उज्जैन। महाकाल की नगरी में चल रहे 3 दिवसीय शैव महोत्सव का आज अंतिम दिन है। समापन सत्र में आज केंद्रीय मंत्री सुश्री उमा भारती,सुरेश भैया जोशी,शंकराचार्य निश्छलानंद सरस्वती,महामण्डलेश्वर विश्वात्मानंद जी,सिंहस्थ समिति अध्यक्ष माखनसिंह उपस्थित थे।
उमा ने कहा कि इस आयोजन को करने वाले प्रशंसा के पात्र हैं। जिस प्रकार श्रद्धा का मेला सिंहस्थ आयोजित होकर भव्यता पाता है उसी तरह 12 साल बाद शैव महोत्सव फिर आयोजित होगा। अपने अंदाज़ में बोलते हुए उमा ने कहा मेरा जीवन जंगल के मोगली जैसा है इसीलिए मैं करतब करती रहती हूँ। लोग मुझे विशिष्ठ समझते हैं पर मैं आप सब जैसी हूँ। भारत एक मात्र ऐसा देश है जिसने अपने धर्म और संस्कृति को नहीं छोड़ा है। सुरेश भय्याजी जोशीने कहा कि भारत भूमि अध्यात्म एवं योग की है। यहां का जीवन मूल्यों पर चलता है। नैतिकता हमारी जीवन शैली है। अन्याय, शोषण, अत्याचार, भेद भाव यहां नही है। यहां की समस्याओं का कारण धर्म की विस्मृति है। धार्मिक आस्था हमारी विशेषता है। हम पंच महाभूतों, पृथ्वी, जल, वायु, तेज, आकाश, से बने हैं। हमें इनकी सुरक्षा, इनकी रक्षा करनी होगी तभी हम सुरक्षित रहेंगे। शैव उत्सव समाज प्रबोधन, समाज जागरण का उत्सव है। हमारी यात्रा नर से नारायण की है। सामान्य से विशिष्ठ बनने की है। हम अपने अंत:करण से, आचरण से धार्मिक बनें। समापन सत्र को अन्य अतिथियों ने भी संबोधित किया
