भोपाल । मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बाद सरकार द्वारा गैस पीड़ितों के लिये बनवाए गये भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर को कोरोना पॉजिटिव मरीजों के लिए आरक्षित करने के फैसले ने जहाँ एक ओर वर्षों से इलाज करा रहे गैस पीड़ितों पर वज्रपात किया वही दूसरी ओर सरकार द्वारा कोरोना मरीजो के नाम पर पूरी अस्पताल को खाली कराया वह भी कष्टदायक था । प्रशासन ने जिस तरह इस अस्पताल की ओपीडी को बंद करवाकर भर्ती मरीज़ों सहित आईसीयू ओर वैण्टिलेटर पर रहे मरीज़ों तक को अस्पताल से बाहर निकाल दिया । नतीजतन गैस पीड़ितों को कोरोना के नाम पर बलि का बनना पड़ा ओर एक गंभीर मरीज़ तथा गैस पीड़ितों की आवाज़ उठाने वाली महिला नेत्री को जो कि वैण्टिलेटर पर थी अस्पताल से बाहर निकालने ओर उपचार आभाव में अपनी जान से हाथ तक धोने पड़े । उक्त महिला ने अपने जीवन काल में ही इसके ख़िलाफ़ सर्वोच्य न्यायालय में गुहार लगाई , परंतु वहां न्याय नही मिला ओर याचिका मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर में लगाने के निर्देश मिले जिसके पालन में आज जबलपुर हाईकोर्ट ने
मामले की गम्भीरता को लेकर अर्जेन्ट हीयरिंग की मांग पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, राज्य सरकार और भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर प्रबंधन को नोटिस जारी कर 21 अप्रैल से पूर्व जवाब मांगा है।
गौरतलब हो कि गैस पीड़ितों के लिये संघर्षरत संगठन “भोपाल ग्रुप फॉर एक्शन ” ओर से दायर जनहित याचिका क्रमांक 07350/2020 की आज वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से चीफ जस्टिस ए के मित्तल एवं जस्टिस विजय शुक्ल के समक्ष सुनवाई हुई |अदालत ने शिवराज सरकार को नोटिस जारी कर 21 अप्रैल को BMHRC में गैस पीड़ितों के इलाज के सम्बन्ध में विस्तृत हलफनामा देने के लिए आदेश दिया है इस मामले की संगठन की तरफ से पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ ने की। याचिका मध्य प्रदेश सरकार द्वारा भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर को कोरोना पीड़ित मरीजों के इलाज के लिए आरक्षित कर वहां उपचार करा रहे हज़ारो गैस पीड़ितों को उचित उपचार से वंचित कर कुठाराघात पर चिंता व्यक्त की है । याचिका में कहा गया है कि लॉकडाउन के पहले गैस पीड़ितों के लिये आरक्षित इस अस्पताल में ढेरों गैस पीड़ितों उपचार करा रहे थे , उनमे से कई आईसीयू, ओर वैण्टिलेटर पर थे जिनको अकारण वहां से निकालकर अन्याय अस्पताल में शिफ्ट किया गया या निकाल दिया । याचिका में राज्य सरकार पर यह भी आरोप लगाए गये कि जिस वक्त भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल को कोरोना मामलो के लिये आरक्षित किया जा रहा था उस दौरान हॉस्पिटल में 100 से ज्यादा गैस पीड़ित मरीजों का इलाज चल रहा था। लेकिन अब वो मरीज दूसरे हॉस्पिटल में इलाज कराने को मजबूर हो गए हैं। इसके साथ ही याचिका में यह भी कहा गया कि भोपाल में अब तक कोरोना से जिन मरीजों की मौत हुई है उनमें से पांच गैस पीड़ित मरीज थे। याचिकाकर्ता द्वारा आज हाई कोर्ट में इस याचिका की सुनवाई के दौरान यह दलील भी दी गई कि अस्पताल मे प्रति माह 30 हजार ओपीडी मरीज़ उपचार कराने आते थे। भोपाल गैस पीड़ितों की संख्या भोपाल में करीब साढ़े तीन लाख हैं। ऐसे में कोरोना को प्राथमिकता देकर भोपाल गैस पीड़ितों को मरने के लिए छोड़ देना गलत होगा। मामले की गंभीरता को देखते हुए जबलपुर हाईकोर्ट ने सभी पक्षकारों को नोटिस जारी कर हलफनामे में जवाब मांगा है। वह अस्पताल जिसमें हर माह भोपाल गैस पीड़ित 30 हजार से ज्यादा संख्या में ओपीडी मरीज आते हों, वहां इलाज अचानक बंद हो जाने से भोपाल के लाखों गैस पीड़ितों को बड़ी परेशानी हो गई है ।
@खेमराज चौरसिया आरटीआई कार्यकर्ता
