निष्पक्षता के बोझ में निर्वाचन आयोग. पुरानी शिकायतों पर कुछ किया नहीं नई की बारी दोबारा फारवर्ड कर दी सेंट्रल से स्टेट, स्टेट से जिला जिले से ब्लॉक पर कार्यवाही जीरो .. लो राष्ट्रपति महामहिम का पत्र भी नहीं संभाल सके आम आदमी की शिकायत पर कार्यवाही कैसे कर पाएंगे…छतरपुर:-संवाददाता:-खेमराज चौरसिया(आरटीआई कार्यकर्ता) की खास रिपोर्ट उनकी कहानी उनकी ही ज़ुबानी ,
पिछले कुछ समय से जिस प्रकार भारत निर्वाचन आयोग की भूमिका आम जन के बीच खराब होती दिखाई दे रही है ,उससे एक बात तो स्पष्ट हो गई है कि जिस आयोग की कार्यप्रणाली पर देश की सर्वोच्च न्यायालय ने संदेह किया हो उस पर जनता केसे विश्वास कर ले । इसी श्रंखला मे आयोग की छवि को धूमिल करने वाला एक और मामला सामने आया है ।
गौरतलब हो कि आर.टी.आई एक्टिविस्ट कौंसिल के महामंत्री एवम पत्रकार खेमराज चौरसिया द्वारा महामहिम राष्ट्रपति को म॰प्र॰ शासन के नगरीय प्रशासन द्वारा आचार संहिता का उल्लंघन करते हुये किये गये अवैधानिक कार्य के सम्बन्ध शिकायत की थी । उनको म॰प्र॰ शासन द्वारा नियमों को तोड़कर मनमानी करने तथा म॰प्र॰ राज्य निर्वाचन आयोग की असमर्थता के सम्बन्ध मे अवगत कराकर तत्काल कार्यवाही की माँग की थी , परन्तु दुर्भाग्य से राष्ट्रपति जी का पत्र भारत निर्वाचन आयोग सचिवालय के उदासीन व्यवहार की भेंट चढ़ गया और कार्यालय से गुमा हो गया है ।
जिसकी अपील श्री खेमराज चौरसिया द्वारा भारत निर्वाचन आयोग नई दिल्ली के समक्ष प्रस्तुत की । जहाँ प्रथम अपीलीय अधिकारी एवम प्रधान सचिव भारत निर्वाचन आयोग ने अपने आलोच्य आदेश क्रमांक rti/21/कार्यात्मक /भा.नि.आ /2017/158 दिनांक 28/03/2017 को अपीलार्थी को अवगत कराया कि “केंद्रीय जन सूचना अधिकारी ने अपने कार्यालय मे आपके दिनांक 10/04/2015 के पत्र को खोजने की कोशिश की । केन्द्रीय जन सूचना अधिकारी द्वारा वही जानकारी उपलब्ध कराई जा सकती है जो उनके पास भौतिक रूप मे उपलब्ध हो । चूँकि अपीलार्थी का पत्र आयोग मे ढ़ूंढ़ा नही जा सकता तथा अपीलार्थी द्वारा उसकी प्रति भी संलग्न नही की गई है ।
अतः इस सम्बन्ध मे केन्द्रीय जन सूचना अधिकारी को निर्देशित नही किया जा सकता है ,अपील खारिज की जाती है ”
आर टी आई एक्टिविस्ट कौंसिल के अध्यक्ष सय्यद खालिद कैस ने प्रथम अपीलीय अधिकारी के इस आदेश पर कहा की आयोग अपनी अनियमितता को छिपा रहा है । नियम अनुसार आयोग के कार्यालय से महामहिम राष्ट्रपति के पत्र के घूमने पर आयोग को जाँच कर दोषी के विरुध्द कानूनी कार्यवाई करनी थी ,परन्तु अपनी जिम्मेदारी से बचते हुये अपीलीय अधिकारी द्वारा अपीलार्थी को ही कटघरे मे खड़ा कर दिया है जो कि घोर निन्दनीय है ।
आर.टी.आई मे माँगी गई जानकारी से हुआ खुला
आर.टी.आई एक्टिविस्ट खेमराज चौरसिया द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत माँगी गई जानकारी मे भारत निर्वाचन आयोग के पत्र क्रमांक 04/आर टी आई/पत्र/कार्यात्मक/भा.नि.आ./2017/568, दिनांक09/02/2017 मे आयोग ने लिखा कि आवेदक का पत्र दिनाक 02/04/2015 जो राष्ट्रपति सचिवालय के सख्या ——-दिनाक 10/04/2015 के माध्यम से आयोग मे भेजा गया था, जो आयोग मे प्राप्त तो हुआ था,परन्तु काफी प्रयासों के बावजूद भी खोज नहीं जा सका है।
अर्थात राष्ट्रपति सचिवालय जैसे अति महत्वपूर्ण कार्यालय के प्रति आयोग के इस व्यवहार से यह स्पष्ट होता है की आयोग कितना उदासीन है ,तो आम इंसान की क्या बिसात ?
