संवाददाता:-खेमराज चौरसिया(आरटीआई कार्यकर्ता)
छतरपुर- बुंदेलखंड अपनी अजब गजब परंमपराओं के लिए जाना जाता है परंतु बुंदेलखंड में जो सूखे और खनिज की लूट के हालात हैं उनको देखकर बुंदेलखंड की एक परंमपरा याद आ जाती है
बुंदेलखंड में जब कोई राहगीर भी गर्मियों के दिनों में किसी अनजान के घर पानी पीने के लिए मांगता है तो बुंदेलखंड के कुछ क्षेत्र में पीने के लिए पानी के साथ कुछ खाने के लिए गुड़ ,शक्कर पहले खिलाते हैं बाद में उसे पानी पिलाते हैं
ऐसे ही हालात इन दिनों खनिज को लेकर है जो कोई भी आवेदन लेकर आया और खनन शुरु कर देता है यहां यूपी का बुंदेलखंड हो या MP का सरकार के नुमाइंदो ने या तो बालू की खदान दे दी या पत्थर ग्रेनाइट की खदान
नियम कानून की बातें एनजीटी भले ही पर्यावरण बचाने के लिए अलग-अलग नियम बना रखे हो पर सरकार को चलाने वाले नेता और उनके प्रशासनिक अधिकारी
सरकार के मेहमान को अपना मेहमान समझ के पत्थर और बालू को बुंदेलखंड की परंमपरा जैसा ही बांट रहे हैं इसमें छतरपुर पन्ना टीकमगढ़ जैसे प्रचुर मात्रा में खनिज बहुल जिले भी शामिल है।
*खनिज विभागों मैं खदानो की स्वीकृति के लिऐ आवेदन करते ही खनिज माफ़िया खदानो का सचालन और उत्खनन चालू तो कर देते है और अधिकारियों को पर्यावरण स्वीकृति या प्रदेश की और देश की किसी भी संस्था की स्वीकृति हो या ना हो उससे भी अधिकारियों को कोई फर्क नहीं पड़ता*
*अधिकारी गुड खाने में और माफिया खनिज निकालने में लग जाते हैं इस काम में देश कीऔर प्रदेश के नामी गिरामी कंपनियों के साथ रोड बनाने वाली कंपनी भी शामिल है.*
*न्यूज़ पेपर और टीवी की सुर्खियां बने रहने के बाद भी उन पर कार्यवाही हो जाऐ इस कि सम्भावना मुश्किल से तीन से चार परसेंट ही हैऔर किसी अधिकरी ने कार्यवही कर भी दी तो वसूली भी कौन करेगा या होगी तो कब ऐ भी पता नही..
एक और बड़ा घोटाला ग्रेनाइट पत्थर एवं खदान रॉयल्टी घोटाला….
