”नगर परिषद सिरमौर के फाइलो मे दफन कई राज”
_आखिर इन भ्रष्टाचारियो के खिलाफ कव पुलिस तैयार करेगी पंचनामा या फिर दोषियो को ही वना लेगी अपना गवाह_
पीएमआवास योजना मे 2018 मे 327 लोगों की तैयार सूची से वाहर दी गई अपात्र व्यक्ति को एक लाख की राशि_
_तत्कालीन सीएमओ कृपाशंकर मिश्रा का कारनामा , तत्कालीन कमिश्नर रीवाे संभाग के आदेश से रोकी गई वेतन वृद्वि को आहरित कर शासन को पहुचाई लाखो की क्षति_
36 स्कीम बोरवेल मे तैयार हुआ था पंचनामा ,लोगो के द्वारा कृपाशंकर मिश्रा ,अजय पान्डेय ,मदनमोहन शर्मा को सौपे थे सवर्सिवल मोटर पम्प व विद्युत सामग्री जो है नदारत
जियो टेकिंग के नाम पर हितग्राहियो से कि अवैध वसूली , निकाय के साथ कम्पनी के कर्मचारी भी शामिल
267 हितग्राहियो की अनुमोदित सूची में अपात्रो को भी आवास योजना मे वना दिया गया पात्र
जांच के नाम पर खानापूर्ति, पक्का आवास होने के वावजूद राजनैतिक सिफारिश से कच्चा आवास वताकर हो रहा है खेल
गरीवो के हक पर नगर परिषद सिरमौर मे रसूखदारों का कव्जा
नगर परिषद में भ्रष्टाचार चरम पर , आम और खास के बीच लटक रही सरकारी योजनाएं
रीवा /सिरमौर
सिरमौर नगर परिषद में भ्रष्टाचार का बोलबाला है। आलम यह है कि अधिकारी कर्मचारी पूरी तरह निरंकुश हो चुके हैं। उन्हें जनता के सरोकार से कोई लेना देना दूर.दूर तक नहीं है। नगर परिषद सिरमौर की कार्यप्रणाली भी पूरी तरह डामाडोल है कर्मचारी अधिकारी सब कुम्भकर्णी निद्रा में सोए हुए हैं। नगर की साफ-सफाई भी महज दिखावा बनकर रह गयी है। साफ-सफाई का आंकलन करना होतो नगर के समस्त वार्डों का निरीक्षण कर बड़े ही आसानी से देखा जा सकता है। कचरों का जगह-जगह अम्बार लगा हुआ है। लोग पानी के लिए परेशान है। पीने के पानी के लिए दर दर भटक रहे है व निकाय के कर्मचारी व चंद नेता व पूर्व पार्षद कहते हैं कि सिरमौर नगर परिषद मे पेयजल की समस्या नही है । एक वार्ड में नही है तो दूसरे वार्ड से जा कर लाइन में लगे व डिव्वा से जो लाए कोई पहुंचाने नही जाएगा। बहरहाल जनता भीषण पानी की समस्या से ग्रसित है। ऐसी तमाम शिकायतों से नगर की जनता हलाकान है पर दुर्भाग्य कि सिरमौर प्रशासन समस्या निदान की वजाय चाटुकारो की हा मे हा मिला रहा है । शासकीय वोरो मे निजी लोगो का कव्जा होने की जानकारी के बावजूद मुक्त न कराना कही न कही इनकी भूमिका पर भी सवाल उठा रहा है।
स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन कलेक्टर रीवा डॉ. इलैया राजा टी से मदद की गुहार लागते हुए उक्त समस्या का निराकरण कराना चाहती है।
मामले में सिरमौर के स्थानीय एवं सामाजिक कार्यकर्ता कहते हैं कि सिरमौर नगर परिषद में किस हद तक लूट खसोट और बंदरबांट का वातावरण है, इसका अंदाजा यहां की कार्यप्रणाली से लगाया जा सकता है।
