गुवाहाटी-केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि है जम्मू-कश्मीर, असम और नगालैंड में हालात सुधरने पर वहां सुरक्षा बलों को विशेष शक्तियां देने वाला कानून अफस्पा (आर्म्ड फोर्सेस स्पेशल पावर एक्ट) खत्म किया जा सकता है। इस एक्ट में सुरक्षा बलों को बिना नोटिस किसी को भी गिरफ्तार करने के साथ सघन तालाशी अभियान चलाने का अधिकार दिया गया है।
रिजिजू ने कहा कि पिछले चार सालों में उत्तर पूर्व में सुरक्षा स्थिति में सुधार आया है। अफस्पा को कई इलाकों से हटाया भी गया है। हमें उम्मीद है कि आगे और सुधारों के बाद जल्द ही बाकी बचे इलाकों से इसे हटा लिया जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि सरकार के वार्ताकार और एनएससीएन-आईएम के बीच चल रही नागा शांति वार्ता पर भी ध्यान दिया है जा रहा है और सकारात्मक नतीजों के आने की उम्मीद है, लेकिन इसके लिए हम समय सीमा नहीं दे सकते हैं।
इन राज्यों से हट गया है अफस्पा
केंद्र सरकार ने उत्तर पूर्व राज्य मेघालय से आफस्पा को पूरी तरह हटा दिया था। साथ ही अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों से भी इसे हटाया गया था, लेकिन यह एक्ट अब भी नागालैंड, असम और अरुणाचल के तीन जिलों में लागू है। उत्तर पूर्व और जम्मू-कश्मीर से विवादित कानून अफस्पा को हटाने की मांग लंबे समय से कई संगठनों की तरफ से की जा रही है। इन संगठनों का मानना है कि सुरक्षा बलों को नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई की पूरी शक्ति मिल जाती है। नागालैंड में अफस्पा कई दशकों से है। वहीं असम में 1990 के दशक के शुरुआत से है।
क्या है अफस्पा
अफस्पा सेना और केंद्रीय सुरक्षा बलों को ‘अशांत क्षेत्रों’ में कानून का उल्लंघन करने पर किसी को भी मारने, बिना वारंट के तलाशी लेने और गिरफ्तारी करने की शक्ति देता है और केंद्र सरकार की मंजूरी के बिना अभियोजन और कानूनी मुकदमे से बलों को सुरक्षा प्रदान करता है। यह पूरे नागालैंड, असम, मणिपुर (इंफाल के सात विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों को छोड़कर) में प्रभावी है। असम और मणिपुर की राज्य सरकारों के पास अब इस अधिनियम को बनाए रखने या रद्द करने की शक्तियां हैं। गौरतलब है कि मणिपुर में इरोम शर्मीला ने आफ्सपा के खिलाफ 16 साल तक अनशन किया था। काफी लंबे समय से इस अधिनियम को हटाने की मांग की जा रही है। स्थानीय लोग अक्सर इस अधिनियम के खिलाफ प्रदर्शन करते रहे हैं।
