नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने ईवीएम मशीनों में छेड़छाड़ के दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि वह जल्द ही इस संबंध में चुनौती देने के लिए कार्यक्रम आयोजित करने वाला है। इसमें राजनीतिक दलों को ईवीएम से छेड़छाड़ करके अपने दावे को साबित करने का चैलेंज दिया जाएगा। हालांकि इसकी कोई तारीख फिलहाल नहीं बताई गई है। आयोग ने बताया कि अगले लोस व विस चुनाव में वीवीपैट (वोटर वैरिफाइएबल पेपर आडिट ट्रेल सिस्टम) पूरी तरह से लागू किया जाएगा।
शुक्रवार को हुई सर्वदलीय बैठक में 42 में से 16 दलों ने मतपत्रों से चुनाव की मांग की, वहीं अधिकांश बड़े दल ईवीएम छोड़कर पीछे लौटने के पक्ष में नहीं हैं। हालांकि उन्होंने ईवीएम व्यवस्था को और पारदर्शी बनाने की मांग की। साढ़े सात घंटे चली बैठकमें 42 दलों ने रखी रायशुक्रवार को ईवीएम मुद्दे पर आयोग द्वारा बुलाई गई बैठक साढ़े सात घंटे चली। इसमें सात राष्ट्रीय और 35 राज्य स्तरीय पार्टियों ने खुल राय रखी।
बैठक के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त नसीम जैदी ने कहा, “अगले लोकसभा चुनाव में वीवीपैट व्यवस्था पूरी तरह लागू कर दी जाएगी। आयोग जल्द ही सभी राजनीतिक दलों को इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों को हैक करके दिखाने की चुनौती देगा। इस चुनौती में उन्हें यह साबित करने का मौका दिया जाएगा कि हाल में हुए पांच राज्यों के चुनाव के दौरान ईवीएम से कोई छेड़छाड़ हुई थी। इसी तरह वे यह भी साबित कर सकते हैं कि ईवीएम में कोई गड़बड़ी की जा सकती है।”
बैठक में जैदी ने साफ कहा कि ईवीएम के साथ कोई गड़बड़ी संभव ही नहीं है। प्रेजेंटेशन से भी भरोसा नहींबैठक में चुनाव आयोग के महानिदेशक सुदीप जैन ने ईवीएम के सुरक्षा मानकों का प्रेजेंटेशन दिया। इसके बावजूद 16 दल संतुष्ट नहीं हुए। उनका कहना था कि जिस तरह का अविश्वास का माहौल ईवीएम को लेकर बना है, उसे देखते हुए सभी चुनाव पूरी तरह मतपत्रों से ही कराए जाएं। मतपत्र प्रणाली ज्यादा बेहतर व पारदर्शी है। ये दल मतपत्र के पक्ष में बसपा, आप, तृणमूल कांग्रेस, राजद, भाकपा, रालोद और शिवसेना व अन्य।
बड़े दल ईवीएम के साथ-भाजपा, भाकपा, माकपा, अन्नाद्रमुक, द्रमुक, राकांपा व जदूय ने वीवीपैट मशीन लगाए जाने की शर्त के साथ ईवीएम का समर्थन किया।
कांग्रेस ने बरती सावधानी-सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने कुछ भी कहने में काफी सावधानी बरती। बैठक में आए कांग्रेस नेता व वकील विवेक तन्खा ने कहा कि ईवीएम पर लोगों में शंका पैदा हो रही है, इसे दूर करना बेहद जरूरी है। हर स्तर पर पारदर्शिता होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट भी ज्यादा पारदर्शिता की बात कर रही है, इसका मतलब निश्चित तौर पर ईवीएम नहीं है। तन्खा ने सीधे तौर पर मतपत्रों से चुनाव की मांग नहीं की।
