संवाददाता:-खेमराज चौरसिया(आरटीआई कार्यकर्ता) विशेष प्रतिनिधि @9893998100
छतरपुर जिले में अवैध बालू का जो कारोबार फल फूल रहा है उसे देखकर बुंदेलखंडी कहावत याद आ जाती है अंधा बांटे रेवड़ी खुद खुद अपने को दे इस कहावत की बात इसलिए कही जा रही है कि
रेत मध्य प्रदेश से ज्यादा उत्तर प्रदेश को सप्लाई होती है भले ही अखबारों और न्यूज़ चैनल की सुर्खियां बटोरती रही हो पर यहां अधिकारियों पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता हाल ही में एक रोड बनाने वाली कंपनी अलसा मेक्स गाँधी नगर गुजरात को लागत आनुमनित 400 करोड़ पैकेज न. (2,10) ने बालू लीज के लिए आवेदन किया था और आवेदन करते ही मशीनों से बालू उत्खनन चालू कर बड़े-बड़े डंप लगा लिए । लेकिन सूत्रों की माने तो अभी तक रोड बनाने बाली कम्पनी को पर्यावरण की स्वीकृति ही नहीं मिली है, और पर्यावरण की स्वीकृति के बिना ही मशीनों से रेत का उत्खनन कर जगह-जगह डंप लगा लिए है।
बड़ी बात यह भी है की जिस रोड बनाने वाली कंपनी अलसा मेक्स गाँधी नगर गुजरात की कंपनी ने यह लीज के लिये आवेदन किया है उसी कम्पनी के कुछ पेटी कॉन्ट्रैक्टरों ने रोड बनाने की रेत को यूपी भेजने का काम भी कर रहे हैं। रोड निर्माण कार्य मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के बॉर्डर के पास का है इसी बता का फायदा कम्पनी के द्वारा उठाया जा रहा है पूरे एरिये में रेत के डंप लगते है और खत्म हो जाते है बालू का उत्खनन जारी है।
अधिकारी कार्यवाही के नाम पर सिर्फ हवा में ही बातें करते हैं शायद लगता है । जैसा पूर्व में महाराजपुर तहसीलदार के साथ जो घटना घटी थी उसी का डर अधिकारियों को आज भी सता रहा है कुछ राजनेतिक लोगो की मिलीभगत से यह काम सुचारु रुप से जारी है। रोड़ बनाने बाली कम्पनी के आवेदन करते ही मशीनों से बालू उत्खनन कर एरिया भर में डंप केसे लगा लिए और अधिकरियों को भनक भी नही लगी की पर्यावरण स्वीक्रति है या नही?
इन तहसीलों क्षेत्र में हो रहा है काम:-
महाराजपुर,लवकुश नगर ,और राजनगर तहसील के पास के एरिये में पडने वाले वन क्षेत्र की भूमि पर हो रहा है, उत्खनन
और अधिकारियों को नही लगती भनक क्या ए सम्भव है? सूत्रों की मानो तो इस काम में कम्पनी और अधिकरियों की साठ गाठ से चल रहा है।
(कम्पनी के अधिकरियों ने इस मामलों में अभी पक्ष नही रखा है हालांकि उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए फोन और व्हाट्सएप से मैसेज भेजा गया है।)
