पंकज शुक्ला, 9893699941
मध्य प्रदेश की 15 वीं विधानसभा का 7 जनवरी से आगाज हो रहा है। यह विधानसभा नए ‘रूप-रंग’ के साथ आरंभ हो रही है। कल तक जो सत्ता संभाल रहे थे आज वे विपक्ष में बैठेंगे और जो सरकार पर हमलावर हुआ करते थे उनके हाथों में सत्ता सूत्र होंगे। मप्र के राजनीतिक इतिहास में यह पहला मौका है जब 230 सदस्यों वाली विधानसभा में 109 सदस्यों के साथ विपक्ष भरपूर ताकत लिए डटा रहेगा। यदि विपक्ष से चूक हुई या सत्ता पक्ष ने निराश किया तो जनता प्रहर भी होगा जिसमें जनता सीधे मंत्रियों से अपने सवाल पूछ सकेगी। जन प्रतिनिधियों की जवाबदेही तय करने वाला यह नवाचार लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम हो सकता है।
15 वीं विधानसभा जब समवेत होगी तो सदन का नजारा बदला-बदला होगा। केन्द्रीय राजनीति में प्रतिष्ठित रहे कमलनाथ सदन के मुखिया के रूप में दिखाई देंगे तो इस बार कांग्रेस को अपने दिग्गज नेताओं अजय सिंह, राजेन्द्र सिंह, मुकेश नायक, रामनिवास रावत, सुंदरलाल तिवारी की कमी खलेगी। ये वे नेता हैं जिन्होंने बीती विधानसभा में अपने तर्क और तीखे अंदाज से सत्ताधारी भाजपा को हमेशा घेरा। पराजय के कारण ये नेता इस विधानसभा के सदस्य नहीं हैं। भाजपा को भी दिग्गज नेता डॉ. गौरीशंकर शेजवार, बाबूलाल गौर, जयंत मलैया, अर्चना चिटनीस, उमाशंकर गुप्ता की कमी महसूस होगी। शेजवार और गौर ने तो चुनाव नहीं लड़ा था मगर मलैया, चिटनीस, गुप्ता सरीखे कद्दावर नेता इस बार चुनाव हार गए। ये नेता भले ही सदन में मौजूद न हों मगर दोनों ही दलों को लोकतंत्र को मजबूत करने अपनी-अपनी भूमिका में खरा उतरना होगा। यानि, प्रतिपक्ष को सवाल पूछते रहना होगा और सत्तापक्ष को तमाम विरोध के बाद भी सदन की कार्यवाही को पूर्ण करवाने की व्यवस्था करनी होगी।
कांग्रेस अपने वचन पत्र की घोषणा के अनुसार जनता प्रहर आरंभ करने जा रही है। इसमें जनता को सदन में आकर मंत्री से सवाल पूछने की छूट दी जाएगी। इसके लिए प्रक्रिया तय की जा रही है। जनता से मिले प्रश्नों का चयन कर तय समय में प्रश्नकर्ता को सदन में आ कर सवाल करने का मौका दिया जाएगा। यह विधायिका में जनता की प्रत्यक्ष भागीदारी का नवाचार है। यानि, जनप्रतिनिधियों को अब अधिक सक्रिय और सचेत होना होगा अन्यथा जनता खुद सदन में आ कर सवाल पूछ लेगी।
पुरानी कार्यवाही ऑनलाइन करने की तैयारी
ऐसे ही नवाचारों के साथ मप्र विधानसभा सचिवालय भी तैयार है। विधानसभा के प्रमुख सचिव एपी सिंह बताते हैं कि विधानसभा की कार्यवाही को पेपरलेस करने की प्रक्रिया बहुत तेजी से चल रही है। पिछली विधानसभा में करीब 40 फीसदी विधायकों ने अपने सवाल ऑनलाइन पूछे। जवाब भी विभागों से ऑनलाइन मंगवाए गए। इस बार उम्मीद है कि 15 वीं विधानसभा में सारे प्रश्न ही ऑनलाइन हों। सिंह बताते हैं कि सचिवालय विधानसभा की पुरानी कार्यवाहियों को ऑनलाइन करने में जुटा है। ऐसा होने पर विधायक अपने सेलफोन या लेपटॉप पर नजीर बन चुकी अतीत की कार्यवाहियों को जान सकेंगे। यह उनके प्रशिक्षण का एक चरण होगा और वे अधिक तैयारी के साथ सदन में आ सकेंगे। चुनाव जीतने के गुणा-भाग के बाद जनप्रतिनिधियों का सरकार चलाने और सत्ता को घेरने के जोड़-घटाव में निपुण होना ही काफी नहीं है। उन्हें सदन में जनता की बात रखनी चाहिए। मप्र की 15 वीं विधानसभा उन प्रयासों के साथ आरंभ हो रही है जो जन प्रतिनिधियों को उनके काम के प्रति अधिक समर्पित बनाएंगे।
