नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर लोकसभा क्षेत्र का उपचुनाव बीजेपी के लिए आसान नहीं है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की इस पारंपरिक सीट पर इस बार चुनावी गणित पहले की तरह बीजेपी के पक्ष में नहीं है. एक तरफ जहां सपा और बसपा मिलकर बीजेपी के खिलाफ ताल ठोक रही हैं वहीं जातिगत वोटों का हिसाब-किताब भी बीजेपी के पक्ष में नहीं है.
गोरखपुर लोकसभा सीट का गोरखनाथ पीठ के महंत लंबे अरसे से नेतृत्व करते रहे हैं. बीजेपी ने इस उपचुनाव में उपेंद्र शुक्ला को उम्मीदवार बनाया है. गोरखपुर सीट से योगी आदित्यनाथ पांच बार से चुनाव जीतते आए हैं. उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद से यह सीट खाली है. गोरखपुर में 11 मार्च को उपचुनाव होगा.
उपेंद्र शुक्ला पिछले 30 सालों में बीजेपी के पहले ब्राह्मण प्रत्याशी होंगे. योगी आदित्यनाथ ठाकुर हैं. उनसे पहले उनके गुरु महंत अवैद्यनाथ सांसद थे. योगी आदित्यनाथ ने खुद रणनीति बनाकर अपने गुरु अवैद्यनाथ को सांसद के पद पर पहुंचाया था. उनके बाद योगी ने स्वयं संसदीय क्षेत्र का नेतृत्व संभाल लिया. इस दौरान गोरखनाथ पीठ आराधना स्थल के साथ-साथ राजनीतिक वर्चस्व का प्रतीक भी बना रहा है. महंत अवैद्यनाथ ने पहली बार 1989 में गोरखपुर से चुनाव जीता था. सन 1998 से योगी आदित्यनाथ इस सीट का प्रतिनिधित्व करते रहे. इन दोनों ने मिलकर आठ बार लगातार चुनाव जीते.
