भोपाल । राजधानी भोपाल में जहा अपराध अपनी चरम सीमा पर है ,अपराधी बेख़ौफ़ है, वही जनता की रक्षक कहलाने वाली पुलिस का घिनोना चेहरा सामने आ रहा है. PSC की तैयारी कर रही छात्रा के सामूहिक दुराचार के कलंक की स्याही अभी भोपाल पुलिस के चेहरे से मिटी भी ना थी कि थाना ऐशबाग क्षेत्र में ऐशबाग पुलिस की प्रताड़ना से तंग पुत्र की चिंता में एक पिता ने जहर खा लिया । जिसकी हालत चिंताजनक है .और पुत्र को पुलिस ने षड्यंत्र के तहत रासुका लगाकर जेल भिजवा दिया .
गौरतलब हो बागफरहत अफज़ा निवासी बासित खान को पुलिस थाना ऐशबाग के आरक्षक महेंद्र द्वारा थाने से छोड़ने के नाम पर पैसो की मांग की थी जो पूरी नही होने पर पुलिस द्वारा बासित को हिरासत से छोड़ा नहीं जा रहा था ,उस प्रताड़ना से तंग आकर बासित के पिता ने गत दिनों ज़हर खा लिया । पिता की हालत गंभीर है, वही मामला संज्ञान में आने पर पुलिस द्वारा ताबड़तोड पुलिस हिरासत में बंद बासित पर पहले तो धारा 151 की कार्यवाही कर SDM जहांगीराबाद के समक्ष प्रस्तुत किया जहा से पुलिस ने उसको फिर उठाते हुये राष्ट्रीय सुरक्षा कानून 1980 की धारा 3 (2) के अंतर्गत गुपचुप तरीके से कलेक्टर से वारंट बनवा कर केंद्रीय जेल भोपाल में दाखिल कर दिया तथा आज घर वालो को सूचित कर दिया कि आपके लड़के को मीसा लगा दी है .
मानवाधिकारों का खुल्लम खुल्ला हनन
इस पूरे मामले में पुलिस प्रशासन का घिनोना चेहरा सामने आ रहा है ,जहाँ अवैधानिक रूप से पुलिस अभिरक्षा में रखे गए एक युवक के जीवन एवं स्वतंत्रता के साथ खिलवाड़ करते हुये पुलिस ने जहा एक ओर नवयुवक के निर्दोष पिता के जीवन को संकट में डाल दिया, वही दोषी पुलिस वाले को दंडित करने या आरोपों की जांच करने के स्थान पर राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून जैसे गंभीर मामले में नवयुवक को फंसा कर न्यायिक अभिरक्षा में भेजना मानव अधिकारों का हनन ही तो है । आल इंडिया ह्यूमन राइट्स एंड सोशल जस्टिस कौंसिल ने इस पूरे मामले पर ध्यान आकर्षित करते हुये इसे कानूनी आतंकवाद की संज्ञा दी । कौसिल की राष्ट्रिय महामंत्री सरोज जोशी ने भोपाल पुलिस पर मानव अधिकार की भक्षक का आरोप लगाया .
मामले में गंभीर त्रुटि उजागर
मानवाधिकार कार्यकर्ता एडवोकेट सैयद खालिद क़ैस द्वारा प्रतिक्रिया देते हुये कहा कि इस नवयुवक के पिता द्वारा जहर खाकर आत्महत्या का प्रयास करने तथा पुलिस आरक्षक का नाम उजागर होने के पश्चात पुलिस द्वारा घटना की जांच करने के बजाये नवयुवक पर धारा 151 की कार्यवाही करने के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा कानून की कार्यवाही सीधे- सीधे पुलिस की दादागिरी ओर पीड़ित व्यक्ति के मानव अधिकारों के साथ कुठाराघात साबित होता है, सबसे दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि पुलिस सहित जिले के मुखिया द्वारा भी इस सम्पूर्ण प्रकरण में अनदेखी की गई है । जो कि चिंता का विषय है .
थाना प्रभारी ने कहा कि वासित अपराधी है – ख़बरे आजतक के संवाददाता द्वारा थाना प्रभारी ऐशबाग राजीव जंगले इस मामले में जानकारी लेने पर थाना प्रभारी द्वारा बताया गया कि बासित थाना क्षेत्र का आदतन अपराधी है तथा उसका सम्पूर्ण परिवार आपराधिक प्रवर्ती का है परंतु बासित के विरुद्ध लगाई गई धारा 151 के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा कानून की कार्यवाही के संबंध में उन्होंने टालमटोल करते हुए बात कलेक्टर पर टाल दी, वही आरक्षक महेंद्र पर बासित को प्रताड़ित करने के आरोप पर कोई जवाब दिए बगैर उन्होंने फ़ोन काट दिया ।
