भोपाल। सर्वोच्च न्यायलय द्वारा विवाह पंजीयन अनिवार्य करने के आदेश के बाद मध्यप्रदेश सरकार ने मध्यप्रदेश विवाह पंजीयन रजिस्ट्रेशन अधिनियम 2008 के माध्यम से प्रत्येक विवाह के पंजीयन की अनिवार्यतः के अंतर्गत शहरी क्षेत्रों ने 2008 के बाद के सम्पन्न विवाहों के पंजीयन के लिए नगर निगम एवं ग्रामीण क्षेत्रों के लिए पँचायत में व्यवस्था बनाई थी।ताकि सरलता से विवाह पंजीयन हो सके तथा रिकार्ड बनाया जा सके। लेकिन आपदा के अंदर अवसर तलाशने वाली भाजपा सरकार ने जहाँ जनता की कमर महँगाई के माध्यम से तोड़ रखी है वहीँ अब उसको विवाह पंजीयन के नाम पर भी अपना खज़ाना भरना है। जुलाई 2020 में न्यायालय (राजस्व) में लगने वाले प्रकरणों में अचानक वर्द्धि ,समिति पंजीयन शुल्क में वर्द्धि के बाद कल शुक्रवार को नगर निगम आयुक्त भोपाल ने संपत्ति कर के बाद अब विवाह पंजीयन शुल्क में नौ गुना बढ़ोतरी कर दी है। पहले पंजीयन शुल्क के लिए 130 रुपये देने होते थे, लेकिन अब 1100 रुपये लगेंगे। इसके साथ ही विवाह पंजीयन कराने में जितनी देर होगी, 500 रुपये हर साल के हिसाब से लेट फीस भी वसूली जाएगी।नगर निगम ने पांच हजार रुपये तक लेट फीस लेने का प्रावधान किया है। इस संबंध में निगम कमिश्नर वीएस चौधरी कोलसानी ने शुक्रवार को आदेश जारी कर दिया है। निगम प्रशासक कविंद्र कियावत ने शुल्क बढ़ाने की मंजूरी पहले ही दे दी थी। बहरहाल, निगम की इस फीस बढ़ोतरी का विरोध भी जमकर शुरू हो गया है। निगम का तर्क है कि फीस के रूप में जितना पैसा लिया जाता है, उससे ज्यादा खर्च प्रशासकीय काम, स्टेशनरी, कंप्यूटर आदि में खर्च हो जाता है। निगम के मुताबिक 130 रुपये में से 30 रुपये सांख्यिकी विभाग को मिलते हैं और 100 रुपये निगम के पास आते हैं, जबकि इससे ज्यादा खर्च हो जाता है।
गौरतलब हो कि विवाह पंजीयन के लिए निगम के पास हर साल दो से ढाई हजार आवेदन आते हैं। निगम को सिर्फ विवाह पंजीयन शुल्क से हर साल 3 लाख 25 हजार रुपये मिलते हैं। शुल्क में बढ़ोतरी करने के बाद उसे 27 लाख 50 हजार रुपये हर साल मिलेंगे। इसका मतलब है कि उसकी कमाई भी नौ गुना बढ़ जाएगी।
नगर निगम की केवल पंजीयन शुल्क वर्द्धि से भूख कम नही हुई।उसके अलावा विलम्ब से विवाह पंजीयन कराने वालों को भी मूल शुल्क के अलावा जुर्माना स्वरूप और अधिक शुल्क का भी भुगतान करना होगा। यदि किसी व्यक्ति की 2021 में ही शादी हुई है तो उसे सिर्फ 1100 रुपये पंजीयन शुल्क ही देना होगा। लेकिन यदि किसी की शादी 2017 में हुई है तो उसे चार साल की लेट फीस 500 रुपये प्रति वर्ष के हिसाब से देने होंगे। इस तरह उसे दो हजार रुपये लेट फीस और 1100 रुपये पंजीयन शुल्क के साथ कुल 3100 रुपये चुकाने होंगि। लेट फीस पांच हजार रुपये से ज्यादा नहीं लगेगी।
मध्यप्रदेश कॉंग्रेस कमेटी विधि एवं मानव अधिकार विभाग के प्रदेश प्रवक्ता सैयद ख़ालिद क़ैस ने शिवराज सरकार पर हमला करते हुए कहा कि नगर निगम द्वारा विवाह शुल्क ने अचानक वर्द्धि ने यह साबित कर दिया है कि जनता को लूटना ही इनका धेय्य बन गया है।इस प्रकार की वर्द्धि से जनता की जैब पर सीधा प्रभाव पड़ेगा तथा विवाह पंजीयन के प्रति लोगों का रुझान कम होगा। सरकार कोरोना संक्रमण के इस भयावह काल में भी आपदा का अवसर तलाशकर अपना खज़ाना भर रही है।
