उप चुनाव : रायसेन
प्रभुराम चौधरी भाजपा बनाम कांग्रेस से मदन अहिरवार
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बिकाऊ और जनता का गद्दार है सांची विस में मुद्दा
सांची से राजेन्द्र वर्मा की ग्राउंड रिपोर्ट
ना जोश,ना जज्बा,ना मुद्दा सिर्फ हल्की सी हलचल दिखाई देती है। 10-20 भाजपाई कार्यकर्ता आते-जाते दिखाई देते हैं। कार्यालय में कोई हलचल नही है। पता चलता है कि स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम का स्वास्थ्य खराब है। कोरोना हो चुका है,इसलिए आराम से 11-12 बजे के बीच घर से निकलने की बात कार्यालय के कुछ लोग कहते हैं,लेकिन एक कार्यकर्ता ने दिल की बात कहते हुए कहा दिया कि, उनको कोरोना हो गया है इसलिए वे अभी घर में ही रहते हैं। किसी से मिलते नही हैं। फोन पर कार्यकर्ताओं को निर्देश देते हैं। फिर भी कह दिया जाता है कि डॉक्टर साहब प्रचार में हैं । शहर कभी झंडे-बैनर से सजा रहता था। आज बिल्कुल सूना है। लोगों से प्रभुराम के बारे में बात की जाती है तो लोग उनकी खामियां लेकर बैठ जाते हैं। कहते हैं ? कैसे मान लें यह बिकाऊ नही हैं। कैसे मान लें यह जनता के गुनाहगार नही हैं ? भाजपा के कार्यकर्ता बहुत असमंजस में हैं। मतदाता अभी चुप्पी साधकर बैठा है।
जनता चुप्पी साधकर बैठी :
ऐसा लगता है जनता का चुनाव के प्रति कोई रुझान नही है। यह सीट भाजपा की परंपरागत सीट है। इस पर पूर्व मंत्री गौरी शंकर शेजवार का प्रभुत्व रहा है। पिछले चुनाव में कांग्रेस में रहते हुए प्रभुराम ने शेजवार के बेटे मुदित को हराया था। यह टीस साफ दिखाई दे रही है। शेजवार समर्थक कन्नी काटकर बैठे हैं। हालांकि,नेताओं को मनाने में,कार्यकर्ताओं को जुटाने में धनबल का उपयोग भी किया जा रहा है। रामपाल जरूर सामने आ रहे हैं,लेकिन आत्मा की आवाज़ पर कितने नेता प्रभु के साथ रहेंगे यह तो नतीजे ही बताएंगे।
कांग्रेस हुई सक्रिय :
उधर कांग्रेस ने जातिगत समीकरण का ध्यान रखते हुए सीधे सादे मदनलाल को चुनाव में उतारा है। यह गैरतगंज क्षेत्र से हैं।सांची,रायसेन की जनता इनको अजनबी बताती है। लेकिन साफ, सुथरी छवि,आम आदमी हैं। विधायक देवेंद्र पटेल, प्रदेश उपाध्यक्ष मुमताज खान और स्थानीय नेता मदनलाल को जिताने के लिए दिनरात एक कर रहे हैं। अच्छा समर्थन मिल रहा है। लोग कहते है लुटेरे,बिकाऊ लोगों से तो अच्छा है मदन लाल। सबसे ज्यादा नाराजगी और बदलाव की आग इस क्षेत्र के लोगों में धधक रही है। कांग्रेस भाजपा की अपेक्षा यहां अभी से अच्छी स्थिति में दिखाई देती है। लोगों में प्रभुराम की गद्दारी को लेकर बहुत नाराजगी है। टिकाऊ और बिकाऊ का मुद्दा भारी पड़ता दिखाई दे रहा है ।
