सीख रहा हूँ मैं भी अब
मीठा झूठ बोलने का हुनर,
कड़वे सच ने हमसे, ना
जाने,कितने अज़ीज़
छीन लिए।
भगवान मेरी चमड़ी और दिल भारत के नेताओं की तरह सख्त बना दे। मुझे भी कोरोना वायरस नहीं लगे । मध्यप्रदेश के नेता उड़ा रहे हैं ,सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां छुट्ट भैया नेता पाला बदल रहे हैं , लॉक डाउन के दौरान इन नेताओं के स्वागत सत्कार में कानून का मजाक उड़ाया जा रहा है, एक जिले से दूसरे जिले में बगैर रोक टोक इनको लाया जा रहा है , और इन नेताओं का बाल भी बांका नहीं कर पाया कोरोना वायरस । इसलिए ऊपर मैंने लिखा था ,मेरी चमड़ी और दिल दोनों सख्त कर दे , चमड़ी मोटी होगी तो वायरस कुछ नहीं कर पाएगा और दिल सख्त होगा तो बीमारों का हक खाने में डर नहीं लगेगा । जब तक मध्यप्रदेश में सत्ता परिवर्तन नहीं हुआ था, तब तक कोरोना का कोई खतरा नहीं था, जैसे ही सत्ता परिवर्तन हुआ पूरे भारत में कोरोना का डर सताने लगा और पूरे भारत में लॉक डाउन ऐसा लगा 65 दिनों के बाद भी भोपाल का ताला नहीं खुल पा रहा । जब लॉक डाउन लगा था भारत की जनता से केवल 21 दिन मांगे थे और वादा किया था कोरोना का नामोनिशान हमारे देश से मिटा देंगे, नोटबंदी के समय 60 दिन मांगे थे, और कहा था देश का काला धन वापस भारत में आ जाएंगे, वहीं पहली बार सत्ता में आने से पहले 60 महीने मांगे थे नारा था 60 साल बनाम 60 महीने भारत की जनता ने सब बातों पर विश्वास करते हुए 60 महीने दिए मगर ना कोरोना खत्म हुआ ना काला धन वापस आया ना किसी के खाते में 15 लाख रुपए आए।
अब महाराष्ट्र का नंबर है ,जैसे मध्यप्रदेश में सत्ता परिवर्तन हुआ था ,अब आसार महाराष्ट्र की तरफ इशारा कर रहे हैं ।
इस महामारी में मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल का एक निजी अस्पताल बड़ी सुर्खियों में है, इस अस्पताल के पास संजीवनी बूटी आ गई है, या ऊपर वाले से सीधे तार जुड़ गए हैं, भोपाल के इस निजी अस्पताल के इलाज को देखकर अमेरिका के राष्ट्रपति ने अस्पताल मालिक को फोन लगाकर पूछा प्रभु हमको भी कोरोना का इलाज बता दो । अमरीका के राष्ट्रपति को भी समझ में नहीं आ रहा की भारत में ऐसा कौन सा इलाज आ गया, जहां पर कोरोना के मरीज ठीक हो रहे हैं । यह मरीज वाकई कोरोना कोविद 19 के हैं या उनको फर्जी तरीके से मरीज बनाकर निजी अस्पताल में भेजा जा रहा है , पूरे मध्यप्रदेश की बात करें तो अभी तक 305 मरीजों की मृत्यु हुई है । बहुत सारे मरीज जिनकी मृत्यु हुई वो गैस पीड़ित थे । जो कैंसर , सांस की तकलीफ , टीबी , जैसी बीमारियों से सालों से जूझ रहे थे , जिनकी उम्रे 60 वर्ष से ऊपर थी । अगर हम बात करें आम दिनों की तो हमारे सरकारी अस्पतालों में रोज इससे ज्यादा लोगों की मृत्यु होती है । मगर इस महामारी में डराया ज़्यादा गया है, समझाया कम गया है । भोपाल के इस निजी अस्पताल में इलाज के नाम पर एक बुखार की गोली, एलर्जी की गोली, दी जाती है और बन जाता है एक मरीज का बिल लाखों में । यह पैसा किस-किस की जेब में जा रहा है यह जांच का विषय है ।
ईमान बेचकर जो बेईमान
होता हैं,
आज की दुनिया में उसी
का सम्मान होता हैं
प्रस्तुति
सैयद अखलाक अली बाकानेर
