रवीन्द्र व्यास
अप्रेल माह में कांग्रेस के राष्ट्रीय नेता सत्यव्रत चतुर्वेदी ने से संन्यास की घोषणा कर कांग्रेस में हलचल मचा दी थी | रविवार को उन्होंने छतरपुर में अपने नागरिक अभिनदंन समारोह में समाजिक सरोकार की राजनीति मे सक्रीय रहने की बात कही है ।
छतरपुर के ऑडिटोरियम में रविवार को उनके प्रशंसकों ने सत्यव्रत चतुर्वेदी का नागरिक अभिनन्दन किया , इस गैर राजनैतिक कार्यक्रम में उनके राजैतिक सफर के चार दशकों पर एक मंथन भी हुआ | जिसमे झाँसी के कांग्रेस नेता वा पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन , मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री राजा पटेरिया , समाजवादी नेता जे पी निगम , गांधीवादी नेता संजय सिंह , बीजेपी विधायक पुष्पेंद्र नाथ पाठक सहित अनेकों सामजिक व्यक्तियों ने उनके राजनैतिक सफरनामे पर अपने विचार रखे | पर सब का मानना यही था कि सत्यव्रत जी को सियासत से संन्यास नहीं लेना चाहिए , और उनकी जरुरत देश और समाज को है | इन सब की भावना की कद्र करते हुए सत्यव्रत ने जो जबाब अपने ३८ मिनट के सम्बोधन में दिया वह प्रदेश के राजनैतिक समीकरणों को प्रभावित करने वाला एक बड़ा बयान माना जा रहा है |
सत्यव्रत ने अपने सम्बोधन में साफ़ कर दिया कि किसी के सियासत में रहने या ना रहने से देश ठहर नहीं जाता | उन्होंने कहा की गांधी जी , नेहरू जी ,इंदिरा जी ,राजीव जी के ना रहने के बावजूद भी देश चल रहा है | अटल जी अशक्त हैं उनका होना या ना होना बराबर है , जब इतने बड़े बड़े लोगों के ना रहने से भी देश चल रहा है तो सत्यव्रत के ना रहने से भी कौन सी दिक्कत आएगी | उन्होंने नई पीढ़ी पर भरोषा जताते हुए कहा की वैज्ञानिकों ने भी भी माना है कि अगली पीढ़ी पुरानी से दस प्रतिशत अधिक क्षमता वान होती है | हमें उस मुकाम पर पहुँचने के बाद अगली पीढ़ी के लिए स्थान रिक्त करना चाहिए | उनका मानना है की हमसे भी अधिक क्षमता वान लोग समाज में मौजूद हैं पर उन्हें मौका नहीं मिला | सत्यव्रत ने साफ़ किया कि हमने 1996 में संकल्प ले लिया था की 65 वर्ष की उम्र में राजनीति से संन्यास ले लूंगा , इसके बाद कोई संगठन और पद की जिम्मेदारी नहीं लूंगा | उन्होंने राहुल गांधी द्धारा उन्हें कांग्रेस का महामंत्री बना कर गुजरात चुनाव की जिम्मेदारी सौंपने की जिम्मेदारी सौंपने की चर्चा करते हुए कहा की जब यह जिम्मेदारी मुझे सौंपने की बात कही गई तो हमने विनम्रता पूर्वक यह कह कर अपने को अलग कर लिया की हमने संकल्प लिया है की ६५ वर्ष की उम्र के बाद कोई पद नहीं लूंगा , इसके बाद अशोक गेहलोत को गुजरात का प्रभारी बनाया गया |
सत्यव्रत के ६५ वर्ष की उम्र में राजनैतिक जबाबदारियों से सन्यास लेने पर साफ़ किया जिम्मेदारियों से मुक्ति लेने का निर्णय उनकी अपनी व्यक्तिगत सोच है की जब व्यक्ति शिथिल हो जाता है तो उसे सरकार रिटायर कर देती है | अब मै कुछ समय अपने लिए जीना चाहता हूँ | इसलिए कोई चुनाव नहीं लडूंगा , संगठन में कोई पद नहीं लूंगा | उन्होंने राजनैतिक जिम्मेदारियों से दूर रह कर राजनैतिक सफर को समाज की भलाई के लिए बढ़ाने की बात कही | उन्होंने कहा की जो राजनीति में रहा हो उसके व्यवहार में राजनैतिक अंश रहेंगे , उसके चिंतन का आधार राजनीति रहेगी , मेरे कहने का यह आशय कतई नहीं है कि छतरपुर में आग लगी हो तो में अपने फ़ार्म हाउस रक्शा पुरवा में पड़ा रहूंगा | कोई भी ऐसा मुद्दा जो क्षेत्र के जनहित से जुड़ा हो उस पर तटस्थ कभी नहीं रह सकता | यहां के विकाश में जो हो सकता है करूंगा | सामाजिक सरोकारों की कभी कोई अलग नहीं हो सकता , ना में हो सका हूँ अउ ना होऊंगा | छतरपुर का मेडिकल कालेज के मुद्दे पर शांत नहीं बैठूंगा | हाँ राजनैतिक उठा पटक से दूर रहूँगा |
अपने विचारों के अंत में उन्होंने कह ही दिया कि पार्टी के सामने चुनौती आई है , इस प्रदेश की जनता के साथ पिछले १५ वर्षों से इस मध्य प्रदेश की जनता के साथ जो कुछ हुआ है उस चुनौती को देखते हुए में तटस्थ नहीं रहूंगा | चुनाव के समय पार्टी किसे टिकिट दे रही है , उससे हमें कोई लेना देना नहीं है , पर अगर राय मांगी गई तो बेबाक राय बगैर किसी लग लपेट के दूंगा ,जो योग्य होगा उसका साथ दूंगा | अगले चुनाव में बीजेपी की इस नकारा सरकार को बदलने के लिए जो भी प्रयास होंगे करूंगा |