क्या है मामला –
श्री खेमराज के अनुसार मध्य प्रदेश मे नगरीय निकायो के चुनावो की दिनांक 02/11/2014 को मे नगरीय प्रशासन विभाग ने आचार संहिता लागू होने के एक दिन बाद चार नगरीय निकायों (महाराजपुर ,गोटेगाँव,राजगढ़ तथा पाली )के आरक्षण मे फेरबदल कर दिया। है।
अहम् बात यह है कि इन चारो जगहों पर बदले आरक्षण के अनुसार निर्वाचन प्रक्रिया की गई है। जबकि आचार संहिता के बाद यह कार्य स्वयं ही संहिता का उल्लंघन था ।परंतु शासन ,प्रशासन की खामोशी इस बात का प्रमाण है कि इनमें कितनी उदासीनता है । इस बारे मे सम्बन्धित कलेक्टरो का कहना था कि आचार सहिता उल्लंघन का पता नहीं ,ऊपर से आदेश मिले थे इस लिये लागू कर दिया। गौरतलब हो कि म॰प्र॰ राज्य निर्वाचन आयोग ने 02 नंवबर 2014 को नगरीय निकाय चुनावो की घोषणा करते हुए आचार सहिता लागू कर दी थी लेकिन म.प्र.शासन नगरीय प्रशासन विकास एवम पर्यावरण विभाग के उपसचिव के.के.कतिया ने 03 नवंबर 2014 को एक अन्य आदेश जारी कर इन चार नगरपालिकाओ के आरक्षण बदल दिए। जिसके पीछे बहुत बड़ा राजनैतिक षडयंत्र था ,जो अपने राजनेता को उपकृत करने की मंशा के अनुसार किया गया था । नगरीय प्र शासन विभाग द्वारा महाराजपुर जिला छतरपुर(एससी), गोटे गॉव,जिला नरसिंहपुर(ओबीसी महिला) , राजगढ़,जिला राजगढ़(महिला) ,पाली ,जिला अलीराजपुर (अनारक्षित) मे तब्दील कर दिया गया। जो की यह परिवर्तन सीधे -सीधे आचार सहिता का उल्लंघन है। दैनिक न्यूज पेपर प्रदेश टूडे मे दिनांक 19 नवंबर 2014 मे छपी खबर के अनुसार श्री आर.परशुराम, आयुक्त राज्य निर्वाचन आयोग मप्र ने उस समय अपने बचाव मैं कहा था कि “आचार सहिता लागू होने के बाद आरक्षण प्रकिया मे परिवतर्न नही हो सकता। हमे इसकी जानकारी नहीं है।यदि शिकायत आएगी तो हम पड़ताल करवाएगे।
ज्ञात हो कि सक्रिय पत्रकार एवम आर.टी.आई कार्यकर्ता खेमराज चौरसिया द्वारा आचार संहिता उल्लंघन कर विभाग के अवैधानिक आदेश के विरुद्ध 15/11/2014 को डॉ.मसूद अख्तर तत्कालीन कलेक्टर एवम जिला निर्बाचन अधिकारी छतरपुर से मिल कर शिकायत की एव ई-मेल से दिनाक 24/11/2014 को राज्य एव केंद्र निर्वाचन आयोग से शिकायत की साथ ही अपने मोबाइल 9893998100 से कई बार शिकायत की लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई । RTI एक्टिविस्ट कौंसिल ऑफ इंडिया (मध्य प्रदेश) महासचिव एवं संवाददाता खेमराज चौरसिया (आर टी आई कार्यकर्ता ) ने थक हार कर फ़िर मान.राष्ट्रपति महोदय जी, प्रधान न्यायधीश सुप्रीम कोर्ट नई दिल्ली, प्रधान न्यायधीश उच्च न्यायालय जबलपुर मप्र से दिनाक-02/04/2015 शिकायती आवेदन प्रेषित किये । जिसमे संज्ञान लेते हुये मान.राष्ट्रपति सचिवालय से दिनांक-10 /04/2015 को si.no.P1/E/1004150241से भारत निर्वाचन आयोग सचिवालय नई दिल्ली को एक पत्र भेजा गया था । जिस पर आयोग ने कोई कारवाई नही । आवेदक द्वारा RTI आवेदन लगाकर जब जानकारी माँगी तब आयोग की हकीकत पता चली ।
श्री खेमराज ने महामहिम से तात्कालिक अधिकारी डॉ.मसूद अख्तर जिला कलेक्टर छतरपुर(मप्र), नरेश पाल कलेक्टर ,जिला नरसिंहपुर(मप्र), आनंद कुमार कलेक्टर ,जिला राजगढ़(मप्र), कृष्ण गोपाल तिवारी कलेक्टर ,जिला अलीराजपुर(मप्र), केके कतिया उप सचिव नगरी विकास एव पर्यावरण विभाग (मप्र)सहित आर.परशुराम, आयुक्त राज्य निर्बाचन आयोग (मप्र)एवम केंद्र निर्वाचन आयोग (नई दिल्ली)
के विरूद्ध कठोर कारवाई की माँग की है । ताकि दोषियों को दंड मिले ।
सब शिकायतों कागजों मेँ दम तोड़ देती हैं और दोषी या तो रिटायर हो जाते हैं या पदोन्नत होकर ऐसे स्थान पर पहुंच जाते हैं जो स्वयं अपीलीय अधिकारी बन कर खुद के विरुध्द आई नस्तियो को नष्ट करा देते हैं ।
