धार- जिले के ग्राम बाग के मध्य स्थित गवलीपुरा चोक में शनिवार को स्वैच्छिक रक्तदान शिविर में बड़ी संख्या में रक्तदाताओं ने भाग लिया। बड़ी संख्या में लोगों को अलग-अलग कारणों के चलते रक्तदान से रोका गया, उसके बावजूद शिविर में कुल 51 यूनिट रक्तदान हुआ। जिसमे मातृशक्ति ने भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया l मातृशाक्ति ने कुल 11 यूनिट रक्तदान किया l
शनिवार को ग्राम बाग में राठौड़ युवा संगठन और राठौड़ समाज के सहयोग से महेश राठौड़ (अध्यापक) और राजेंद्र राठौड़ (अध्यापक) की माताजी स्व. बीनाबाई राठौड़ की पगड़ी रस्म कार्यक्रम में परिवार द्वारा रक्तमय श्रद्धांजलि स्वरूप आयोजित स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का शुभारंभ महिला युवा राठौड़ समाज बहन कु. अलका राठौड़ (अध्यापक) ने किया। उन्होंने कहा कि सभी लोगों को स्वैच्छिक रक्तदान के लिए आगे आना चाहिए। खून की कमी के कारण हर साल सैकड़ों लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है। स्वैच्छिक रक्तदाताओं के सहयोग से ही जरूरतमंदों को समय पर खून उपलब्ध कराया जा सकता है। उन्होंने युवाओं से इस कार्य के लिए विशेष रूप से आगे आने का आह्वान किया। ज्ञात है कि स्व. बीनाबाई के निधन के बाद परिवार ने नेत्रदान का फैसला लिया था लेकिन सही मार्गदर्शन और समय ज्यादा होने के कारणों से नेत्रदान नही हो पाया था l पगड़ी रस्म का सफल संचालन सुनील जैन (डैडीजी) ने किया एवं गायत्री परिवार अलीराजपुर के रूपचंद टवली ने श्रद्धांजलि का कार्यक्रम किया l उन्होंने अपने व्यक्तव्य में नेत्रदान और रक्तदान प्रति फैली हुई भाँतियो को भी दूर किया गया l
राठौड़ युवा संगठन के सक्रिय कार्यकर्ता जितेंद्र राठौड़ ने बताया कि हमारे ग्रुप में सदस्य इस शिविर की तैयारी में कई दिनों से लगे हुये थे l इस शिविर में युवाओं ने बढ़चढ़ कर रक्तदान में हिस्सा लिया l साथ ही जिन मातृशक्तियों ने अपना अमूल्य रक्त दिया है उन्हें नमन करता हूं l
साई सेवा समिति नानपुर के तरुण राठौड़ ने बताया कि 18 से 60 वर्ष आयु का प्रत्येक स्वस्थ व्यक्ति रक्तदान कर सकता है। हर तीन माह में रक्तदान करने से किसी भी तरह का नुकसान नहीं होता है। उन्होंने कहा कि शरीर से निकाले गए रक्त की पूर्ति शरीर में 24 से 72 घंटों में हो जाती है। बड़ी संख्या में परिवार, समाजजन, राठौड़ समाज के सदस्यों और स्थानीय लोगों ने रक्तदान के लिए पंजीकरण कराया। जिनमें से बड़ी संख्या में कई रक्तदाताओं को हीमोग्लोबिन, खून व वजन की कमी समेत अन्य कारणों के चलते रक्तदान से रोका गया। विशेषकर रक्तदाताओं में खून की कमी के मामले सामने आए। फिर भी कुल 51 रक्तदाताओं ने रक्तदान किया l
राजेन्द्र राठौड़ अध्यापक ने अपने व्यक्तव्य में कहां की जिस माता ने मुझे देह दी उन्ही को श्रद्धांजलि स्वरूप मैं अपनी देह का दान करने का संकल्प लेता हूँ l अपने इस फैसले से मैं या मेरा परिवार कहीं विचलित न हो जाये l इसलिए आप मुझे या मेरे मरने के बाद मेरे परिवार को मेरे इस संकल्प को याद दिलाते रहना l परिवार ने माताजी की स्मृति में 31हजार रुपये उनके गुरुदेव नारायण कुटी अवधूत धाम धरमराय में, 11 हजार राठौड़ समाज बाग को और पांच हजार एक सौ रु मुक्तिधाम जोबट को भेंट किये l
परिवार की मानव सेवा भावनाओं को नमन करते हुए महेश राठौड़ ने बताया की परिवार के इस निर्णय से किसी अनजान व्यक्ति की जिंदगी बचाने में ये रक्त बडा ही उपयोगी साबित होगा l परिवार का यह एवं रक्तदान का निर्णय समाज एवं गांव में चर्चा का विषय बना हुआ है जो आने वाले समय मे लोगो के लिए प्रेरणादायक सिद्ध होगा l पगड़ी रस्म में जिले एव राठौड़ समाज का यह पहला रक्तदान शिविर था l ज्ञात है कि पगड़ी रस्म में राठौड़ समाज का चौथा रक्तदान शिविर था l
अलीराजपुर राठौड़ समाज अध्यक्ष किशनलाल राठौड़ ने अपने संबोधन में कहां कि शिविर में रक्तदान के अलावा नेत्रदान में संकल्प पत्र भी भरवाये गये जिसमे 40 लोगो ने मरणोपरांत नेत्रदान करने का परिवार के समक्ष निर्णय लिया l इन संकल्प पत्रों को नेत्र संकलन केंद्र गायत्री शक्तिपीठ जोबट को भेजे गये l शिविर में बड़ी संख्या में युवाओं ने पहली बार रक्तदान किया। उन्होंने कहा कि रक्तदान का महत्व समझने के बाद वह हर बार इसमें भाग लेंगे। बड़ी संख्या में युवाओ ने इस महत्वपूर्ण और यादगार लम्हे को तस्वीरों में कैद किया। जिला अस्पताल अलीराजपुर के ब्लड बैंक के अधिकारियों और स्टाफ ने को रक्तदान के लिए युवाओं को प्रेरित किया। इस आयोजन में टीम रक्तदुत अलीराजपुर, साई सेवा समिति नानपुर, ब्लड डोनर ग्रुप जोबट, जागरूक युवा मंच खट्टाली, रक्तदान समिति आम्बुआ, राठौड़ प्रयास ब्लड डोनर ग्रुप अलीराजपुर और जिला अस्पताल की ब्लड डोनेशन टीम के सदस्यों का बहुत ही सहयोग रहा l अंत मे आभार शोकाकुल परिवार ने माना l