बात करें पीएम आवास योजना की तो सिरमौर नगर परिषद में उक्त योजना में जमकर धांधली की गई है। उक्त योजना का लाभ गरीब हितग्राहियों को देने के क्रम में सिरमौर नगर परिषद के अधिकारी व कर्मचारियो ने 2018 से जम कर उगाही का खेल खेला हैं। जिस पर हाल मे कुछ लोगो पर FIR दर्ज की गई है ! ये मामले में एक दो नहीं बल्कि कई अन्य भी सामिल है। इसकी उगाही की बानगी जिला प्रशासन व पूरे प्रदेश तक मे हैं।
यहा तो वर्ष 2017_18 मे 327 लोगों की जो प्रधान मंत्री आवास योजना में प्रथम सूची मे 131 व द्वितीय सूची में 196 की सूची कलेक्टर रीवा ने अनुमोदित किया था उस सूची में नाम न होने के बावजूद वार्ड नं 5 के एक अपात्र व्यक्ति के खाते मे 7/5/2018 को तत्कालीन सीएमओ कृपाशंकर मिश्र मूल पद स्वच्छता निरीक्षक द्वारा एक लाख रूपये की राशि डाली गई। लेकिन इनके कारनामे को एसडीएम एव प्रशासक महोदय नगर परिषद सिरमौर ने नज़र अंदाज कर दिया वही पुलिस ने भी आरोपी के वजाय सरकारी गवाह वना लिया । जो कई अनसुलझे सवाल व अधिकारियों के इमानदारी के साथ कथनी और करनी में अंतर को दर्शा रहा है।
मामले में स्थानीय एवं समाजिक लोग कहते हैं कि सिरमौर नगर परिषद से बंदरबांट और भ्रष्टाचार खत्म करना है तो यहां के कर्मचारियों का स्थानांतरण जिले से दूरस्थ कर देना बेहद उचित और न्यायसंगत होगा।
क्या यही है पारदर्शिता ? स्थानीय कर्मचारी होने के साथ राजनीति का पलडा इतना भारी हो गया कि भ्रष्टाचार और नगरीय निकाय के लोगो का दोहन प्रशासनिक अधिकारियो को अनियमियता दिखाई नही दी । इतना तो भगवान भी अपने भक्त के ऊपर कृपादृष्टि नही वरसाता जितनी कृपाशकर मिश्र,अजय पाण्डेय और सेवानिवृत्त मदन मोहन शर्मा के उपर प्रशासक और अन्य अधिकारियो का आर्शिवाद और कृपा मिल रही है । एक ओर माननीय प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चैहान भ्रष्टाचार मुक्त करने के लिये एडी चोटी लगा रखे है वही यहा के कर्मचारी सारे आदेशो को ताक मे रखते हुये नगरीय निकाय को खोखला कर रहे है । मध्य प्रदेश मे अपने नित नये कारनामो से चर्चित रीवा जिले की नगर परिषद सिरमौर एक वार फिर इन दिनो सुर्खिया वटोर रहा है । यहा कब क्या हो जाय कोई नही जानता । यहा तक कि विभाग भी अपने इन चंद भ्रष्टाचार मे लिप्त मठाधीशो से परेशान होगा । पर अपनी गिरती शाख को वचाने के चक्कर मे इनके गुनाहो पर पर्दा डाल रहा है । कभी विभाग व प्रशासन सीएमओ का प्रभार वदल रहा है तो कभी लेटर जारी कर सवाल जवाव कर रहा है पर वास्तविक जांच से अभी कोसो दूर है। जो वरिष्ठ अधिकारियो के लिये आगे चल कर गले की हडडी के लिये फांस वन जायेगा ।
आखिर क्यो इन भ्रष्टाचारियो को वचाया जा रहा है और कव तक वचाया जायेगा ?
इसके पीछे है किसका हाथ ? किसकी कृपा के है कृपापात्र ?
आरोप व दोष सिद्ध होने के वाद भी आखिर कव वसूला जायेगा 21 लाख 96 हजार 9 सौ 75 रूपए की राशि ?
आम जन मानस मे चर्चा का विषय वना हुआ है कि आखिर कब अच्छे दिन आएगे ।
क्रमशः______ सौदामिनी गुप्ता की कलम से
