवाही कर दी गई हो पर लॉक डाउन की वजह से दस्तावेज सीएमओ साहब तक ना पहुंच पाए हो इसी संबंध में थाना महाराजपुर भी सूचना प्रति भेजी गई थी पर थाना प्रभारी ने लेने से ही मना कर दिया था उनका मानना था राजस्व विभाग का मामला अधिकारी ही दस्तावेज भेजेंगे तभी कुछ हो पाएगा।पर क्या कलेक्टर, एसडीएम, द्वारा इस मामले में भी नियम विरुद्ध कार्य करने पर मामला दर्ज कराया जाएगा यह तो सवाल बने हुए हैं।

जिस गौठान की जमीन पर पार्क निर्माण कराया जा रहा है वहां लगभग 10 वर्ष की नगर परिषद द्वारा काफी प्रयासों के बाद भी जमीन को नगरी प्रशासन के नाम ट्रांसफर नहीं करा पाई थी नगरपालिका की बिल्डिंग बनने के लिए इसी जमीन को चुना गया था जिसमें अनुविभागीय अधिकारी नौगांव द्वारा रोक लगा दी गई थी गौठान की जमीन पर निर्माण नहीं कराया जा सकता ऐसी भी जानकारी सूत्र से मिली है।
कांग्रेस विधायक नीरज दीक्षित का पार्क से विकास प्यार नगर पालिका महाराजपुर के लिए के लिए कई करोड़ की सौगात लेकर आया है। पर बात सिर्फ इतनी ही होनी है कि नगरी प्रशासन के पास जमीन है या दूसरे विभागों की जमीनों पर अतिक्रमण करके के पार्क बनाए जा रहे हैं। चर्चा तो यह भी है क्या प्राइवेट लोगों की जमीन में भी पार्क बना दिए गए हैं यह विषय बड़ा ही पेचीदा होने वाला है जो समय बताएगा करोड़ों रुपए के पार्क का निर्माण में नियम विरुद्ध तरीके से कार्य कराए जा रहे हैं।
महाराजपुर का इकलौता पार्क जो कि आज अतिक्रमण की चपेट में है जिसे देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि पार्को के नाम पर कितनी विकास राशि पर इसका विकास हुआ है होलाका पार्क का इतिहास भी बड़ा पुराना है सन1942 -1970 के दशक मैं जीर्णोद्धार पार्क निर्माण कार्य पर भी नजर दुर्दशा एवं अतिक्रमण की कहानी अगली खबर में।

पुलिस विभाग की जमीन पर अतिक्रमण नगर पालिका महाराजपुर का एक दूसरा कारनामा जो कि वार्ड नंबर 3 पुराना थाना रामलीला मुहाल के पास पुलिस विभाग की जमीन पर धर्मशाला निर्माण कर दिया गया काफी प्रयासों के बाद भी दस्तावेज तो उपलब्ध नहीं हो सके पर इतनी जानकारी पक्की है कि पुलिस विभाग की इस जमीन पर जहां नगर पालिका ने धर्मशाला निर्माण कराई है वह मुंशी का क्वार्टर हुआ करता था क्या इस मामले में अब प्रभारी सीएमओ एवं इंजीनियर पर पुलिस विभाग क्या कार्यवाही करता है यह अलग बात होगी पर सवाल यह भी उठता क्या प्रभारियों सीएमओ हो या उपयंत्री महोदय क्या नगरी प्रशासन के नियम कानून की अनदेखी कर कहीं मोटी मलाई खा गए हैं इनके कार्यकाल की जांच होनी चाहिए जिसके लिए शिकायत जल्द संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं निष्पक्ष जांच एजेंसियों से साक्ष्य सहित की जाएगी।
@खेमराज चौरसिया की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट
