अशोकनगर। इनदिनों मुंगावली उपचुनाव के कारण अशोकनगर जिले की चर्चा देशभर में हो रही है। उपचुनाव के चलते प्रदेश सरकार के विकास के दावों पर जिले को परखा जा रहा है। ऐसे में इस पिछड़े जिले में विकास के दावों की पोल आंगनवाड़ी केंद्र खोल रहे हैं।
दरअसल जिले में संचालित अधिकांश आंगनवाड़ी केंद्र झोपड़ीनुमा कमरों या टीन टप्पर में चल रहे हैं। जिले के 800 से अधिक केन्द्रों के पास भवन नहीं हैं। ये केन्द्र या तो किराए के भवनों में चल रहे हैं या फिर अन्य सरकारी भवन जैसे स्कूल, पंचायत भवन और सामुदायिक भवन आदि में।
उल्लेखनीय है कि महिला एवं बाल विकास विभाग के तहत जिले में कुल 1089 आंगनवाडिय़ां संचालित हैं। इनमें से केवल 263 के पास ही स्वयं का भवन है। शेष 826 आंगनवाडिय़ा भवन विहीन हैं। भवन विहीन आंगनवाडिय़ोंं में से 490 अन्य सरकारी भवनों में संचालित की जा रही हैं। शेष 336 किराए के कमरों में चल रही हैं। जहां बच्चों के लिए न तो कमरे हैं और न ही सुविधाएं।
विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार आंगनवाड़ी भवनों के किराए के रूप में हर महीने करीब 1.40 लाख रुपए की राशि खर्चनी पड़ रही है। छोटे-छोटे अंधेरे कच्चे कमरों में चल रहे इन केन्द्रों पर बच्चों को ढंग से बैठ पाने तक की जगह नहीं है। औपचारिक रूप से कुछेक बच्चे इन आंगनवाडिय़ोंं में आते हैं। कई जगहों पर भवन बनने के बाद भी आंगनवाडिय़ोंं को नहीं मिले हैं। इससे पहले ही लाखों रुपए की लागत से बने ये भवन क्षतिग्रस्त होकर बेकार हो चुके हैं।
जिले में आंगनवाड़ी भवनों के निर्माण के लिए एक सैंकड़ा भवनों की स्वीकृति वर्ष 2017-18 में मिली है। आठ सौ भवन विहीन आंगनवाडिय़ोंं में से केवल सौ को भवन की स्वीकृति ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। यदि इस गति से काम हुआ तो भी सभी आंगनवाडिय़ों को भवन मिलने में आठ साल का समय लग जाएगा।
स्वीकृत भवनों में ईसागढ़ में 21, मुंगावली में 28, चंदेरी में 26 व अशोकनगर ग्रामीण में 26 भवनों के निर्माण की स्वीकृति मिली है। प्रत्येक भवन की लागत 7.80 लाख रुपए है। पूर्व में बीआरजीएफ योजना के तहत आंगनवाड़ी भवन निर्माण के लिए राशि जारी की गई थी, लेकिन भवनों का निर्माण नहीं हो सका।
