भोपाल –मध्यप्रदेश में तेजी से अपराध बढऩे के पीछे पुलिस नहीं बल्कि अपने या रिश्तेदार और परिचित ही ज्यादातर अपनों के साथ अपराध कर रहे हैं। बीते कुछ वर्षों के आंकड़े देखे तो हत्या, लूट, डकैती, रेप, मारपीट और धोखाधड़ी जैसी घटनाओं के पीछे अपनों का ही ज्यादा हाथ रहा है। बढ़ते अपराधों के लिए केवल पुलिस को जिम्मेदार या दोषी नहीं ठहराया जा सकता है। जबकि हकीकत यही है कि पुलिस की जिम्मेदारी तो अपराध घटित होने के बा ही शुरू होती है। ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिसमें रिश्तेदारों, सगे-संबंधियों ने अपराध किया है। इस तरह के ज्यादातर अपराध भी चहारदीवारी के पीछे होते हैं, जिसकी जानकरी पुलिस को भी घटना घटित होने के पश्चात पड़ती है।
सागर जिले में हाल ही एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें एक सनकी व्यक्ति अपने चार-पांच साल के मासूम को तीसरी मंजिल से उल्टा लटकाता है। यह कृत्य वह अपने घर में कर रहा है। यदि वह बच्चे को बाहर नहीं लटकाता तो लोगों को पता ही नहीं चलता। हां जब इसकी जानकारी हो गई है तो अब पुलिस का काम है कि उसके खिलाफ सख्त एक्शन लेकर मासूम को न्याय दिलाए, क्योंक यदि देरी हो गई तो बच्चा कभी उसके हाथ से छूट गया तो उसकी जान भी जा सकती है और दूसरी अहम बात है कि बच्चा इतना छोटा और भयभीत है कि वह इसकी शिकायत भी नहीं कर सकता है।
इसी तरह प्रदेश में तेजी से बढ़ रहे महिला छेड़छाड़ और रेप की वारदातों में भी अक्सर जान पहचान वाले, परिचित, रिश्तेदार या सगी संबंधी ही सामने आते हैं। यानि साफ है कि महिला ज्यादातर अपने ही घर में असुरक्षित हैं। खासकर मासूम और नाबालिग बच्चियां। सड़क पर होने वाले अपराधों की रोकथाम तो पुलिस कर सकती है, लेकिन घर के अंदर चहारदीवार के भीतर होने वाले ऐसे अपराधों को रोकना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। कुछ समय पूर्व जहांगीराबाद में दस साल की मासूम के साथ एक वृद्ध सहित दो अन्य युवकों द्वारा दृष्कृत्य किए जाने की घटना ने भी सबको चौंका दिया था। इस मामले में भी पड़ोस में रहने वाली एक परिचित महिला का ही हाथ उजागर हुआ था। जानकारी लगने के बाद पुलिस ने अपना काम बखूबी निभाया और सभी आरोपियों की अच्छी खातिरदारी कर उन्हें सलाखों के पीछे पहुंचाया।
इसके पूर्व ही भोपाल के साकेत नगर में एक पागल प्रेमी ने ही अपनी प्रेमिका को मौत के घाट उतारकर उसका घ्रर में ही चबूतरा बनवा दिया था। इस मामले में जब पुलिस ने उसे गिर$फ्तार किया था तो पता चला कि आरोपी ने सिर्फ प्रेमिका ही नहींू बल्कि अपने माता-पिता का भी कत्ल कर उनकी लाश घर के आंगन में दफना दी थी। अब इस तरह के मामलों मेें पुलिस को दोष देना उचित नहीं है। इस तरह दरक रहे रिश्तों को समाजिक तौर-तरीकों से ही दुरुस्त किया जा सकता है। समाज को भी इसके लिए जागरुक होना होगा तभी कई मासूमों एवं बेगुनाहों को अपने ही हाथों कत्ल होने बेइज्जत होने से बचाया जा सकता है। पुलिस का भी यह कर्तव्य हो जाता है कि ऐसे मामले सामने आने पर वह समाज में जागरुकता लाने का प्रयास करे ताकि लोग अपने ही घरों में छिपे भेडिय़ों, खून के प्यासों से अपनो की रक्षा कर सकें।
