विश्व गुरु बनने का सपना देखने वाली मोदी सरकार की उपलब्धियों को हिंदुस्तान ही नहीं वरन सम्पूर्ण विश्व याद रखेगा।उपलब्धियों के लिए नही वरन उसकी नाकामियों के कारण ,70 वर्ष के स्वर्णिम भारत को श्मशान बनाने के लिए,ऑक्सीज़न की कमी में सड़कों पर मरने के लिए ,रेंडीसीवीर इंजेक्शन की काला बाज़ारी के लिए,खराब स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए।खोखले दावो के लिए,बर्बाद होती अर्थव्यवस्था के लिए,छिनते रोज़गार के लिए,बेरोज़गारी से मरते नोजवानों के लिए ।
आज सम्पूर्ण भारत कोरोना संक्रमण के अभिशाप से झूझ रहा है।विकास के नाम पर विनाश की गंगा बहाने वाली मोदी सरकार ने 05 राज्यो में चुनाव कराने और जीतने के लालच में सारे देश को श्मशान बना डाला। सत्ता के नशे में देश को कोरोना संक्रमण में विश्व गुरु बनाने वाली सरकार हर मोर्चे पर विफल हो चुकी है। आज देश जिस विकट समय से गुज़र रहा है उसकी किसी ने भी सपने में कल्पना तक नही की थी। और आज देश जिस मकाम पर है उसके लिए सरकार ही ज़िम्मेदार है। देश में जल रही चिताओं की रौशनी आज सारे विश्व में हमारी नाकामी को उजागर कर रही है।
कल सोशल मीडिया पर हिन्दू हृदय सम्राट कहे जाने वाले उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के राज्य की एक दिल दहलाने वाली तस्वीर ने जहाँ योगी जी के तमाम दावों की पोल खोली ,वहीँ इंसानियत को शर्मसार कर दिया। यह तस्वीर तब सामने आई जब योगी जी ने यह घोषणा की के प्रदेश में ऑक्सीज़न की कमी से कोई मौत नही हुई,स्वास्थ्य व्यवस्था बहुत मजबूत है। मैं बात कर रहा हूँ उत्तरप्रदेश के जौनपुर ज़िले के थाना – मड़ियाहूं की उस तस्वीर की जिसमे
साइकिल से पत्नी का शव लेकर घुम रहे हैं तीलकधारी सिंह (अम्बरपुर मड़ीयाहू जौनपुर ) की पत्नी बिना एम्बुलेंस के बिना इलाज के महज इस लिए मर गई क्योंकि वह योगी जी के रामराज्य में रहती थी। दुर्भाग्य की बात यह है कि उस गरीब बुज़ुर्ग की किसी ने कोई मदद नही की ,कोई उसका साथ देने को तैयार नही था। उसे उचित इलाज नही मिला,मरने के बाद एम्बुलेंस नसीब नही हुई और साइकल पर ले जारहे बुज़ुर्ग की दयनीय स्थिति सारे खोखले दावों की पोल तो खोल ही रही थी साथ ही चीख चीख कर यह विलाप कर रही थी रामराज्य में जानवरों से भी ज़्यादा दर्दनाक मौत नसीब होना उत्तरप्रदेश सरकार की उपलब्धि ही तो है,राम के नाम पर वोट ओर नोट मांगने वाली पार्टी आज विश्व बैंक से उधार मांग रही है,विदेशों से भीख मांग रही है।दुश्मन देश हमारी व्यथा पर हमारी मदद को तैयार है।क्या इसी रामराज्य की कल्पना की थी हमने। भगवान राम का नाम बदनाम कर राजनैतिक रोटियां सेंकने वाले आज हर मोर्चे पर विफल है।
अफ़सोस होता है हमारे राजनेताओं पर उनकी कोरी घोषणाओं पर ,उनकी लचर स्वास्थ्य व्यवस्था पर। हमें अस्पताल की ज़रूरत थी,स्वास्थ्य सेवाओं में बढोत्तरी की ज़रूरत थी,ज़रूरत थी लोगों को रोटी , कपड़ा और रोज़गार की। सरकार की उपलब्धि तो देखिये अस्पतालों में ऑक्सीज़न नही,इलाज नही उचित स्वास्थ्य व्यवस्था नही।लोग बिना उपचार के सड़को पर दम तोड़ रहे हैं,श्मशान,कब्रस्तान लाशों से भरे हैं। लाशों को सम्मानजनक अंतिम संस्कार नसीब नही हो रहा। कोरोना भगाने के लिए ताली थाली ओर दीये जलाने वालों ने आज सारा देश चिताओं की शक्ल में जला डाला। बुलेट ट्रेन का सपना दिखाने वालों के राज्य में एम्बुलेंस तक नसीब नही है।
क्या ?यही है विश्व गुरु बनने का मार्ग। अगर यही है तो नही चाहिए हमें अच्छे दिन,हमारे पुराने और बुरे दिन ही अच्छे थे।
@सैयद ख़ालिद क़ैस की कलम से।

