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भोपाल । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मॉब लिंचिंग पर खुला खत लिखने वाली 49 शख्सियतों के खिलाफ बिहार पुलिस द्वारा राजद्रोह का मामला दर्ज करने के समाचार के बाद सम्पूर्ण भारत में विरोध देखा गया । जहाँ विपक्ष ने मोदी सरकार पर हमला करते हुऐ इसे तानाशाही बताया वहीं आमजन ने स्वतंत्रता का हनन बताया । इस खबर के बाद से देश भर में चर्चाओं का दौर और निंदा के बीच अंततः बिहार पुलिस ने इस मामले में यू टर्न लिया और इन शख्सियतों के ख़िलाफ़ दर्ज राजद्रोह का मामला बंद करने का फैसला लिया है।
मुज्जफरपुर के एसएसपी ने इस बाबत केस बंद करने का आदेश दे दिया है और कहा है कि इन सेलेब्स के खिलाफ दर्ज कराया गया मामला पूरी तरह से झूठा है। पुलिस ने इसके साथ ही बताया कि सभी शख्सियतों के खिलाफ ‘फर्जी’ शिकायतें देने वाले शिकायतकर्ता और वकील सुधीर ओझा के खिलाफ शिकायत दर्ज की जाएगी।
बुधवार (नौ अक्टूबर, 2019) को पुलिस प्रवक्ता जितेंद्र कुमार ने एक अंग्रेजी चैनल से कहा जिला पुलिस ने इस मामले को ‘जानबूझकर दी गई झूठी शिकायत’ बताया है और शिकायत देने वाले के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दिया।
पुलिस का दावा -यह शिकायत ‘महज प्रचार बंटोरने के मकसद से’ दी गई थी।
राजद्रोह के दर्जा मुकदमे के ख़िलाफ़ जनता और विपक्ष की और से घोर विरोध के बाद बिहार पुलिस को होश आया और एक अधिकारी के हवाले से रिपोर्ट में आगे कहा- एसएसपी ने इन शख्सियतों के खिलाफ राजद्रोह का मामला बंद करने के लिए कहा है और बिना किसी कारण फर्जी शिकायत देने वाले पर मामला दर्ज करने को कहा है। एक से दो दिन के भीतर जांच अधिकारी इस मामले में स्थानीय कोर्ट को अपनी रिपोर्ट सौंप देगा।
विरोध के बाद भाजपा नेताओं ने भी खोला मुंह –
49शख्सियतों के ख़िलाफ़ राजद्रोह का मामला दर्जा होने की ख़बर के बाद जहाँ कॉंग्रेस , वामपंथियो ने इस मामले पर तीखी आलोचना की , परन्तु भाजपा या सरकार की और से कोई जवाब नही आया । परन्तु भारत वर्ष में लगातार भाजपा की निंदा के बीच भाजपा की नींद टूटी और इसी बीच, बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि वह भी शिकायत कर्ता ओझा द्वारा फर्जी शिकायतें दाखिल करने का शिकार बन चुके हैं। शिकायतकर्ता को आदतन विवादी करार देते हुए उन्होंने कहा- वह महज पब्लिसिटी पाने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, फिल्म अभिनेता अमिताभ बच्चन और ऋतिक रोशन के खिलाफ अखबारों की खबरों के आधार पर शिकायत तक दे चुका है।
डिप्टी सीएम यह भी बोले कि बीजेपी, आरएसएस या फिर नरेंद्र मोदी को इस मामले में घसीटना ठीक नहीं है। वैसे, इस मामले में पुलिसिया कार्रवाई तब हुई है।
संघ प्रमुख के बयान के बाद चेती बिहार सरकार और लिया मुकदमा वापस लेने का फैसला
49 शख्सियतों के ख़िलाफ़ राजद्रोह के मुक़दमे की ख़बर से जहाँ जनता ओए विपक्ष ने भाजपा को घेराव वहीं संघ प्रमुख भी इस ख़बर से खफा नज़र आए और उनकी चुप्पी तोड़ने के बाद ही बिहार भाजपा ने यह क़दम उठाया । एक दिन पहले RSS चीफ मोहन भागवत ने विजयादशमी पर कहा था कि समाज को संविधान के दायरे में रहना चाहिए।
दरअसल, जुलाई 2019 में इन शख्सियतों ने पीएम को एक चिट्ठी लिखी थी। उसमें मुस्लिमों, दलितों और अन्य अल्पसंख्यकों की भीड़ द्वारा हत्या किए जाने की घटनाओं पर तत्काल रोक के लिए पीएम से जरूरी कदम उठाने के लिए कहा गया था।
पिछले हफ्ते जिन सेलेब्स के खिलाफ राजद्रोह का मामला दर्ज किया गया था, उनमें ऐक्टर और फिल्म कलाकार अपर्णा सेन, लेखक रामचंद्र गुहा और फिल्मकार श्याम बेनेगल, अदूर गोपालकृष्णन, शुभा मुद्गल, सुमित्रा सेन, मणि रत्नम, रेवती और कोंकणा सेन समेत 49 शख्सियतों के नाम हैं। इन सभी के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद खूब हो-हल्ला हुआ था। इन सेलेब्स के खिलाफ वकील सुधीर ओझा ने शिकायत दी थी। बताया गया कि मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी चीफ रामविलास पासवान से भी उसका कनेक्शन है।
