होशंगाबाद -पिपरिया के शासकीय आरएनए उत्कृष्ट महाविद्यालय की प्राचार्या द्वारा अनैतिक रूप से इंडोर स्टेडियम का उपयोग शाला भवन ओर गोदाम के लिए किये जाने ओर सूचना के अधिकार के तहत विद्यालय में किये गए नवीन ओर अन्य कार्यो की जानकारी मांगे जाने साधना न्यूज़ जिला ब्यूरो आलोक हरदेनिया पर जाती का हवाला देकर महिला-आयोग,अजाक थाने समेत अन्य विभागों में मिथ्या पूर्ण शिकायत दर्ज करवाना घोर निंदनीय है । महिला सम्मान सर्वोपरि है लेकिन महिला होने के चलते अपने अधिकारों का ग़लत उपयोग कर भृष्टाचार को बढ़ावा देना ये कौन सा तरीका है । पिछले दिनों पिपरिया मध्य प्रदेश विद्युत् मंडल में उपमहाप्रबंधक महोदय द्वारा भी डिवीजन कार्यालय में करीब 20 सालो से पदस्थ कार्यालय सहायक ओर आउटसोर्स कर्मचारियों कीभर्ती में हुए बड़े भृष्टाचार सम्बंधित मामले की जानकारी लेने पर पत्रकार लोकेश मालवीय के खिलाफ भी आवेदन देकर मुख्य मुद्दे को भटकाने ओर भृष्टाचार को दबाने की कोशिश की गयी थी । आख़िर विभाग,ओर शैक्षणिक संस्थान अपनी जगह सही हैं तो चौथे स्तम्भ के समक्ष सार्वजनिक कॉन्फ्रेंस कर सत्यापित जानकारी प्रस्तुत कर आरोपों का खंडन करे ।
स्पष्टता पर कलम का आधार है.. तो सम्बन्धितों को भी चाहिए कि पारदर्षिता दर्शाई जाए
ग़ौरतलब है कि पिछले एक सालों में पत्रकारों पर झूठे मुक़दमे, हत्या और हत्या के प्रयास ,षडयंत्र जैसे गम्भीर अपराधौं के मामलों में मध्यप्रदेश अव्वल स्थान पर रहा है। बात प्रदेश की हो या फिर देश की ..सरकार अंदरूनी द्वेष के चलते कलमकारों की सुरक्षाके लिए न तो कोई पहल करना चाहती ओर न ही कोई सुरक्षा प्रदान करना चाहती
इस देश के सिस्टम की विडंबना तो देखिए जहाँ एक छोटे से छोटे तबके ओर विभाग के लिए सरकार द्वारा आयोग गठित किये गए हैं । लेकिन आजतक पत्रकारों के लिए न तो कोई आयोग न गठित हुआ और सुरक्षा कानून लागू हुआ। चौथा स्तम्भ पर खुली बहस हो तो मेरा दावा है कि स्पष्ट यही होगा कि चौथा स्तम्भ सिर्फ नाम का है । जहाँ कुछ राज्यों में पत्रकार सुरक्षा कानून लागू कर इस अतिसंवेदनशील विषय पर राज्य सरकारो ने गम्भीरता दिखाई है सतत आभार है ।लेकिन विषय का राष्ट्रीय स्तर पर कोई सरोकार नही है । क्याकोई नेता या राजनेता पत्रकारों के जीवन यापन को लेकर सदन या सभा मे आवाज बुलंद करते देखा गया?आजतक नही।
क्या हम समाज का हिस्सा नही?
हम मानते हैं कुछ असामाजिक तत्व पत्रकारिता की आड़ में अपने स्वार्थ सिद्ध करने जैसे गैरकानूनी कार्यो को अंजाम दे रहे हैं बुराइया तो हर जगह हैं लेकिन जरूरत अच्छाइयों को है । पर-अनैतिकता ,पर-स्वार्थ ,असामाजिकता,भृष्टाचार, ओर दोसरो के लिए लड़ने वाली कलम स्वयम के अधिकारों पर चुप है तो सरकार इसे सुदामा दरिद्रता न समझे ।
सनद रहे हमें हमारी हक़ की लड़ाई लड़ना आता है। पत्रकारों के हक़ ओर उनकी सुरक्षा के लिए विगत कई वर्षों से की जा रही जायज मांग को लेकर देश के सबसे बड़े संगठन अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति ABPSS संकल्पित है ।
पिपरिया आरएनए प्राचार्या महोदया द्वारा पत्रकार आलोक हरदेनिया (साधना न्यूज़)के ख़िलाफ़ की गई झूठी शिकायत की अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति ABPSS ओर आरटीआई एक्टिविस्ट कौंसिल ऑफ इंडिया घोर निंदा करता है, और शिकायत सम्बंधित विभागों से माँग करता है कि उक्त विषय को गम्भीरता से विचारकर स्वतंत्र और निष्पक्ष जाँच की जावे । अन्यथा ABPSS ओर आरटीआई एक्टिविस्ट कौंसिल ऑफ इंडिया अग्रिम कार्यवाही हेतु स्वतंत्र है ।
लोकेश मालविया
जिलाध्यक्ष अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति ।
जिलाध्यक्ष आरटीआई एक्टिविस्ट कौंसिल ऑफ़ इंडिया।
