कल दो बातें हुई। एक मप्र में कांग्रेस की सरकार ने सरकारी कार्यालयों में हर महीने होने वाला वंदे मातरम का गायन बंद करा दिया। दूसरा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने साफ कर दिया कि उनकी सरकार अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का इंतजार करेगी।
दोनों मुद्दों के पक्ष और विपक्ष में बहुत कुछ लिखा जा रहा है। मेरा सवाल है कि इस देश की राजनीति कैसी हो गई है ? जिस पार्टी ने वंदे मातरम गान शुरू किया वही उसे बंद करा रही है और जिसके नेताओं ने “सौगंध राम की खाते हैं … नारा लगाया वो मंदिर निर्माण से मुकर रहे हैं ।
विरोधाभास देखिए कांग्रेस के अधिवेशन में वंदे मातरम का गान होगा तो यही नेता उसमें शामिल होंगे और संघ के सामने भाजपा के लोग राम मंदिर के समर्थन में बात करेंगे ।
मजे की बात तो यह भी है कि स्वयं कांग्रेसी ही यह गिनाते हैं कि राम मंदिर आंदोलन में अब तक की सारी सफलताएं कांग्रेस के कारण मिली हैं यानी मंदिर भी कांग्रेस ही बनाएगी। वंदे मातरम पर तो कांग्रेस अपना पैटेंट ही बताती है और भाजपा के आंदोलन को नौटंकी बता रही है।
आखिर हमारे देश में ऐसा क्यों होता है ?????
इसका सीधा सा जवाब है – हमारा समाज हर चीज के लिए सरकार पर निर्भर होता जा रहा है, जिससे समाज की ताकत कम होती जा रही है। अगर समाज शक्तिशाली हो तो किसी सरकार की हिम्मत नहीं कि वो वंदे मातरम के गायन जैसे कार्यक्रम बंद करे और शक्तिशाली समाज मंदिर निर्माण के लिए तो सरकार का मुंह ताकने से रहा।
सत्ता पर निर्भरता छोड़ कर सामाजिक क्षेत्र में काम करने लोगों को जागृत करने की जरुरत है। जो लोग इस दिशा में काम कर रहे हैं उन्हें सहयोग और समर्थन की जरुरत है।
– मनोज जोशी की फेसबुक वाल से साभार
